आमुख कथा

असली भारत के लिये असली शिक्षा

हमारी कर्मकाण्डी शिक्षा पद्धति वास्तविक भारत की ज़रूरत मुताबिक ढली ही नहीं है

हमारी शिक्षा पद्धति में बच्चे भारी बैग लिये फिरते हैं, जोर रहता हैं रटन विद्या और परीक्षाओं पर। यहाँ पाठ्यक्रम में बाहर से अर्जित ज्ञान, हुनर और काबलियतों को स्थान नहीं मिलता। शिक्षाविद व राष्ट्रीय शोध प्रोफेसर यश पाल मानते हैं कि आधुनिक औपचारिक शिक्षा तंत्र में प्रकृति और जीवन से सीखे हुनर को शामिल करना भी ज़रूरी है।

May 29th 2007, 5

लड़कर वही निर्मल ज़माना लाना होगा

February 9, 2007 | Leave comment

image पर्यावरणविद् व चिपको आंदोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा पिछले दिनों जनशिक्षण मंच में पर्यावरण विषय पर व्याख्यान देने रतलाम आये। इस अवसर पर निरंतर के लिए पर्यावरण न अन्य विषयों पर रविशंकर श्रीवास्तव ने उनसे बातचीत की। संवाद में प्रस्तुत है उसी वार्तालाप के अंश। लेख पढ़ें »
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परिपक्व हो जायेंगे तब भोली भाली बातें करेंगे

June 1, 2005 | Leave comment

image आजकल के बच्चों मे बचपना क्यों नज़र नही आता? हिंदुस्तानी फिल्मों में इतने गाने क्यों होते हैं? नेताओं के स्वागत पोस्टर में नाम के आगे "मा." क्यों लिखा रहता है? भूख क्यों लगती है? सारे जवाब यहाँ दिये जायेंगे, फुरसत से। ससूरा गूगलवा भला अब किस काम का, पूछिये फुरसतिया से! लेख पढ़ें »
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विकिलीक्स बतायेगा पर्दे के पीछे का सच

February 9, 2007 | 2 Comments

image नये स्तंभ टेक दीर्घा में रवि रतलामी बता रहे हैं विकिपीडिया की तर्ज पर प्रारंभ, पर उससे काफी अलाहदा, एक नये और अनोखे प्रकल्प विकिलीक्स के बारे में। लेख पढ़ें »
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वेबलॉग नीतिशास्त्र

March 29, 2005 | Comments Off on वेबलॉग नीतिशास्त्र

image सारांश में पेश करते हैं पुस्तकाँश या पुस्तक समीक्षा। निरंतर के पहले अंक में हमें प्रसन्नता है रेबेका ब्लड की पुस्तक "द वेबलॉग हैन्डबुक" के अंश का हिन्दी रूपांतर प्रस्तुत करते हुए। रेबेका 1996 से अंर्तजाल पर हैं, उनका ब्लॉग रेबेकाज़ पॉकेट खासा प्रसिद्ध है। लेख पढ़ें »
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धौंस नहीं सहेंगे चिट्ठों के सिपाही

April 9, 2005 | 1 Comment

image आंदोलन का प्रतीक माने जाने वाले अखबार कार्पोरेट्स के हाथों अपना ज़मीर बेच चुके हैं। ऐसे में ब्लॉग्स का ईमानदार स्वर आशाएं जगाता है। पढ़िये ब्लॉग्स पर मीडिया मुगलों की दादागिरी पर निरंतर का दो टूक संपादकीय।साथ ही पढ़ें याहू द्वारा फ्लिकर के अधिग्रहण और याहू 360° के पर्दापण पर निरंतर द्वारा बदलते परिदृश्य का आंकलन, "बड़े खिलाड़ी के आने से बड़ा हुआ खेल"। लेख पढ़ें »
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एड्स पर फिल्में : अच्छी शुरुवात

August 5, 2006 | Leave comment

image एचआईवी-एड्स के विषय पर बनी हिंदी फीचर फिल्मों की गिनती करने के लिये तो हाथों की उँगलियाँ की भी जरुरत नहीं क्योंकि अभी तक केवल दो ही ऐसी फिल्में बनी हैं। पढ़ें अविजित मुकुल किशोर की खरी खरी। लेख पढ़ें »
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लोग साथ आते गए, कारवां बनता गया

May 23, 2005 | Leave comment

हिन्दी में शायद यह पहली पत्रिका होगी जहां संपादक एक देश में, निदेशक दूसरे देश में और टाइपिस्ट तीसरे देश में हों; जब एक की दुनिया में दिन हो और दूसरे की दुनिया में रात। अंर्तजाल पर हिन्दी भाषा की अत्यंत लोकप्रिय साहित्यिक पत्रिका "अभिव्यक्ति" तथा  "अनुभूति" की रोचक व मर्मस्पर्शी यात्रा कथा बयां कर रही हैं पूर्णिमा वर्मन। लेख पढ़ें »
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जीवन है मरीचिका

July 1, 2005 | Leave comment

image वातायन में पढ़िये प्रेम पीयुष, उमेश शर्मा और देबाशीष की कवितायें लेख पढ़ें »
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आस्कजीव्स ने निगला ब्लॉगलाईंस को

March 29, 2005 | Leave comment

image क्या याहू सिक्स आपार्ट को हथिया लेगा? क्या गूगल अब डोमेन भी बेचेगा? ये और ढेर सारी और खबरें। पढ़िए माह के दौरान घटित ब्लॉगजगत से संबंधित खबरें तड़के के साथ। लेख पढ़ें »
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विशेषज्ञ बिन सब सून

April 9, 2005 | Leave comment

जीवन के हर क्षेत्र में विशेषज्ञों की घुसपैठ जारी है। व्यक्ति के जन्म लेने से पहले ही विशेषज्ञों का रोल चालू हो जाता है। कटाक्ष कर रहे हैं रविशंकर श्रीवास्तव। लेख पढ़ें »
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