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	<title>Comments on: IDN करेंगे हिन्दी का नाम रोशन</title>
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	<description>Nirantar - World&#039;s first Hindi Blogzine</description>
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		<title>By: देबाशीष</title>
		<link>http://www.nirantar.org/0708-nidhi#comment-434</link>
		<dc:creator>देबाशीष</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Jul 2008 07:48:43 +0000</pubDate>
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		<description>संजय बात सही है कि IDN को प्रचलित होने में समय लगेगा, यह कुछ कुछ जाल पर हिन्दी के प्रचलन जैसा ही तो है। मेरी राय में व्यापक पाठकवर्ग को आकर्षित करने के लिये जालघर के मालिकों को साधारण डोमेन व IDN  दोनों का ही प्रयोग करना चाहिये।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>संजय बात सही है कि IDN को प्रचलित होने में समय लगेगा, यह कुछ कुछ जाल पर हिन्दी के प्रचलन जैसा ही तो है। मेरी राय में व्यापक पाठकवर्ग को आकर्षित करने के लिये जालघर के मालिकों को साधारण डोमेन व IDN  दोनों का ही प्रयोग करना चाहिये।</p>
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		<title>By: संजय करीर</title>
		<link>http://www.nirantar.org/0708-nidhi#comment-433</link>
		<dc:creator>संजय करीर</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Jul 2008 07:05:31 +0000</pubDate>
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		<description>हिंदी में जालपतों का नाम लिखने से क्‍या हम उन पाठकों को खो नहीं देंगे जो आज भी इंटरनेट पर हिंदी नहीं लिख सकते. रोमन में अधिकांश सर्च होने से यह बात जाहिर है कि आम उपयोक्‍ता को अभी इंटरनेट पर हिंदी लिखने में काफी लंबा समय तय करना होगा. जैसा कि आपने स्‍वयं लेख में कहा है कि भारत में 1 दर्जन से ज्‍यादा लिपियां हैं... और अलग अलग ब्राउजर्स का झमेला भी है....
में अब भी इस बारे में ज्‍यादा निश्चिंत नहीं हूं कि हिंदी में जालपतों को लिखना हमारे हित में और उपयोगी भी होगा या महज बस हिंदीकरण की हमारी चाहत को पूरा करने का एक जरिया मात्र बन कर रह जाएगा...
तथापि यह लेख बहुत रुचिपूर्ण और स्‍तरीय ढंग से प्रस्‍तुत किया गया है. धन्‍यवाद</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हिंदी में जालपतों का नाम लिखने से क्‍या हम उन पाठकों को खो नहीं देंगे जो आज भी इंटरनेट पर हिंदी नहीं लिख सकते. रोमन में अधिकांश सर्च होने से यह बात जाहिर है कि आम उपयोक्‍ता को अभी इंटरनेट पर हिंदी लिखने में काफी लंबा समय तय करना होगा. जैसा कि आपने स्‍वयं लेख में कहा है कि भारत में 1 दर्जन से ज्‍यादा लिपियां हैं&#8230; और अलग अलग ब्राउजर्स का झमेला भी है&#8230;.<br />
में अब भी इस बारे में ज्‍यादा निश्चिंत नहीं हूं कि हिंदी में जालपतों को लिखना हमारे हित में और उपयोगी भी होगा या महज बस हिंदीकरण की हमारी चाहत को पूरा करने का एक जरिया मात्र बन कर रह जाएगा&#8230;<br />
तथापि यह लेख बहुत रुचिपूर्ण और स्‍तरीय ढंग से प्रस्‍तुत किया गया है. धन्‍यवाद</p>
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