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	<title>Comments on: फ्यूज़न से संगीत अच्छा नहीं रह जाता</title>
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		<title>By: संजय पटेल, इंदौर</title>
		<link>http://www.nirantar.org/1206-vatayan-shahid-parvez#comment-365</link>
		<dc:creator>संजय पटेल, इंदौर</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 27 May 2007 06:22:57 +0000</pubDate>
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		<description>दीपक जी के क़लम से ख्यात सितारवादक श्री शाहिद परवेज़ पर अच्छी सामग्री पढ़ने को मिली.मैने शाहिद भाई के दो शोज़ एंकर किये हैं इन्दौर(म.प्र.) में सो बहुत नज़दीक से उन्हे देखने और सुनने का मौक़ा भी मिला. मेरा मानना है कि शाहिद  परवेज़ एक एकांतप्रिय कलाकार हैं और उनका साधना पक्ष विलक्षण है.वे चमक-दमक और तथाकथित मीडिया मैनेजमेंट से अपने आप को दूर रखते है.मीडिया भी ऐसे कलाकारों की जानबूझकर अवहेलना करता है. शाहिद परवेज़ दर-असल हमारे भारतीय शास्त्रीय संगीत के  UNSUNG HERO हैं. उनके वादन में सितार गाती सुनाई देती है. वे गायकी अंग के बारे में बहुत कहना पसंद नहीं करते वह काम उनकी सितार करती है.मंच की तहज़ीब और अनुशासन को क़ायम रखने वाले शाहिद परवेज़ बजाते वक़्त अपने बाज को खुद सुनना चाहते है....सुनाना चाहते..मंच पर हावी होते जा रहे लटको-झटकों से दूर रहने वाला ये अज़ीम फ़नकार वाक़ई अपने हुनर का उस्ताद है. ग्लैमर से धाक जमाने वाले नाम के उस्तादों के दौर में सुफ़ीयाना तबियत के परवेज़ भाई हिन्दुस्तानी क्लासिकल मौसीक़ी का दमकता परचम हैं.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>दीपक जी के क़लम से ख्यात सितारवादक श्री शाहिद परवेज़ पर अच्छी सामग्री पढ़ने को मिली.मैने शाहिद भाई के दो शोज़ एंकर किये हैं इन्दौर(म.प्र.) में सो बहुत नज़दीक से उन्हे देखने और सुनने का मौक़ा भी मिला. मेरा मानना है कि शाहिद  परवेज़ एक एकांतप्रिय कलाकार हैं और उनका साधना पक्ष विलक्षण है.वे चमक-दमक और तथाकथित मीडिया मैनेजमेंट से अपने आप को दूर रखते है.मीडिया भी ऐसे कलाकारों की जानबूझकर अवहेलना करता है. शाहिद परवेज़ दर-असल हमारे भारतीय शास्त्रीय संगीत के  UNSUNG HERO हैं. उनके वादन में सितार गाती सुनाई देती है. वे गायकी अंग के बारे में बहुत कहना पसंद नहीं करते वह काम उनकी सितार करती है.मंच की तहज़ीब और अनुशासन को क़ायम रखने वाले शाहिद परवेज़ बजाते वक़्त अपने बाज को खुद सुनना चाहते है&#8230;.सुनाना चाहते..मंच पर हावी होते जा रहे लटको-झटकों से दूर रहने वाला ये अज़ीम फ़नकार वाक़ई अपने हुनर का उस्ताद है. ग्लैमर से धाक जमाने वाले नाम के उस्तादों के दौर में सुफ़ीयाना तबियत के परवेज़ भाई हिन्दुस्तानी क्लासिकल मौसीक़ी का दमकता परचम हैं.</p>
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