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	<title>निरंतर -हिन्दी ब्लॉगज़ीन &#124; Nirantar - Hindi Blogzine &#187; हास परिहास</title>
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	<description>Nirantar - World&#039;s first Hindi Blogzine</description>
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		<title>मिर्जा ने झेला रैबिट फूड</title>
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		<pubDate>Thu, 30 Jun 2005 20:21:52 +0000</pubDate>
		<dc:creator>अतुल अरोरा</dc:creator>
				<category><![CDATA[हास परिहास]]></category>

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		<description><![CDATA[डाक्टर की सलाह पर मिर्जा की बेगम ने छुट्टन को हुक्म सुनाया कि अब साहब को सिर्फ सलाद खिलाया जायेगा। पर मिर्जा जी तो हैरीसन फोर्ड की नाई इस रैबिट फूड को न खाने की जिद कर चुके थे। पढ़िये अतुल अरोरा का लिखा प्रहसन।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><img src="http://www.nirantar.org/images/stories/jokes.gif" border="0" alt="" hspace="3" vspace="3" align="right" />
<div class="dropCap">दो</div>
<p>पहर के दो बजे थे। दोपहर का खाना खा एक झपकी का आनंद ले रहा था। बाहर सड़क पर अलसाया सन्नाटा पसरा था। तभी कॉलबेल की चीत्कार ने नींद मे खलल डाल दिया। श्रीमती जी के दरवाजा खोलने की कोई संभावना न थी क्योकि वे सबेरे से बाथरुम में वाइपर न लगाने पर क्रुद्ध थीं। झक मारकर खुद उठा तो बाहर मिर्जा साहब खड़े थे। चेहरा एकदम गुस्से से लालपीला। बिना दुआ सलाम किये सीधे अँदर घुस गये और लगे भाभी भाभी चिल्लाने। मिर्जा का इस तरह प्रोटोकाल का उल्लंघन बहुत ही संगीन किस्म की परिस्थितियो में होता है, खासकर जब <a href="http://merapanna.blogspot.com/2004/10/blog-post_07.html">छुट्टन मिंया</a> की हरकतें नाकाबिले बर्दाश्त हो जाती है। हाईकमान यानि मिर्जा की बेगम तक दरयाफ्त पहुँचाने के लिए उन्हें हमारी बेगम का चैनल ही सबसे मुफीद मालुम पड़ता है।</p>
<p>मिर्जा ने हाँक लगायी &#8220;भाभीजान, सबेरे का कुछ खाना बचा है क्या?&#8221; यह पैंतरा हमारे लिए अझेल था। भला छुट्टन के रहते मिर्जा की हालत <a href="http://merapanna.blogspot.com/2004/10/blog-post_109774814538210172.html">स्वामी</a> जैसी क्योंकर होने लगी। दरअसल मिर्जा छुट्टन को बर्दाश्त ही इसलिए करते थे कि वह नामुराद खाना बड़ा लजीज बनाता था। हम पूछ ही बैठे कि मिर्जा क्या हुआ, छुट्टन ठीक तो है? मिर्जा तमक कर बोले, &#8220;अमाँ! उस मुस्टंडे को भला कुछ क्यूँ होने लगा?&#8221; मैने देखा श्रीमती जी मुझे घूर कर देख रही थी। इशारा साफ था कि कोई और नासमझी भरा सवाल न पूछा जाये। श्रीमती जी ने कहा, &#8220;भाईसाहब क्यो शर्मिंदा करते हैं, भला हम आपको बासी खाना क्यों खिलाऐंगे? अब भले ही छुट्टन के जैसा जायकेदार खाना न बनता हो तो भी आलू के परांठे चलेंगे क्या?&#8221; मैं तो कुर्बान हो गया श्रीमती जी की इस अदा पर। एक तीर से तीन शिकार, मिर्जा को बुरा भी नही लगा, आलू के परांठो से काम भी चल गया और छुट्टन के बारे में सवाल भी इशारो में ही दाग दिया।</p>
<div id="pullQuoteR">मिर्जा की बेगम ने छुट्टन को हुक्म सुनाया कि अब खाने में सिर्फ हरी सब्जियाँ ही बने और साहब को सिर्फ सलाद खिलाए। छुट्टन मियाँ उस दिन से बाजार से मूली लाते थे तो कच्चे पत्ते धोकर मिर्जा की प्लेट मे रख देते थे और मूली के पराँठे खुद खाते थे।</div>
<p>तीर बिल्कुल निशाने पर लगा था। मिर्जा का रिकार्ड चालू हो गया। &#8220;अरे भाभीजान, आपके हाथ के आलू के परांठे भी हमारे लिए नियामत हैं। उस खबीस छुट्टन का बस चले तो रातोदिन हमें रैबिट फूड खिला खिला कर हलकान कर दे। &#8220;रैबिट फूड क्या होता है? क्या खरगोश का कवाब वगैरह?&#8221;, मैं फिर नासमझी में पूछ बैठा। मिर्जा मिर्च के आचार के साथ परांठे के कौर निगलते हुए गरजे &#8220;अमाँ बड़े अहमक हो, हालीवुड होमीसाईड नही देखी। देख लेना समझ जाओगे।&#8221; खैर मिर्जा ने नही बताया तो नही बताया कि रैबिट फूड क्या जँजाल है। पर चार परांठे भी खा गये और मेरे यहाँ छुट्टन और अपनी बेगम की साझा सरकार की तानाशाही नीतियों पर अपना विरोध भी दर्ज कर गये। जाते जाते कह गये, &#8220;भाभीजान, अगली बार आपकी सहेली का फोन आये तो कह देना कि सबकुछ बर्दाश्त हो सकता है पर रैबिट फूड नही। अगर यह सब ज्यादा दिन चला तो सब छोड़छाड़ कर लखनऊ चला जाऊँगा। भूलभुलैया में गाईड का काम कर लूँगा पर रैबिटफूड नही खाऊँगा।&#8221;</p>
<p>मिर्जा तो चले गये, पर यह सवाल हमारे झाड़फनूस में टाँग गये कि यह रैबिट फूड क्या बला है। श्रीमती जी ने हुक्म सुनाया कि शाम को स्वामी से हालीवुड होमीसाईड की डी.वी.डी लेकर आओ। दरअसल <a href="http://merapanna.blogspot.com/2004/10/blog-post_07.html">किस्सा ए रिमोट</a> के बाद से मिर्जा को छुट्टन के साथ एक्शन पिक्चरे देखने में गश आता है। स्वामी हालीवुड का मुरीद है। मिर्जा को स्वामी के साथ पिक्चरे देखने से दो फायदे होते हैं, स्वामी का बिंदास सीन बाई सीन अंग्रेजी तर्जुमा और हाट सीन देखे जाने की चुगली छुट्टन द्वारा <a href="http://merapanna.blogspot.com/2004/10/blog-post.html">कनाडा</a> पहुँचाये जाने का कोई डर नही। तो जनाब शाम को स्वामी से हालीवुड होमीसाईड की डीवीडी ली। दो बार देखने के बाद समझ मे आया कि मिर्जा के दर्द का उस सीन से जरुर ताल्लुक है जिसमें हैरीसन फोर्ड एक हत्याकांड की जाँचपड़ताल के दौरान एक पुलिसिए से बर्गर मँगाते हैं। यहाँ <em>जो</em> हैरीसन फोर्ड के पात्र का नाम है। आप भी यह संवाद देखिए।</p>
<blockquote><p><strong>जो:</strong> देखो यह क्या है? तुम्हे इसमें सलाद दिख रही हैं? किसी ने इस कमरे मे मुझे सलाद कहते सुना क्या?</p>
<p><strong>पुलिसवाला:</strong> सॉरी&#8230;</p>
<p><strong>जो:</strong> क्या सॉरी? आजकल अकादमी में क्या सिखाते हैं? लो देखो! इसमें हरे पत्ते भी है। यह रैबिट फूड बाहर फेंक कर दूसरा सैंडविच लाओ मेरे लिए।</p>
<p><strong>पुलिसवाला:</strong> जी जनाब!</p>
<p><strong>जो:</strong> और सुनो, इस बार रैबिट फूड न उठा लाना।</p></blockquote>
<p>अब मामला कुछ कुछ समझ आ रहा था। पूरी गुत्थी सुलझाने के लिए मिर्जा की बेगम और छुट्टन से दरयाफ्त जरूरी थी। शाम को मेमसाहब ने कनाडा कॉल लगायी तो आधा माला साफ हो गया। दरअसल करेला नीम चढा था यानि मिर्जा एक तो महाचटोरे और तिस पर वज्रआलसी। कोलेस्ट्राल नही बढ़ता तो क्या होता। डाक्टर भी मिर्जा की बेगम का चमचा निकला। सीधे बेगम मिर्जा की बेगम को मिर्जा के खाने पर लगाम लगाने को कह दिया। मिर्जा की बेगम ने छुट्टन को हुक्म सुनाया कि अब खाने में सिर्फ हरी सब्जियाँ ही बने और साहब को सिर्फ सलाद खिलाए। छुट्टन मियाँ उस दिन से बाजार से मूली लाते थे तो कच्चे पत्ते धोकर मिर्जा की प्लेट मे रख देते थे और मूली के पराँठे खुद खाते थे।  कच्ची गोभी, उबले भुट्टे, और कच्चे टमाटर खा खाकर मिर्जा का जीना हराम हो गया था।</p>
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		</item>
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		<title>पहले मुर्गी आयी या अन्डा</title>
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		<pubDate>Mon, 23 May 2005 12:06:27 +0000</pubDate>
		<dc:creator>देबाशीष चक्रवर्ती</dc:creator>
				<category><![CDATA[हास परिहास]]></category>

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		<description><![CDATA[जितेन्द्र के बचपन के दोस्त  <strong>  सुक्खी</strong> बहुत ही सही आइटम हैं। उनकी जिन्दगी में लगातार ऐसी घटनायें होती रहती हैं जो दूसरों के लिये हास&#8205;-परिहास का विषय बन जाती है। <span class="intro"><strong>हास परिहास </strong>में पढ़िए सुने अनसुने लतीफ़े और <strong>रजनीश कपूर</strong> की नई कार्टून श्रृंखला <strong>&#34;ये जो हैं जिंदगी</strong>&#34;। साथ ही &#34;<strong>शेर सवाशेर&#34;</strong> में नोश फ़रमायें गुदगुदाते व्यंजल।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div id="section-teaser" style="margin-top: 0px; padding-top: 0px"><img src="http://localhost/joomla/images/stories/jokes.gif" border="0" alt="हास परिहास" hspace="1" vspace="1" align="right" />जितेन्द्र के बचपन के दोस्त  <a href="http://www.jitu.info/merapanna/?p=286"> सुक्खी</a> बहुत ही सही आइटम हैं। उनकी जिन्दगी में लगातार ऐसी घटनायें होती रहती हैं जो दूसरों के लिये हास‍-परिहास का विषय बन जाती है। हम नजर डालते रहेंगे सुक्खी के जीवन में घटी कुछ घटनाओं पर।</p>
<p>इस अंक से आनन्द लीजिये व्यंजलों का भी। साथ ही हमेशा की तरह रजनीश की मज़ाहिया नज़र से देखें दुनिया।</p></div>
<div style="text-align: center"><img src="http://www.nirantar.org/images/stories/sukkhi.gif" border="0" alt="" /></div>
<p>वैसे तो सुक्खी के सारे फार्म हम लोग ही भरते थे लेकिन एक बार उनको अचानक एक नौकरी का फार्म भरा, कुछ समझ मे नही आ रहा था कि कैसे भरें। अब जरा देखिये उन्होने क्या भराः</p>
<p>नामः सुखबीर सिंह उर्फ सुक्खा<br />
सैलरी एकस्पैक्टेडः यस<br />
सेक्सः वन्स इन ए वीक</p>
<hr />
<p>पहले मुर्गी आयी या अन्डा, इस पर दुनिया मे विवाद हो सकता है, लेकिन अपने सुक्खी के पास जवाब है</p>
<blockquote><p>ओ यार! जिसका आर्डर पहले दोगे, वो ही तो पहले आयेगी।</p></blockquote>
<hr />
<p>अपने सुक्खी ने सीसामऊ वाले शर्मा लाटरीज से 20 रूपये में लॉटरी का टिकट खरीदा, उनकी २० करोड़ की लॉटरी लगी, दुकानदार ने टैक्स काटकर ११ करोड़ दिये, सरदारजी भड़क गये बोले</p>
<blockquote><p>या तो पूरे बीस करोड़ दो या फिर मेरे बीस रुपये वापस करो।</p></blockquote>
<hr />
<p>सुक्खी एक दिन एक जनाजे में गये, बहुत सेन्टी हो गये था, मेरे से बोले, यार मेरी एक अन्तिम इच्छा है</p>
<blockquote><p>मै जब भी मरूं, तो अपने स्वर्गवासी बस ड्राइवर चाचाजी की तरह मरूं, जो सोते सोते मरे थे, उनके पैसेन्जर्स की तरह नही, जो चिल्लाते चिल्लाते मरें।</p></blockquote>
<h1>शेर सवाशेर</h1>
<p>तुम्हारे दर पर हम हजार बार आयेंगे,<br />
तुम्हारे दर पर हम हजार बार आयेंगे,<br />
तुम्हारे दर पर हम हजार बार आयेंगे,<br />
घन्टी बजायेंगे और भाग जायेंगे।</p>
<p><img src="http://www.nirantar.org/images/stories/0505/santara.JPG" border="0" alt="वाह! क्या सन्तरा था!" hspace="5" vspace="0" align="right" />दूर से देखा तो सन्तरा था,<br />
पास जाके देखा तो सन्तरा था,<br />
छील के देखा तो सन्तरा था,<br />
खा के देखा तो भी सन्तरा था,<br />
वाह! क्या सन्तरा था!</p>
<p>जिस वक्त खुदा ने तुम्हें बनाया होगा,<br />
एक सरूर सा उसके दिल पर छाया होगा।<br />
पहले सोचा होगा तुझे जन्नत में रख लूँ,<br />
फिर उसे चिड़ियाघर का ख्याल आया होगा।</p>
<h2>ये जो है ज़िंदगीः रजनीश कपूर</h2>
<p><img src="http://www.nirantar.org/images/stories/0505/cartoon.jpg" border="0" alt="ये जो है ज़िंदगी" hspace="5" vspace="5" align="middle" /></p>
<img src="http://www.nirantar.org/?ak_action=api_record_view&id=2211&type=feed" alt="" />]]></content:encoded>
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		</item>
		<item>
		<title>विशेषज्ञ बिन सब सून</title>
		<link>http://www.nirantar.org/0405-haas-parihas</link>
		<comments>http://www.nirantar.org/0405-haas-parihas#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 09 Apr 2005 12:11:21 +0000</pubDate>
		<dc:creator>देबाशीष चक्रवर्ती</dc:creator>
				<category><![CDATA[हास परिहास]]></category>

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		<description><![CDATA[जीवन के हर क्षेत्र में विशेषज्ञों की घुसपैठ जारी है। व्यक्ति के जन्म लेने से पहले ही विशेषज्ञों का रोल चालू हो जाता है। कटाक्ष कर रहे हैं <strong>रविशंकर श्रीवास्तव</strong>।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><img width="135" vspace="5" hspace="5" height="140" border="0" align="right" alt="वातायनः व्यंग्य" src="http://www.nirantar.org/images/stories/jokes.gif" />विशेषज्ञों का जमाना आ चुका है। इनके पैर जम चुके हैं। बिना विशेषज्ञों की मदद के दैनंदिनी जीवन के कार्य दूभर होते जा रहे हैं। जीवन के हर क्षेत्र में विशेषज्ञों की घुसपैठ जारी है। व्यक्ति के जन्म लेने से पहले ही विशेषज्ञों का रोल चालू हो जाता है। विशेषज्ञ गर्भ में ही लिंग भेद कर देते हैं। जन्मोपरांत के आरंभिक वर्षों के आचार-व्यवहार का अध्ययन कर विशेषज्ञ यह बता देते हैं कि व्यक्ति विशेष की किस क्षेत्र में रुचि है और वह राजनीति में प्रगति करेगा या क्रिकेट में। इस प्रकार उसके कैरियर का ग्राफ &#8211; भविष्य की दिशा विशेषज्ञ तय कर देते हैं और अब उसे उसी क्षेत्र में अपना कैरियर बनाना होता है।</p>
<p>जब आप बीमार पड़ते हैं तो डाक्टर के पास जाते हैं। वहाँ आपको पता चलता है कि दर्द या बुखार क्यों आया इसकी जाँच डायग्नोस्टिक एक्सपर्ट करेगा और इसके लिए पैथालाजिकल एक्सपर्ट की सलाह लेगा। बीमारी का पता चल चुकने के बाद आपको उस बीमारी के स्पेशलिस्ट के पास रेफर किया जाएगा ताकि आपका सही इलाज हो सके। शरीर के प्रत्येक अंग के इलाज के लिए अब विशेषज्ञ उपलब्ध हैं। आदमी का इलाज अब तथाकथित फैमिली डाक्टरों के बस का नहीं। किसी दिन सुबह पता चलता है कि आपको उस दिन अपना दांत दिखाने दंत रोग विशेषज्ञ के पास जाना है तो पत्नी को स्त्री रोग विशेषज्ञ को दिखाना है। एक बच्चे का एप्वाइंटमेंट नाक कान गला रोग विशेषज्ञ के साथ है तो दूसरे बच्चे को नेत्ररोग विशेषज्ञ को दिखाना है। अब यह बात दीगर है कि आपके मुन्ने के बारे में दो विशेषज्ञों की राय आपस में भिड़ जाती हो कि उसके टॉन्सिल का इलाज सर्जरी ही है या सिर्फ दवाइयाँ। </p>
<p>खानपान विशेषज्ञ &#8211; डायटीशियन आपको बताते हैं कि आपको क्या-क्या कितना खाना है और क्या नहीं खाना है। फैशन सलाहकार और सूट विशषज्ञ आपके ड्रेस की डिज़ाइनिंग करते हैं और आपको बताते हैं कि आपको कब-कब, क्या-क्या, किस-किस रंग का कौन-कौन से फ़ेब्रिक का ड्रेस पहनना है। ब्यूटिशियन और मेकअप विशेषज्ञ आपके बालों के स्टाइल से लेकर आपके उठने-बैठने, बोलने-चलने के बारे में अपनी एक्सपर्ट राय देते हैं और इसके लिए वे अत्याधुनिक कम्प्यूटर और कम्प्यूटर प्रोग्राम की सहायता लेते हैं।</p>
<p>आज आपको अपने प्रोफेशन में सफल होने के लिए विशेषज्ञों की सेवाएँ उपलब्ध हैं। वास्तव में, आज विशेषज्ञ की सेवा के बगैर किसी का अपने प्रोफेशन &#8211; व्यापार व्यवसाय, नौकरी इत्यादि में सफल होना मुश्किल है। बाजार विशेषज्ञ यह बताते हैं कि बाजार का ट्रेण्ड क्या है। कौन सी वस्तु बाजार में टिकेगी और कौन सी नहीं। किस चीज का बाजार में डिमांड सप्लाई गेप अधिक है और कौन सी चीज बाजार में सरप्लस है। कौन सा स्क्रिप, कौन सा शेयर आपकी उम्मीदों पर खरा उतरेगा और कौन सा शेयर आपकी लुटिया डुबो देगा। परंतु यह इत्तेफ़ाक की बात ही होगी कि मशहूर वित्त विशेषज्ञ की सलाह पर लगाई गई आपकी पूंजी का प्रतिफल वह नहीं मिल पाया जिसके दावे किए गए थे।</p>
<p>विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग दिनोंदिन बढ़ने के कारण लोग भी अब विशेषज्ञ बनने में दिलचस्पी ले रहे हैं। हमारे मुहल्ले का दर्जी जो एक अनाधिकृत विस्तारित दुकान पर अपना एकमात्र सिलाई मशीन रखकर सिलाई का अपना बिजनेस चलाता है, अपने आपको सूट स्पेशलिस्ट बताता है। अपने दुकान के साइन बोर्ड पर उसने सूट विशेषज्ञ का जिक्र विशेष रूप से किया है। क्योंकि उसे मालूम है कि अगर उसने अपने आपको विशेषज्ञ नहीं बताया तो लोग उसके पास चड्डी-बंडी भी सिलवाने नहीं आएंगे।</p>
<div id='pullQuoteR'> कल तक जो नाई बिना नाम की गुमटी में मक्खियाँ मारा करता था आज वह भयंकर रूप से बिजी हो गया है।</div>
<p>विशेषज्ञता की इस दौड़ में मुहल्ले का नाई भी पीछे नहीं रहा। पिछले दिनों उसने अपनी गुमटी में थोड़ा और अधिक अतिक्रमण करके दुकान का डेकोरेशन बढ़ाया। पाँच तरह के शेविंग क्रीम, तीन तरह के आफ़्टरशेव लोशन का इज़ाफ़ा अपनी दुकान में किया और बाहर हेयर स्टाइल विशेषज्ञ का बोर्ड बड़े अक्षरों में लिखवाया। बस, फिर क्या था, उसकी दुकान चल निकली। कल तक जिस बिना नाम की गुमटी में मक्खियाँ मारा करता था, लोगों के शेव बनाने के बजाए आलू छीला करता था, आज वह भयंकर रूप से बिजी हो गया है। लोगों को टाइम का एप्वाइंटमेंट देकर उनके बाल काटता है, शेव करता है। ऊपर से, जिस काम को वह अब तक जिस रेट से करता आया था, उसी काम को विशेषज्ञ का ठप्पा लगने के बाद अब पच्चीस गुना ऊँचे रेट पर करता है।</p>
<p>विशेषज्ञों से सम्बन्धित एक मजेदार घटना मेरे साथ घटी। मेरे आस पड़ोस में मेरी ख्याति कम्प्यूटर एक्सपर्ट के रूप में है। एक दिन पड़ोसी का कम्प्यूटर खराब हो गया। उसने मुझसे कहा कि मैं चूंकि कम्प्यूटर विशेषज्ञ हूँ, अत: उसके कम्प्यूटर की खराबी दूर करने में मदद करूँ। मैंने उसे समझाना चाहा कि मैं प्रोग्राम-सॉफ़्टवेयर विशेषज्ञ हूँ, कम्प्यूटर हार्डवेयर नहीं। परंतु तब से उसने मुझे अविश्वसनीय नज़रों से देखना शुरू कर दिया है। </p>
<p>बिना विशेषज्ञ अब जीना मुश्किल है। कारण यह है कि हमें अब कभी छींक भी आती है तो हमें चिकित्सा विशेषज्ञों से यह कन्फर्म कराना पड़ता है कि कहीं कोई कॉम्प्लीकेशन तो नहीं। कहीं कोई सेकेण्डरी इन्फेक्शन तो नहीं। कभी किसी केस में फंस गए तो आपराधिक प्रकरणों से बरी कराने के लिए क्रिमिनल केस स्पेशलिस्ट लायर हैं। कर चोरी के केस देखने दबाने के लिए आयकर, विक्रयकर सलाहकार हैं। प्रायमरी स्कूलों में भी अब विषय विशेषज्ञ भर्ती किए जा रहे हैं &#8211; बच्चों को पढ़ाने के लिए। गणित, विज्ञान, इतिहास इत्यादि विषयों के विषय विशेषज्ञ अब महाविद्यालयों &#8211; विश्वविद्यालयों की बपौती नहीं रह गए हैं। खेलों की बात करें तो हॉकी फुटबाल में आज कोई खिलाड़ी पेनाल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ है तो कोई पेनल्टी स्ट्रोक विशेषज्ञ। विशेषज्ञों का जलवा हर तरफ है &#8211; बात चाहे क्रिकेट की हो या एथलेटिक्स की।</p>
<p>और, आखिर में, व्यक्ति के जीवन के अंतिम क्षणों को सुखमय बनाने का दावा करने वाले, व्यक्ति की सोच को अंधकार से प्रकाश (?) की ओर ले जाने का दंभ भरने वाले, स्वर्ग (!) का रास्ता दिखाने वाले विशेषज्ञ यानी मुल्ला-मौलवी, पंडा-पुजारी और रागी-पादरी तो हैं ही &#8211; आपके सेवार्थ, नि:स्वार्थ &#8211; सदा हाजिर। मतलब यह कि जन्म से लेकर मृत्यु पर्यंत जीवन के हर क्षेत्र में विशेषज्ञों की सेवाएँ आपको लेना होंगी क्योंकि जमाना इनका है।</p>
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		<title>सुक्खी जैसा कोई नही</title>
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		<pubDate>Fri, 08 Apr 2005 05:51:12 +0000</pubDate>
		<dc:creator>देबाशीष चक्रवर्ती</dc:creator>
				<category><![CDATA[हास परिहास]]></category>

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		<description><![CDATA[जितेन्द्र के बचपन के दोस्त  <a href="http://www.jitu.info/merapanna/?p=286">  सुक्खी</a> बहुत ही सही आइटम हैं। उनकी जिन्दगी में लगातार ऐसी घटनायें होती रहती हैं जो दूसरों के लिये हास&#8205;-परिहास का विषय बन जाती है। <span class="intro"><strong>हास परिहास </strong>में पढ़िए सुने अनसुने लतीफ़े और <strong>रजनीश कपूर</strong> की नई कार्टून श्रृंखला <strong>&#34;ये जो हैं जिंदगी</strong>&#34;।</span>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div id="section-teaser" style="margin-top: 0px; padding-top: 0px">जितेन्द्र के बचपन के दोस्त  <a href="http://www.jitu.info/merapanna/?p=286"> सुक्खी</a> बहुत ही सही आइटम हैं। उनकी जिन्दगी में लगातार ऐसी घटनायें होती रहती हैं जो दूसरों के लिये हास‍-परिहास का विषय बन जाती है। इस अंक से हम नजर डालते रहेंगे सुक्खी के जीवन में घटी कुछ घटनाओं पर।</div>
<p><img title="Sukkhi jaisa koi nahi" src="http://www.nirantar.org/images/stories/sukkhi.gif" border="0" alt="Sukkhi jaisa koi nahi" width="300" height="70" align="middle" /></p>
<p>एक बार सुक्खी ने अपनी गर्लफ्रेन्ड से कहा, रात को मेरे बिठूर वाले फार्महाउस पर आ जाना, वहाँ कोई नही होगा। गर्लफ्रेन्ड ने सोचा चलो अच्छी डेट है। वो वहाँ पहुँची और सचमुच वहाँ कोई नही था। सुक्खी भी नही।</p>
<hr />हम लोग भारत की बढती आबादी पर एक जगह लेक्चर सुनने गये थे, सुक्खी को भी हमने साथ ले लिये, एक वक्ता बढती जनसंख्या पर भाषण दे रहा था,</p>
<blockquote><p>&#8220;भारत में हर दस सेकन्ड एक औरत एक बच्चे को जन्म देती है&#8221;</p></blockquote>
<p>अचानक सुक्खी ने चिल्ला कर बीच मे टोका &#8220;हमें इस औरत को ढूँढकर उसे ऐसा करने से रोकना चाहिये&#8221;</p>
<hr />सुक्खी ने परिवार नियोजन में कभी विश्वास नही किया, अब करे भी क्यों बाकी कोई काम भी तो नही था बेचारे के पास, चलिये सुनिये</p>
<p>सुक्खी को जुड़वाँ बच्चे हुए, नाम रखा &#8220;टिन&#8221; और &#8220;मार्टिन&#8221;<br />
फिर जुड़वां बच्चे हुए, इस बार नाम रखे &#8220;पीटर&#8221; और &#8220;रिपीटर&#8221;<br />
फिर हुए, इस बार नाम रखे &#8220;मैक्स&#8221; और &#8220;क्लाइमैक्स&#8221;<br />
फिर जुड़वां हुए, इस बार नाम रखे &#8220;टायर्ड&#8221; और &#8220;रिटायर्ड&#8221;</p>
<hr /><img src="http://www.nirantar.org/images/stories/jokes.gif" border="0" alt="हास परिहास" hspace="1" vspace="1" width="135" height="140" align="right" />आजकल सुक्खी तो बस अपने प्राइम मिनिस्टर मनमोहन सिंह के ही राग अलापता रहता है, हम लोगों ने एक दिन सुक्खी को छेड़ते हुए पूछा,</p>
<p>&#8220;सुक्खी भाई! ये बता कि अपने मनमोहन सिंह जी शाम को ही क्यों टहलने जाते हैं, सुबह क्यों नही?&#8221;</p>
<p>सुक्खी दाढ़ी खुजाते हुए बोला</p>
<p>&#8220;सिम्पिल है यार! अपने मनमोहन पी.एम हैं, ए.एम थोड़े ही हैं।&#8221;</p>
<h2>ये जो है ज़िंदगीः रजनीश कपूर</h2>
<p><img title="Yeh jo hei zindagi" src="http://www.nirantar.org/images/stories/0405/cartoon.jpg" border="0" alt="ये जो है ज़िंदगी" hspace="5" vspace="5" width="490" height="157" align="middle" /></p>
<img src="http://www.nirantar.org/?ak_action=api_record_view&id=2209&type=feed" alt="" />]]></content:encoded>
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		<title>जम्बू द्वीप की उन्नति कैसे हो?</title>
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		<pubDate>Tue, 29 Mar 2005 11:46:59 +0000</pubDate>
		<dc:creator>निरंतर पत्रिका दल</dc:creator>
				<category><![CDATA[हास परिहास]]></category>

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		<description><![CDATA[<strong>हास परिहास </strong>में पढ़िए सुने अनसुने लतीफ़े और मज़ेदार वाकये।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><img title="हास परिहास" src="http://www.nirantar.org/images/stories/jokes.gif" border="0" alt="हास परिहास" hspace="8" vspace="8" width="135" height="140" align="left" />
<div class=dropCap>प</div>
<p>टेल साहब न्यूयार्क सिटी के बैंक में पाँच हजार डालर का कर्ज लेने पहुँचे। बैंक मैनेजर के लोन गाँरटी माँगने पर अपनी मर्सिडीज बेंज पेश कर दी। बैंक मैनेजर ने उन्हे लोन दिया और पटेल साहब खुशी खुशी बैंक के सुरक्षित पार्किंग लाट में अपनी मर्सिडीज बेंज खड़ी करके चले गये। पूरे एक महीने बाद वे लौटे और पाँच हजार पचीस डालर मय ब्याज के चुका दिये बैंक को। जब वे अपनी गाड़ी ले जाने लगे तो बैंक मैनेजर से रहा नहीं गये और उसने पूछा &#8220;पटेल साहब, हमारे रिकार्ड के हिसाब से तो आप मिलिनयर है, आपके पास मर्सिडीज बेंज भी है तो फिर आपने महज पाँच हजार का लोन क्यों लिया और उसके लिए अपनी मर्सिडीज बेंज क्यों गिरवी रखी?&#8221; पटेल खींसे निपोर कर बोले &#8220;मैनेजर साहेब, मैने आपको पचीस डॉलर ब्याज के दिये और महीने भर के मेरे भारत भ्रमण के दौरान मेरी गाड़ी सुरक्षित आपके पार्किंग लाट में खड़ी रही। एयरपोर्ट पर दस डालर प्रतिदिन के हिसाब से मुझे तीन सौ डॉलर देने पड़ते कि नहीं?&#8221;</p>
<hr />एक साहब मोल-तोल में काफ़ी उस्ताद थे। एक दिन बाज़ार में वो किसी दुकानदार से मोलतोल कर रहे थे। 50 रुपये की शर्ट पर एक घंटा मोलतोल करने के बाद दुकानदार एक रुपये में बेचने के लिये तैयार हो गया। लेकिन भाईसाहब अड़े रहे और तब भी मोलतोल करते रहे। तंग आकर दुकानदार ने कहा कि ठीक है मेरे बाप आप मुफ़्त में ले जाईये। भाईसाहब ने थोड़ी देर सोचा फिर कहा, मुफ़्त में दो शर्ट दोगे क्या?</p>
<hr />जम्बू द्वीप के कुछ ब्लॉगर चौपाल पर चर्चा कर रहे थे। विषय था &#8211; जम्बू द्वीप की उन्नति कैसे हो सकती है? तमाम सहमतियों -असहमतियों के बाद तय हुआ कि जम्बू द्वीप के लोग अमेरिका पर हमला कर दें। अमेरिका हरा देगा जम्बू द्वीप को। फिर कब्जा कर लेगा वहां। फिर तो सारा विकास अपने आप हो जायेगा। सुझाव इतना नायाब था कि लोग तुरंत चल पड़ने को तैयार हो गये। एक ब्लॉगर को चिंतित देख कर लोगों ने कारण पूछा। वह बोला मैं यह सोचकर तो खुश हूं कि अब हमारा विकास हो जायेगा। पर यह सोचकर परेशान हूं कि अगर हमनें अमेरिका पर कब्जा कर लिया तब क्या होगा?</p>
<h1>संता बंता नॉन-स्टॉप</h1>
<div id="pullQuoteR">संताः  &#8220;यार बंता, तू हमेशा फॉरेन चैनल क्यों देखता रहता है?&#8221;<br />
बंताः &#8220;यार, कुछ बिजली उनकी भी खर्च होने दो!&#8221;</div>
<p>संताः  &#8220;यार बंता, तू हमेशा फॉरेन चैनल क्यों देखता रहता है?&#8221;<br />
बंताः &#8220;यार, कुछ बिजली उनकी भी खर्च होने दो!&#8221;</p>
<p>संता वकील बंता सेः आप गीता पर हाथ रखकर कहिए कि&#8230;<br />
बंताः ओए ये क्या! सीता पर हाथ रक्खा तो कोर्ट में बुलाया, अब फिर गीता पर हाथ..</p>
<p>संता टीचर ने छात्र बंता से पूछा, &#8220;बता अकल बड़ी या भैंस?&#8221;<br />
बंता मुस्करा कर बोला, &#8220;एलो! पहले दोनों की डेट आफ बर्थ तो बताओ!!&#8221;</p>
<p class="note">संकलनः रमन बी, जीतेन्द्र, अतुल तथा अनूप</p>
<img src="http://www.nirantar.org/?ak_action=api_record_view&id=2208&type=feed" alt="" />]]></content:encoded>
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