<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>निरंतर -हिन्दी ब्लॉगज़ीन &#124; Nirantar - Hindi Blogzine &#187; हलचल</title>
	<atom:link href="http://www.nirantar.org/category/halchal/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://www.nirantar.org</link>
	<description>Nirantar - World&#039;s first Hindi Blogzine</description>
	<lastBuildDate>Sat, 07 Jan 2012 15:50:48 +0000</lastBuildDate>
	<language>en</language>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
	<generator>http://wordpress.org/?v=3.3.1</generator>
		<item>
		<title>टेक्नोराती नये रूप में</title>
		<link>http://www.nirantar.org/0705-halchal</link>
		<comments>http://www.nirantar.org/0705-halchal#comments</comments>
		<pubDate>Thu, 30 Jun 2005 19:57:01 +0000</pubDate>
		<dc:creator>निरंतर पत्रिका दल</dc:creator>
				<category><![CDATA[हलचल]]></category>
		<category><![CDATA[Blogging]]></category>
		<category><![CDATA[Technorati]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.nirantar.org/?p=3015</guid>
		<description><![CDATA[एक और नया ब्लॉग एग्रीगेटर, टेकनोराती का नया सलोना रूप, ब्लॉगरों के लिये कानूनी गाईड और माईक्रोसॉफ्ट ने ब्लॉग पर लगाई सेंसर की बाँध. ये तथा अन्य ताजा खबरें सारे ब्लाग संसार से हमारे नियमित स्तंभ हलचल में.]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div id="section-teaser">ब्लॉग जगत से संबंधित माह की प्रमुख घटनाओं की जानकारी देता है हलचल। इस स्तंभ पर अपनी प्रतिक्रिया, समाचार तथा उनकी कड़ी संपादक को भेजने का पता है patrikaa एट gmail डॉट कॉम।</div>
<p><strong>टेक्नोराती नये रूप में</strong></p>
<p><img src="http://www.nirantar.org/images/stories/halchal.gif" alt="हलचल" hspace="2" vspace="2" align="right" />टेक्नोराती ने अपने जालस्थल पर भारी रद्दोबदल किया है और तकरीबन दो सप्ताह तक <a href="http://beta.technorati.com/">बीटा वर्शन</a> रखने के बाद <a href="http://www.technorati.com/">नया रूप</a> आम लोगों के लिये जारी कर दिया है। नये डिज़ाईन में नये चिट्ठाकारों को ध्यान में रखकर बदलाव लाये गये हैं साथ ही टैग प्रकार्य में सुधार हुये हैं। नई सुविधाओं का ज़िक्र <a href="http://www.sifry.com/alerts/archives/000314.html">यहाँ</a> है। टेक्नोराती ने जापान के लिये भी <a href="http://www.technorati.jp/home.html">अलाहदा जालस्थल</a> शुरु किया है। वाकई मनोरम जालस्थल!</p>
<p><strong>एक और नया ब्लॉग एग्रीगेटर</strong></p>
<p><a href="http://www.alexking.org/">एलेक्स किंग</a> और <a href="http://dotnot.org/blog/index.php">स्कॉट सैंडर्स</a> ने अंतर्जाल आधारित <a href="http://www.feedlounge.com/">फीडलाउन्ज</a> नामक एक नया ब्लॉग एग्रीगेटर जारी किया है। <img class="alignleft" style="margin: 10px; border: 0pt none;" src="http://www.nirantar.org/images/stories/0705/illo2.gif" border="0" alt="" hspace="2" vspace="2" width="220" height="220" align="right" />यह नये ज़माने का एग्रीगेटर है जिसमें गति और जानदार इंटरफेस का संगम है जो आपको डेस्कटॉप एप्पलीकेशन का एहसास दिलाये और जाल आधारित तंत्रों का फायदा भी दे। <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/AJAX">एजैक्स</a>, टैगिंग, कीबोर्ड कमांड, सब है फीडलाउन्ज में। लगता है कि एजैक्स, डेस्कटॉप और अंतर्जाल आधारित एप्पलीकेशन के बीच का फासला मिटा कर रहेगा।</p>
<p><strong>स्क्वैक बॉक्स अब स्पेस पर</strong></p>
<p>सी.एन.बी.सी का स्क्वैक बॉक्स कार्यक्रम अब एम.एस.एन स्पेस पर हाज़िर है, शायद यह एम.एस.एन का जवाबी हमला है <a href="http://www.blogger.com/">ब्लॉगर</a> पर। ब्लॉग का शीर्षक है  <a href="http://spaces.msn.com/members/squawkblog/PersonalSpace.aspx?_c=">&#8220;स्क्वैक ब्लॉग&#8221;</a> और टीवी क्रयक्रम की तरह ही यह मूलतः आधारित है निवेश से जुड़े विषयों पर। अब तक लोगों और संस्थाओं के ब्लॉग तो हमने सुने पढ़े थे पर किसी टी.वी कार्यक्रम का अपना ब्लॉग होने का शायद यह पहला मौका होगा।</p>
<p><strong>ब्लॉगलाईंस का बड़ा भंडार</strong></p>
<p>आस्क जीव्स ने हाल ही में <a href="http://biz.yahoo.com/prnews/050608/sfw022.html?.v=13">घोषणा</a> कि लोकप्रिय एग्रीगेटर <a href="http://www.bloglines.com/">ब्लॉगलाईंस</a> के पास अब ५००० लाख चिट्ठों और समाचार प्रविष्टियों का भंडार है। हर दिन ब्लॉगलाईंस तकरीबन २० लाख नये स्रोतों को जोड़ता है, बुनाई पर आधारित ब्लॉग से लेकर लोकप्रिय समाचार पत्रों की फीड तक। इतनी जानकारी और पढ़ने का वक्त इतना कम!</p>
<p><strong>ब्लॉगरों के लिये कानूनी गाईड</strong></p>
<p><img class="alignright" style="margin: 2px; border: 0pt none;" src="http://www.nirantar.org/images/stories/0705/blog.JPG" border="0" alt="" hspace="2" vspace="2" width="119" height="154" align="right" />जैसे जैसे ब्लॉगिंग का प्रचलन बढ़ता जा रहा है कानूनी पेचीदगियाँ भी बढ़ती जा रही हैं। हम पढ़ते रहते हैं कि कैसे कई ब्लॉगरों को चिट्ठाकारी की वजह से नौकरी से हाथ धोना पड़ा। अब एक ऐसी <a href="http://www.eff.org/bloggers/lg/">कानूनी गाईड</a> बनाई गई है जो अमरीका स्थित चिट्ठाकारों के लिये काम की साबित हो सकती है। इसमें इंटलेक्चुअल प्रापर्टी, आनलाईन मानहानी कानून जैसे विषयों पर जानकारी समाहित है।</p>
<p><strong>माईक्रोसॉफ्ट ने ब्लॉग पर लगाई सेंसर की बाँध</strong></p>
<p><a href="http://news.bbc.co.uk/1/hi/technology/4088702.stm">खबर है</a> कि माईक्रोसॉफ्ट की एम.एस.एन साईट चीन में ऐसी ब्लॉग प्रविष्टियों पर रोक लगा रही है जिनमें &#8220;स्वतंत्रता&#8221;, &#8220;जनतंत्र&#8221;, &#8220;मानवाधिकार&#8221;, &#8220;ताईवान की स्वतंत्रता&#8221; या &#8220;प्रदर्शन&#8221; जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया हो। माईक्रोसॉफ्ट का कहना है कि जैसा देस वैसा भेस, हम तो जिस देश में काम करते हैं वहाँ के कानून का पालन करते हैं। चीनी चिट्ठाकारों पर वैसे भी संकट के बादल छाये हैं, उन्हें सरकार के पास अपना ब्लॉग रजिस्टर करवाना पड़ता है। पर <a href="http://www.theaustralian.news.com.au/common/story_page/0,5744,15521940%255E2703,00.html">खबरें</a></p>
<p><strong>टाईपपैड पर टिप्पणियों पर नियंत्रण</strong></p>
<p>सिक्स अपार्ट ने अपने नये कदमों की <a href="http://www.sixapart.com/typepad/news/2005/05/upcoming_enhanc.html">घोषणा</a> की है जिससे कीमत अदा करने वाले टाईपपैड प्रयोक्ताओं को कमेंट व ट्रैकबैक पर प्राप्त होते स्पैम से मुक्ति मिल सकती है। प्रयोक्ताओं को अब  कमेंट व ट्रैकबैक को प्रकाशन से पहले देखने और उपयुक्त पाने पर ही प्रकाशित करने की सुविधा मिलेगी।</p>
<h2>और चलते चलते&#8230;</h2>
<p><strong>बिना लिखे कैसे लिखें ब्लॉग?</strong></p>
<p>बड़ा आसान हैं! सामग्री की चोरी कीजिये। सामग्री चोरी का मुद्दा नया नहीं है, इसके पीछे लोकप्रियता और गूगल एडसेंस जैसे माध्यमों से पैसे बनाने के रास्ते खुल सकते हैं। ऐसी ही एक सुविधा <a href="http://www.emediawire.com/releases/2005/6/emw249892.htm">ब्रेट फूगल</a> नामक एक व्यक्ति ने &#8220;ब्लॉग पॉवर&#8221; के नाम से बनाई है। इसे ऐसा नया ब्लॉगिंग सॉफ्टवेयर बताया जा रहा है जो किसी को भी आसानी से और फुर्ती से कीवर्ड आधारित खोज कर पराई आर.एस.एस फीड से अपने ब्लॉग में आटोमैटिक रूप से प्रकाशित करने की सुविधा देता है। सीनाजोरी के साथ चोरी के लिये भी तंत्रांश, क्या बात है!</p>
<p class="note">समाचार संकलन व पुनर्लेखनः देबाशीष चक्रवर्ती</p>
<img src="http://www.nirantar.org/?ak_action=api_record_view&id=3015&type=feed" alt="" />]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.nirantar.org/0705-halchal/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>चिठ्ठाकारी को ज़्यादा गँभीरता से न लें</title>
		<link>http://www.nirantar.org/0605-halchal</link>
		<comments>http://www.nirantar.org/0605-halchal#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 01 Jun 2005 13:29:14 +0000</pubDate>
		<dc:creator>निरंतर पत्रिका दल</dc:creator>
				<category><![CDATA[हलचल]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.nirantar.org/?p=2630</guid>
		<description><![CDATA[ब्लॉग नैशविल गोष्ठी पर एक रपट, अंतर्जाल पर हिन्दी के बढ़ते चरण, न्यूज़गेटर द्वारा फ़ीड-डेमन का अधिग्रहण, आई.बी.एम ने कर्मचारियों को दी चिट्ठाकारी करने की छूट, तीसमारखाँ ब्लॉगर और ऐसी ही और खबरें हलचल में।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<h2>ब्लॉग नैशविल गोष्ठी ~ एक रपट</h2>
<p><img style="margin: 5px;" src=" http://www.nirantar.org/images/stories/halchal.gif" alt="" hspace="2" vspace="2" align="left" />
<div class=dropCap>त</div>
<p>करीबन दो साल हो चुके हैं मुझे <a href="http://patrix.typepad.com/">ब्लॉगिंग</a> करते और ब्लॉगमंडल को मात्र व्यक्तिगत वृतांतवर्णन के दौर से होकर व्यापक जनसमूह से सार्थक चर्चा का विस्तार लेते देखते। अपनी देखी फिल्मों पर ब्लॉग लिखने से मैं जिन राजनैतिक, सामाजिक मुद्दो को महत्वपूर्ण समझता था उन पर लिखने लगा, यद्यपि अभी भी यदा कदा फिल्मों पर लिखता हूँ। हाल में मैंने नैशविल में ब्लॉग नैशविल नामक एक ब्लॉग गोष्ठी में भाग लिया। तीन कारणों ने मुझे नैशविल तक चार घँटे ड्राईव करने को प्रेरित किया। पहला, यह मुफ्त थी, दूसरे कई नामवर ब्लॉगर, जैसे कि <a href="http://instapundit.com/about.php">ग्लेन रेनॉल्ड</a> , <a href="http://www.bayosphere.com/">डैन गिलमोर</a> ,<a href="http://blogs.law.harvard.edu/dave/">डेव वाईनर</a>,  आर.एस.एस फीड के जन्मदाता, <a href="http://www.blogads.com/">हेनरी कोपलैंड</a> और <a href="http://cyber.law.harvard.edu/globalvoices/">रेबेका मैककिनन</a> इसमें शिरकत करने वाले थे। तीसरा (और शायद सबसे ज़रूरी) कारण था कि मेरी ब्लॉगर महिला मित्र अपनी आगामी परीक्षा के बावजूद मेरा साथ देने को तैयार हो गयीं।</p>
<p><img class="alignright" style="border: 0pt none; margin: 5px;" src="http://www.nirantar.org/images/stories/0605/panel.jpg" border="0" alt="ब्लॉग नैशविल गोष्ठी में पहले सत्र की चर्चा का दृश्य" hspace="2" vspace="2" width="500" height="375" align="right" />एनोनीब्लॉगिंग पर पहली चर्चा में तो मैं भाग नही ले पाया। दूसरे सत्र में मैंने ब्लॉग पंडितों और स्थानीय पत्रकारों की खासी मौजूदगी वाली <a href="http://patrix.typepad.com/nerves/2005/05/blogging_and_jo.html">ब्लॉगिंग और पत्रकारिता</a> चर्चा में भाग लिया। ब्लॉगिंग के विभिन्न आयामों पर आधारित सत्रों में से एक ने मुझे सर्वाधिक आकर्षित किया। यह था <a href="http://www.blogads.com/">ब्लॉग ऍड्स</a> वाले हेनरी कोपलैंड का (ब्लॉग से) <a href="http://patrix.typepad.com/nerves/2005/05/making_money_he.html">पैसे बनाने</a> का सत्र। ब्लॉगिंग और उससे मुद्रा अर्जन को गंभीरता पूर्वक लेने वालों की बड़ी संख्या देखना हैरानी की बात लगी क्योंकि मैंने ब्लॉगिंग को हमेशा अल्पकालिक मनोरंजन का जरिया समझा है जिसके जरिए विचारो के आदान प्रदान और पठन पाठन का दायरा बढता है। गूगल विज्ञापनों से क्षुद्र प्राप्ति के पूर्व तो मुझे कभी पैसे बनाने का ख्याल आया भी नहीं। भूतपूर्व सी.एन.एन कर्मी रेबेका मैककिनन का <a href="http://patrix.typepad.com/nerves/2005/05/global_voices_r.html">वैश्विक ध्वनियाँ</a> सत्र मेरे हिसाब से सर्वाधिक विषय परक था। रेबेका ने असंख्य अमेरिकी चिठ्ठों के मध्य पूरे विश्व के क्षेत्रीय चिठ्ठो का संकलन बनाने का बीड़ा उठाया है। मैंने तुरंत इसमें <a href="http://cyber.law.harvard.edu:8080/globalvoices/wiki/index.php/India">भारतीय पृष्ठ</a> जोड़ने का दायित्व लिया। गर्व है कि इसमें हिंदी का संकलन भी जुड़ गया है।</p>
<p>एक ईरानी चिठ्ठाकार हुसैन देराक्सन द्वारा <a href="http://patrix.typepad.com/nerves/2005/05/building_a_blog.html">ब्लॉगमँडल</a> बनाने पर प्रस्तुत सत्र ने उस विधि से अवगत कराया जिसमें एक समूह का इस प्रकार क्रमवार विकास हो सकता है कि उसके माध्यम से राजनैतिक और सामाजिक परिवर्तन तक लाये जा सके। हालाँकि हम भारतीयों को कहीं अधिक वैचारिक एवं संवाद की स्वतंत्रता प्राप्त है पर हमारे इस शक्ति के उपयुक्त प्रयोग का प्रभाव नजर नहीं आता। चिठ्ठे की सबसे बड़ी ताकत सामान्य जनता को आवाज देना है और कोई भी प्रकाशक बन कर क्रांति का सूत्रपात कर सकता है। अगर पढ़ने और सुनने वाले लोग हैं तो मुझे विश्वास है कि भारत में प्रचूर आवाज़ें छुपीं है जो हमारे देश चलाने के तौर तरीकों पर महत्वपूर्ण प्रभाव छोड़ सकती हैं। हिंदी चिठ्ठा समूह जो हाल ही में सक्रिय हुआ है, हुसैन के प्रयासों की बेहतर अनुशंसा करेगा। मैं उनके कुछ सुझावों को क्रमवार रखता हूँ</p>
<ul>
<li>तकनीकी रूप से सक्षम देश में रहने वाले, या ऐसे लोग जो संस्कृति से जुड़े हैं, ब्लॉग शुरू करें।</li>
<li>ब्लॉग बनाने की सरल विधि का भरपूर प्रचार करें। नये चिठ्ठाकारों को प्रोत्साहित करें। अधिक पाठक उन्हें ज्यादा लिखने को उकसायेगा। उनका विषयानुसार वर्गीकरण पाठकों को उनकी रूचि के अनुसार चुनाव में मदद देगा।</li>
<li>अधिक प्रचार हेतु तकनीकी लोगों की अपेक्षा मशहूर हस्तियों को चिठ्ठाकारी में घसीटिये।</li>
<li>स्थानीय कंप्यूटर प्रोगामरों को स्थानीय जरूरत के हिसाब से तकनीकें खोजने को प्रोत्साहित करें, जैसे कि <a href="http://persianblog.com/">यह ब्लॉग</a> देखिए।</li>
</ul>
<div id="pullQuoteR">आदर्श उद्देश्यों के बीच भी लोगों को तमाशे पसंद हैं।</div>
<p>भारतीय चिठ्ठाकार हुसैन के प्रयासों से सीख ले सकते हैं। भारत में कंप्यूटर के सीमित प्रभाव और सूचना प्रसारण के ढाँचे को कोसने से पहले जरा ईरान के सीमित संसाधनों के बारे में सोचिए। वे राजनैतिक सहयोग और संसाधनों के मामने में हमसे भी गये बीते हैं। परंतु चिठ्ठों के प्रभाव से वहाँ समीकरण बदल रहे हैं। हुसैन का ब्लॉग ईरान में निषिध्ध है और वे नित नये डोमेन और ईमेल संस्करणों के जरिए अपने पाठकों तक पहुँचते हैं। अगला सत्र डेव वाईनर का था, <a href="http://patrix.typepad.com/nerves/2005/05/a_respectful_di.html">सम्मानजनक मतविभिन्नता</a> पर, जो मेरे हिसाब से सत्र के उद्देश्य के विपरीत था। सत्र में राजनैतिक स्तर के मतभेद जबरदस्त व्यक्तिगत मतभेदो के स्तर तक पहुँच गये। मेरे ख्याल से इस सत्र के बारे में अन्य चिठ्ठो पर भरपूर लिखा जायेगा, जो दर्शाता है कि आदर्श उद्देश्यों के बीच भी लोगों को तमाशे पसंद हैं।</p>
<p>नैशविल के इन सत्रों से मुझे साकार होती एक क्रांति नजर आयी। चिठ्ठाकारी अपने व्यक्तिगत विचार लिखने से कुछ ज्यादा है। अगर ढंग से दोहन हो सके तो यह सामुहिक बौद्धिक संपदा हमारे बुनियादी दृष्टिकोण में आमुलचूल परिवर्तन ला सकती है। एक गुमनाम से विधि प्राध्यापक के <a href="http://instapundit.com/">चिठ्ठे</a> के प्रतिदिन लाखों आगंतुकों की सोच कर ही पत्राकारिता कि कंपकपी छूट रही है। चिठ्ठाकारी पत्राकारिता को स्थानापन्न नही कर सकती पर उस पर अंकुश रखने का एक सटीक माध्यम अवश्य है। इतना अवश्य है कि यह सूचना के आदान प्रदान का एक नया माध्यम भी है चाहे उसमें से कुछ प्रसार करने के योग्य न भी हो। इस प्रतिस्पर्धा के युग में अगर आप सरल एवं सटीक रूप से लिखेंगे तो आपको पाठक अवश्य मिलेंगे चाहे आप किसी भी विषय पर लिखें। पर चिठ्ठाकारी को ज़्यादा गँभीरता से न लें, विपणन के विचार और विश्वास जीतने की इच्छा को ताक पर रखिये और लेखन तथा विभिन्न विचारधारा रखने वाले वृहद लोगों से संवाद का आनंद लीजिए और देखिये कैसे आपकी जिज्ञासा और सहनशक्ति बढती है। जैसा कि <a href="http://www.coxandforkum.com/">जान कॉक्स</a> ने कहा भी है, &#8220;चिठ्ठाकारी एक आनंद है, इसे ऐसा ही रहने दो और बाकी सब अपने आप होता जायेगा&#8221;, इस बात से भला कौन असहमत होगा।</p>
<p class="note"><a href="http://patrix.typepad.com/">पैट्रिक्स</a> जिन्होंने ब्लॉग नैशविल गोष्टी में हिस्सेदारी की ने यह रपट खास निरंतर के लिये लिखी। आशा है कि भारतीय अंग्रेज़ी चिट्ठाकारों की निरंतर पर भागीदारी भी बढ़ेगी और वसुधैव कुटुम्बकम की भावना ब्लॉगमंडल में भी सर चढ़कर बोलेगी। मूल अंग्रेज़ी में लिखी रपट का हिन्दी रूपांतरण किया <a href="htp://rojnamcha.blogspot.com/">अतुल अरोरा</a> ने।</p>
<div id=boxR>
<h2>जाल पर दो नयी पत्रिकायें</h2>
<p><img class="alignright" style="border: 0pt none; margin: 5px;" src="http://www.nirantar.org/images/stories/0605/shabdanjali.gif" border="0" alt="" width="200" align="right" /><br />हिंदी की दो नयी पत्रिकायें प्रकाशित होने की जानकारी मिली है। सारिका सक्सेना द्वारा संचालित <a href="http://shabdanjali.com/">शब्दांजलि</a> साहित्यिक पत्रिका है। वहीं से कुछ अन्य <a href="http://shabdanjali.com/some-hindi-sites.htm">हिंदी की कड़ियों</a> की जानकारी भी मिली। दूसरी पत्रिका है <a href="http://ratina.blogspot.com/">रति सक्सेना</a> की काव्य पत्रिका <a href="http://www.kritya.org/">कृत्य</a>। दोनों पत्रिकाओं के प्रकाशन मंडल को हम उनके प्रवेशांक के लिये बधाई देते हैं तथा पत्रिका की निरंतर प्रगति की मंगल कामना करते हैं।</div>
<h2>अंतर्जाल पर हिन्दी के बढ़ते चरण</h2>
<p>अंतर्जाल पर हिन्दी का प्रयोग दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। एक समय था जब इंटरनेट पर हिन्दी बहुत कम देखने को मिलती थी परन्तु आज स्थिति तेजी से बदल रही है। होशंगाबाद, मध्यप्रदेश में इसी विषय को लेकर एक ई-गोष्ठी 15 मई 2005 को स्थानीय ई‍ पब्लिक लाइब्रेरी में संपन्न हुई। गोष्ठी के संयोजक एवं संचालक <a href="http://hindisahitya.blogspot.com/">जगदीश व्योम</a> ने इस अवसर पर कहा कि विश्वजाल पर हिन्दी की उपस्थिति के बारे में अधिकांश लोग सुनते तो रहते हैं पर देखते बहुत कम हैं। इसे सार्वजनिक रूप से देखा और दिखाया जाना चाहिये। किसी भी गाँव या शहर के साहित्यकार अंतर्जाल पर अपनी कविताओं के माध्यम से आ सकते हैं, यह इस गोष्ठी में दिखाया गया। हिन्दी प्रेमी कर्मवीरों द्वारा किए जाने वाले महत्वपूर्ण कार्यों की भी चर्चा की गई जिन्होंने <a href="http://www.blogger.com/">ब्लॉगर</a> द्वारा हिन्दी प्रयोग के नए द्वार खोले हैं। इस आशय से डॉ॰ व्योम द्वारा तैयार किया गया होशंगाबाद के कवियों के आनलाईन काव्य संकलन <a href="http://www.narmadateere.blogspot.com/">नर्मदा तीरे</a> का लोकार्पण किया गया। गोष्ठी की मुख्य अतिथि थीं होशंगाबाद की उप जिलाधीश अलका श्रीवास्तव और मुख्य अतिथि थे प्रतिभूति कागज कारखाना के प्रबंधक राकेश कुमार। गोष्ठी में प्रवासी भारतीयों अश्विन गाँधी, पूर्णिमा वर्मन, देबाशीष एवं उनकी <a href="http://nirantar.org/about">पूरी टीम</a> आदि की सराहना की गई। इन्हीं सब के प्रयास से अंतर्जाल पर हिन्दी का प्रयोग सुलभ होता जा रहा है। गूगल मेल पर हिन्दी में ईमेल की सुविधा, ब्लॉगर पर हिन्दी का आसान प्रयोग होने से हिन्दी प्रयोग के क्षेत्र में नई क्रान्ति का सूत्रपात हुआ है। नर्मदा तीरे जैसे काव्य संकलन अन्य हिन्दी प्रेमियों को अंतर्जाल की ओर आकर्षित करेंगे। इस अवसर पर अनुभूति, अभिव्यक्ति, अक्षरग्राम, निरंतर, कविता सागर, हिन्दी साहित्य, हाइकु दर्पण आदि जालस्थलों को सभी ने देखा और इनकी भरपूर सराहना की।
<p class=note>आलेखः जगदीश व्योम</p>
<h2>न्यूज़गेटर द्वारा फ़ीड-डेमन का अधिग्रहण</h2>
<p><strong><a href="http://gigaom.com/2005/05/16/is-newsgator-buying-feed-demon/">न्यूज़गेटर द्वारा फ़ीड-डेमन का अधिग्रहण</a></strong><img class="alignleft" style="border: 0pt none; margin: 5px;" src="http://www.nirantar.org/images/stories/0605/fd.gif" border="0" alt="" hspace="2" vspace="2" width="103" height="96" align="left" />: 17 मई को <a href="http://www.newsgator.com/">न्यूजगेटर</a> ने लोकप्रिय फ़ीडडेमन आर.एस.एस एग्रीगेटर और सी.एस.एस संपादन तंत्र टॉपस्टाइल के निर्माता <a href="http://www.bradsoft.com/">ब्रैडबरी सॉफ़्टवेयर</a> का अधिग्रहण कर लिया है। <a href="http://www.feeddemon.com/">फ़ीडडेमन</a> को अब न्यूज़गेटर के ऑनलाइन तुल्यकालन प्लेटफ़ॉर्म के साथ मिला दिया जायेगा और ये उत्पाद अब न्यूज़गेटर के अदा किये हुये पंजीकृत प्लॉन के साथ उपलब्ध होगा। साथ में, इन उत्पादों के निर्माता <a href="http://nick.typepad.com/">निक ब्रैडबरी</a> भी न्यूज़गेटर से जुड़ जायेंगे। ऐसा माना जा रहा है कि ये इन दोनों कम्पनियों का बड़ा चतुराई भरा निर्णय है। आर.एस.एस काफ़ी तेज़ी से प्रगति कर रहा है और माना जा रहा है कि छोटी कम्पनियों को अब काफ़ी बड़ी लागत वाली कम्पनियों जैसे कि <a href="http://my.yahoo.com/s/about/rss/">याहू</a>, <a href="http://www.bloglines.com/">ब्लॉगलाइन्स</a>, <a href="http://www.start.com/1">माइक्रोसॉफ़्ट</a>, <a href="http://www.google.com/">गूगल</a> आदि से जुड़ना ही पड़ेगा। इस अधिग्रहण के बारे में एक रोचक इंटरव्यू <a href="http://chris.pirillo.com/blog/_archives/2005/5/16/864924.html">यहां</a> पढ़ा जा सकता है।</p>
<div id=boxL><strong><a href="http://www.clickz.com/news/article.php/3505766">फीड के लिये गूगल एडसेन्स बनी हकीकत</a></strong></p>
<p><img class="alignright" style="border: 0pt none; margin: 5px;" src="http://www.nirantar.org/images/stories/0605/google.gif" border="0" alt="" hspace="2" vspace="2" width="143" height="59" align="right" />निरंतर के <a href="http://www.nirantar.org/0505-halchal/">मई अंक में</a> इस बारे में हमने जानकारी दी थी। पिछले कुछ सप्ताह एडसेन्स संबन्धित विज्ञापनों के वितरण को मुट्ठी भर आर.एस.एस फ़ीड पर परीक्षण करने के बाद, गूगल अब अपने साथी प्रकाशकों के लिये बीटा कार्यक्रम चालू कर रहा है। गूगल के एडवर्ड तंत्र पर विषय सम्बन्धी वितरण के लिये प्रकाशित किये जाने वाले विज्ञापन अब सीधे क्षमल फ़ीड पर दिखेंगे। हालांकि गूगल ने हाल ही में एक ऐसी सुविधा का भी परीक्षण किया है जो कि प्रकाशकों को सीधे विषय संबन्धित साईट पर ले जायेगा फिर भी प्रकाशक फ़ीड के द्वारा विज्ञापन को सीधे नहीं देख पायेंगे या फ़ीड के आधार पर वितरित विज्ञापनों के लिये बोली नहीं लगा सकेंगे।</p>
<p>सर्च इंजनों का बादशाह अब सौ से अधिक पंजीकृत और चालू धारकों वाले प्रकाशकों के आवेदनों को स्वीकार कर रहा है। एक बार इसकी स्वीकृति मिलने के बाद प्रकाशक सीधे गूगल के एड कोड को उनके फ़ीड टेम्पलेट में चिपका सकते हैं। टेक्स्ट एड वाले विज्ञापनों को ग्राफिक या चित्र के रूप में रखा जायेगा जिससे कि गूगल ये सुनिश्चित कर सकता है कि विज्ञापन का मसौदा तभी तैयार हो जब पाठक फ़ीड पढ़ रहे हों बजाय इसके कि जब ये इसका अभिधारण हो रहा हो। अब गूगल का मामला हो तो तकनीक तो गूढ़ होगी ही।</p></div>
<p><strong><a href="http://www.micropersuasion.com/2005/05/blogs_sold.html">Blo.gs की बिक्री</a></strong></p>
<p>खबर है चिट्ठों की जानकारी देने वाले जालस्थल Blo.gs  को किसी अज्ञात व्यक्ति को <a href="http://blo.gs/news.php#n63">बेच</a> दिया गया है और इसके खाते सम्बन्धी अधिकार 13 जून के आसपास हस्तांतरित किये जायेंगे। Blo.gs हाल ही में नवीनीकृत वेबलॉगों की एक निर्देशिका है और अपडेट होने पर लगभग हर आम ब्लॉग इसको <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Ping">पिंग</a> करता है। आश्चर्य नहीं होना चाहिये अगर जो व्यक्ति इसे खरीद रहा है वो Blo.gs को किसी ब्लॉग सर्च इंजन में न बदल दे। लगता है कि अंतर्जाल ही ब्लॉग है और ब्लॉग ही अंतर्जाल।</p>
<p><strong><a href="http://radio.weblogs.com/0001011/2005/05/10.html#a10039">फ़ीडटैग़र</a></strong></p>
<p>लगता है <a href="http://www.bloglines.com/">ब्लॉगलाइन्स</a> को अब नयी स्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। ये नया प्रतिद्वन्दी हैं <a href="http://www.feedtagger.com/">फ़ीडटैगर</a> जो कि एक (&#8220;एक और&#8221; कहना ज्यादा उचित होगा) आर.एस.एस एग्रीगेटर या संग्रहक है जो कि टैग का बहुतायत में इस्तेमाल करता है। चूंकि फ़ीडटैगर <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/AJAX">एजैक्स (AJAX) यानि एसिंक्रोनस जावास्क्रिप्ट व एक्स.एम.एल</a> नामक नयी तकनीक पर आधारित है, इसलिए इसकी गति बहुत तेज है। एजैक्स तो बिलाशक वेब की दुनिया में क्रांति ला रहा है। इसका उदाहरण है पिछले कुछ महीनों में ही इसका इस्तेमाल करके बनाये गये कुछ काफ़ी अच्छे वेब प्रयोग जैसे कि <a href="http://maps.google.com/">गूगल नक्शे</a>, <a href="http://www.flickr.com/">फ़्लिकर</a>, <a href="http://gmail.google.com/">गूगल मेल</a>, <a href="http://www.backpackit.com/">बैकपैक</a>, <a href="http://www.tiddlywiki.com/">टिडलीविकी</a>, और अब फ़ीडटैगर। लगता है कि अंतर्जाल अब पहले सा नहीं रहने वाला!</p>
<p><strong>आई.बी.एम ने कर्मचारियों को दी चिट्ठाकारी करने की छूट</strong></p>
<p>जब आप ये समाचार समाचार पढ़ रहे होंगे, तब तक शायद इस नामी कंपनी ने कार्पोरेट स्तर पर शुरू की गयी अपनी मुहीम में अपने लगभग 1,30,000 कर्मचारियों को चिट्ठाकारी करने की अनुमति प्रदान कर भी दी होगी। ये प्रस्ताव हाल में प्रकाशित आई.बी.एम की तिमाही आर्थिक रपट के बाद लाया गया है जिसके प्रकाशित होने के बाद करीब 15,000 कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा था जिसमें तकरीबन 13,000 तो केवल यूरोप से ही थे। इस कदम के नेपथ्य में शायद कम्पनी की यह उम्मीद है कि चिट्ठाकारी उनके घाटे को कम कर सकती है यदि इससे उनके कर्मचारी आनलाइन जाकर अपने नियोक्ता के उत्पादों व तकनीकों की बिक्री बढ़ाने में मदद कर सकें।</p>
<p>कर्माचरियों इस बात का प्रशिक्षण दिया जायेगा कि चिट्ठाकारी क्या है और उससे क्या क्या मसौदा डालना उचित है। कम्पनी ने विकी नामक एक सरल तकनीक को भी लगाया है जिसके माध्यम से समूह आपस में मिलकर काम कर सकते हैं व जानकारी को बांट सकते हैं। विकी आई.बी.एम के लेख सहयोगी सॉफ़्टवेयर के जितने विस्तृत नहीं हैं लेकिन वो नैगमिक विभागों के लिये काफ़ी महत्वपूर्ण हैं जहां वो कभी कभी माइक्रोसॉफ़्ट एक्सेल तालिका के विकल्प के रुप में भी उभर जाते है। इस मुहिम का आधिकारिक उद्देश्य है कि ऑनलाइन समूहों व बहसों में कम्पनी के तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करके आई.बी.एम की स्पर्धात्मक स्थिति को सूचना प्रौद्योगिकी बाजार में सुधारा जाय। वो सब तो ठीक है, पर यह चिट्ठाकारी के बहाने कहीं वे अपने हर मुलाजिम को अपने सेल्स विभाग में तो नहीं खींच रहे? पाठक निःसंदेह ऐसे चिट्ठों की राय को अब ज़्यादा नाप तौल कर आत्मसात करेंगे।</p>
<p><strong><a href="http://www.emarketer.com/Article.aspx?1003396">चिट्ठाकारी में बढ़ोत्तरी रूकी</a></strong></p>
<p>ईमार्केटर के द्वारा किये एक सर्वेक्षण के अनुसार अमेरिका में हुये चुनावों के बाद चिट्ठाकारी की अप्रत्याशित वृद्धि में कमी आयी है। इस जांच के अनुसार केवल 4 प्रतिशत अमेरिकी कम्पनियों के चिट्ठे जनता के लिये खुले हैं और इससे भी कम कम्पनियां अब ऐसी चालू साइटें बना रहीं हैं जिन पर उपलब्ध कड़ियों व प्रतिक्रिया चिन्हों को कई सारे पाठक चिट्ठों से संबद्ध करते हैं। कम्पनी का ये भी दावा है कि कई सारे अमेरिकी प्रयोगकर्ताओं को तो ये भी नहीं पता है कि चिट्ठा क्या होता है। और हमें लगता था कि अमरीकी हमसे हर बात में दो चार कदम आगे ही रहते हैं।</p>
<p><strong><a href="http://www.richardsilverstein.com/tikun_olam/2005/05/typepad_condone.html">घृणा का संदेश फ़ैलाने पर सिक्सअपार्ट की निंदा</a></strong></p>
<p>एक यहूदी चिट्ठाकार द्वारा उनके चिट्ठे पर यहूदियों के खिलाफ लिखने वाले एक प्रयोगकर्ता को टाइपपैड से प्रतिबंधित करने के मामले पर ब्लॉग कम्पनी सिक्स अपार्ट की काफ़ी निंदा हुई है। चिट्ठाकार रिचर्ड सिल्वरस्टाइन सिक्स अपार्ट से नाराज़गी जताते हुए लिखते हैं कि टाइपपैड के कर्मचारी उनके प्रति बिल्कुल भी सहानुभूति नहीं दिखा रहे हैं। उनको बताया गया कि टाइपपैड केवल सर्वव्यापक स्पैम के अलावा और किसी चीज़ को प्रतिबंधित नहीं करता है। वो ये भी लिखते हैं को टाइपपैड के इस कर्मचारी ने इस मामले में अपनी भावनाओं को सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने के लिये उन पर व्यक्तिगत रूप से काफ़ी रोष जताया है।</p>
<h2>और अंततः&#8230;</h2>
<p><strong>तीसमारखाँ ब्लॉगर</strong></p>
<p><a href="http://www.blogebrity.com/">ब्लॉगेब्रिटी</a> ने विश्व के सबसे बड़े चिट्ठाकारों की सूची जारी की है। तीन किस्मों में बाँटा गया है उनको अ, ब, स, न जाने क्यों? जो नामचीन हिंदुस्तानी इसमें शामिल हैं उन्हें तो खैर हम वैसे भी जानते ही थे, सिक्स अपार्ट के वीपी <a href="http://www.dashes.com/anil/">अनिल दाश</a> (A सूची में), <a href="http://digitalphotography.weblogsinc.com/">अमित मल्होत्रा</a> (B सूची में तथा <a href="http://gauteg.blogspot.com/">गौतम घोष</a> और <a href="http://www.emergic.org/">राजेश जैन</a> (C सूची में)। &#8220;अ ब स&#8221; में ही गोया सारी दुनिया सिमट गयी है।</p>
<img src="http://www.nirantar.org/?ak_action=api_record_view&id=2630&type=feed" alt="" />]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.nirantar.org/0605-halchal/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>वर्डप्रेस की सर्च-इंजनों में हेरफेर?</title>
		<link>http://www.nirantar.org/0505-halchal</link>
		<comments>http://www.nirantar.org/0505-halchal#comments</comments>
		<pubDate>Mon, 23 May 2005 12:27:56 +0000</pubDate>
		<dc:creator>निरंतर पत्रिका दल</dc:creator>
				<category><![CDATA[हलचल]]></category>
		<category><![CDATA[Google]]></category>
		<category><![CDATA[Search Engine]]></category>
		<category><![CDATA[Wordpress]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://localhost/wp27nirantar/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9a-%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82/</guid>
		<description><![CDATA[क्या वर्डप्रेस ने सर्च इंजनों में हेरा फेरी की? क्या अमरीकी चिट्ठों को शक की नज़र से देखते हैं? सिक्स अपार्ट और अडोब मिल कर कौन सी खिचड़ी पका रहे हैं? और गूगल ने जीमेल में कौन सी नई तकनीक जोड़ी है? इन सवालों का जवाब पाने के लिये पढ़ें हमारा स्तंभ <strong>हलचल </strong>जिसमें पेश कर रहे हैं माह की चुनिंदा खबरें।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<h1>पहले माह की बड़ी खबरें&#8230;</h1>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">सिक्स अपार्ट और अडोब का मेल, कुछ तो खास है!</h3>
<p><img title="हलचल" src="http://www.nirantar.org/images/stories/halchal.gif" border="0" alt="हलचल" hspace="5" vspace="5" width="135" height="140" align="right" /><a href="http://www.econtentmag.com/Articles/ArticleReader.aspx?ArticleID=7824">समाचार है</a> कि चिट्ठाकारी सॉफ्टवेयर और सेवाएँ देने वाले <a href="http://www.sixapart.com/">सिक्स अपार्ट</a> और <a href="http://www.adobe.com/">अडोब</a> ने ऐसे यन्त्र बनाने के लिए सहयोग किया है, जिस से डिज़ाइनर सीधे <a href="http://www.golive.com/">गोलाइव</a> के डिज़ाइन परिवेश से <a href="http://www.movabletype.org/">मूवेबल टाइप</a> और <a href="http://www.typepad.org/">टाइपपैड</a> के अभिकल्प निर्मित और परिवर्तित कर सकते हैं। गोलाइव में ऐसे औज़ार ड़ाल दिए गए हैं जिन से डिज़ाइनर मूवेबल टाइप और टाइपपैड के अभिकल्प निर्मित कर सकते हैं, ताकि जानदार और आकर्षक चिट्ठे और जालपृष्ठ चटपट बनाये जा सकें। इस से जटिल चिट्ठे बनाने में लगने वाली मेहनत और पेचीदगी कम हो जाएगी। और तो और, इन औज़ारों से मोब्लॉगिंग यानी मोबाइल फोन के ज़रिए चिट्ठे पर लिखना या चित्र भेजना भी संभव हो पायेगा। भई वाह!</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">वर्डप्रेस ने की सर्च इंजनों में हेरा फेरी?</h3>
<p><a href="http://www.seroundtable.com/archives/001742.html"><img class="alignleft" style="border: 0pt none; margin: 8px;" title="Wordpress manipulating search engines" src="http://www.nirantar.org/images/stories/0505/wordpress-spamming.jpg" border="0" alt="Wordpress manipulating search engines" hspace="5" vspace="5" width="175" height="140" align="left" />ख़बर है</a> कि एक <a href="http://www.waxy.org/archive/2005/03/30/wordpres.shtml">चिट्ठाकार</a> ने लोगों के चहेते ब्लॉगिंग सॉफ्टवेयर निर्माता वर्डप्रेस को खोज इंजनों को स्पैम भेजते रंगे हाथों पकड़ा। उन्होंने कथित रूप से लगभग 1,20,000 छोटे जालपृष्ठ बनाए जिनमें “cialis”, “credit” जैसे पैसा बनाने वाले की-वर्ड ठूँस दिए और वर्डप्रेस के <a href="http://wordpress.org/">मुख्य पृष्ठ</a> पर उन पृष्ठों की अदृश्य कड़ियाँ डालीं गयीं। इलज़ाम है कि फरवरी से <a href="http://photomatt.net/">मैट मुलेनवेग</a> चुपचाप ऐसे लेखों का आतिथ्य कर रहे थे जो ख़ास तौर पर गूगल के ऍडवर्ड्स कार्यक्रम में धालमेल करने के लिए बनाए गए।</p>
<p>सवाल है कि वर्डप्रेस ही क्यों? वर्डप्रेस के जालपृष्ठ की गूगल पेज रैंक 8/10 है, खासकर इसलिए कि वर्डप्रेस द्वारा संचालित हर चिट्ठे पर वर्डप्रेस के जालपृष्ठ की कड़ी पहले से लगी होती है। इस ऊँची पेज रैंक से गूगल के खोज परिणामों में उन का दर्जा बढ़ जाता है, जिस से विषय-सम्बन्धित गूगल विज्ञापन बड़े लाभप्रद हो जाते हैं। इस से वर्डप्रेस विज्ञापनदाताओं के लिए खासा आकर्षक हो जाता है।</p>
<p>कुछ रोचक प्रश्न उभरते हैं इस से। पहला, क्या मुक्त सूत्री परिकल्पों के संयोजकों को यह बताना चाहिए कि वह पैसा कैसे बनाते हैं? दूसरा, क्या मुक्त सूत्री परिकल्पों के लिए इस तरह खोज यन्त्रों को छल कर पैसा बनाना नीतिसंगत है? आप भी सोचें और बतायें हमें।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">गूगल का नया प्रयोगः जीमेल में आर.ऍस.ऍस पठन कार्यशीलता</h3>
<div id="pullQuoteR">गूगल को फीडरीडरों में व्यवसाय दिख रहा है। इस रफ्तार से तो लगता है वाकई गूगल किसी दिन स्वास्थ्य वर्धक पेय भी बेचेगा।</div>
<p>ब्लॉगर, जिस का गूगल ने 2004 में अधिग्रहण किया था, के सूत्रधार इवान विलियम्ज़ <a href="http://www.evhead.com/2005/04/gmail-adds-feed-reading.asp">का कहना है</a> कि गूगल जी-मेल (गूगल मेल) में आर.ऍस.ऍस फीड तकनीक के साथ प्रयोग कर रहा है। नतीजा आर.ऍस.ऍस रीडर बाज़ार में ब्लॉगजगत के चहेते <a href="http://www.bloglines.com/">ब्लॉगलाइन्स</a> के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है, अब जिस का मालिक गूगल का प्रतिस्पर्धी आस्क जीव्स है। इस समय योजना लग रही है जीमेल के ऊपर आर.ऍस.ऍस देने की, साथ में ऍडसेन्स वाले विज्ञापन। दिलचस्प बात है कि गूगल को फीडरीडरों में व्यवसाय दिख रहा है। इस रफ्तार से तो लगता है वाकई गूगल किसी दिन <a href="http://akshargram.com/nirantar/?PHPSESSID=bf41a5913a3e40edc0346924360a5697">स्वास्थ्य वर्धक पेय</a> भी बेचेगा।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">विकीपीडिया को मिला याहू का सहारा</h3>
<p><a href="http://news.com.com/Yahoo+to+support+Wikipedia/2100-1024_3-5658621.html?part=rss&amp;tag=5658621&amp;subj=news%3Cbr%20/%3E">याहू योजना बना रहा है</a> याहू-खोज में ऐसी कारीगरी जोड़ने की जिससे लोगों को सहकारी ज्ञानकोष <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Main_Page">विकीपीडिया</a> के आलेखों तक पहुँचने के शार्टकट मिलेंगे। विकीपीडिया की कड़ियाँ खोज परिणामों से ऊपर दिखाई जाएँगी। याहू और विकीपीडिया को जन्म देने वाली कंपनी विकीमीडिया फाउन्डेशन में ऐसा करार हुआ लगता है। इन पंक्तियों के आप तक पहुँचने तक संभवतः यह सुविधा अमरीका और कुछ युरोपीय, एशियाई और दक्षिण अमरीकी व्यवसाय-क्षेत्रों में जोड़ दी गई होगी। इस के अतिरिक्त याहू विकीपीडिया को हार्डवेयर और अन्य साज़ सामान भी उपलब्ध कराएगा। विकीपीडिया का यह अन्तर्जाल ज्ञानकोष विकी तकनीक पर आधारित है जिस की मदद से कई लोग एक साथ एक ही परिकल्प पर काम कर सकते हैं। यानी, कोई भी विकीपीडिया में कुछ जोड़ सकता है या उस का सम्पादन कर सकता है। भई अच्छी बात है, हो सकता है कि <a href="http://hi.wikipedia.org/wiki/">हिन्दी विकीपीडिया</a> के भी भाग फिरें कभी।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px"><img class="alignleft" style="border: 0pt none; margin: 8px;" title="Blog censored in China" src="http://www.nirantar.org/images/stories/0505/china-blog-censorship.jpg" border="0" alt="Blog censored in China" hspace="5" vspace="5" width="175" height="212" align="left" />चीनी चिट्ठों का दमन है जारी</h3>
<p>ओपन नेट इनिश्येटिव द्वारा आज जारी एक <a href="http://opennetinitiative.net/modules.php?op=modload&amp;name=News&amp;file=article&amp;sid=49">नई रपट</a> ने बताया है कि चीन में चिट्ठों पर रोकटोक और सेन्सरशिप बढ़ रही है। इस विस्तृत अध्ययन में पाया गया कि मुख्य चीनी ब्लॉग कंपनियाँ राजनैतिक दृष्टि से नाज़ुक शब्दों के आधार पर प्रविष्टियों को या तो संपादित करती हैं या उन को हटा ही देती हैं। इस रिपोर्ट में चीन में चिट्ठाकारी के हाल के इतिहास पर नज़र ड़ाली गई है और इन खबरों पर भी कि मार्च 2004 में सरकार ने तीन लोकप्रिय ब्लॉग कंपनियों को इसलिए बन्द कर दिया क्योंकि एक चिट्ठाकार ने तियानानमेन चौक घटना और सार्ज़ महामारी के बारे में एक विवादास्पद पत्र चिट्ठे पर ड़ाला था। बाद में तीनों कंपनियों को दोबारा खुलने की इजाज़त मिली पर उन्होंने चिट्ठों के मसौदे को नियन्त्रित करने की छलनियाँ लगा दीं। इस रिपोर्ट में गूगल के ब्लागस्पॉट डोमेन पर चलने वाले चिट्ठों पर भी खुली रोकटोक लगने की बात कही गई है। किस दुनिया में जी रहे हैं हम?</p>
<h1>कुछ और खबरें&#8230;</h1>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">विडियो ब्लॉग: आसार अच्छे &#8216;दिखते&#8217; हैं</h3>
<p>नब्बे के दशक के उत्तरार्ध से ही, जब से ब्लॉग का आगमन हुआ, विडियो ब्लाग (व्लॉग) की <a href="http://seattletimes.nwsource.com/html/businesstechnology/2002244378_paul18.html">संभावनाएँ</a> भी बनी हुई हैं। पर व्लॉगिंग आम प्रयोक्ता के लिए तभी व्यावहारिक बन पाई है जब तीव्र गति इंटरनेट कनेक्शनों में प्रगति हुई है और वाजिब दाम लेकर बड़े आकार की विडियो फाइलों का आतिथ्य करने के लिए इंटरनेट सेवा प्रदान करने वाली कंपनियाँ तैयार हुई हैं। आलोचक जो मोबाइल विडियो को दुत्कारते हैं, सही कहते हैं कि कोई भी हाथ में यन्त्र लिए फिल्म या टीवी नहीं देखना चाहता। पर व्लाग, या किसी के परिवार की वीडियो फिल्म, या यात्रा वृतान्त, या अन्य छोटे विडियो, छोटे से पर्दे पर ठीक ठाक चल सकते हैं।</p>
<p>एक नई साइट videoblogging.com विडियो के नौसिखियों को सही औज़ारों और कार्यशीलताओं की ओर निर्देशित करती हैं। व्लाग होस्टिंग सेवाएँ पनप रही हैं, और कहा जा रहा है कि गूगल, याहू और अन्य कंपनियाँ व्लाग सेवाएँ उपलब्ध कराने की सोच रही हैं। सेलफोनों और आइपॉड जैसे अन्य हाथ वाले यन्त्रों पर फोटोग्राफी की भी धूम मची है।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">चिट्ठाकार भी फैला रहे हाथ</h3>
<p>सच में! बख्शीश का डिब्बा अन्तर्जाल तक <a href="http://www.kansas.com/mld/kansas/news/nation/11418280.htm">पहुँच गया है</a>, जहाँ पर लालच, सीमा लांघने और कर सम्बन्धित मुद्दों के चलते &#8220;वर्चुअल टिप जार&#8221; विवाद का विषय बन गए हैं। ऐसे चिट्ठाकारों के लिए जिन के चिट्ठों पर आवाजाही अच्छी है, नियमित पाठक आते हैं, या जिनमें भीख मांगने का हुनर हो, टिप जार का अर्थ है खासी आमदनी। कुछ पहले दर्जे के चिट्ठे तो हज़ारों डॉलर खींच लेते हैं साल भर में। सूज़ी मैड्रक के बख्शीश के डिब्बे से तो गाड़ी ही निकल आई। &#8220;मेरी कार ने जब दम तोड़ा तो मेरे पाठकों ने मुझे 1500 डॉलर भेज दिए&#8221;, बेनसालेम, पेन्सिलवेनिया की मैड्रक, जिन का गुर्राता चिट्ठा <a href="http://suburbanguerrilla.blogspot.com/">सबर्बन गोरिल्ला</a> कहलाता है, चहक कर कहती हैं।</p>
<p>कई चिट्ठों पर टिप जारों के इलावा &#8220;इच्छा सूचियाँ&#8221; हैं &#8212; चिट्ठाकार की पसन्दीदा किताबों, खेलों, गानों, फिल्मों, वग़ैरा की, जिन्हें पाठक से भेजने की उम्मीद की जाती है। पर खनकती नकदी जैसी कोई चीज़ नहीं। <a href="http://www.paypal.com/">पे-पाल</a> एक ऐसी सेवा है, जिस के ज़रिए इंटरनेट के ज़रिए पैसे भेजे जा सकते हैं। कुछ लोग ब्लॉगर चेक, मनी ऑर्डर, यहाँ तक कि क्रेडिट कार्ड भी लेते हैं। तो जनाब क्या इरादा है आपका?</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">राजनैतिक चिट्ठे पढ़ते हैं अमरीकी वयस्क</h3>
<div id="pullQuoteR">स्नातक या स्नातकोत्तर लोगों की राजनैतिक चिट्ठा लिखने की संभावना उन लोगों से ज़्यादा है जो कम शिक्षित हैं, और पुरुषों की ऐसे चिट्ठे लिखने की संभावना महिलाओं की तुलना में अधिक है। और हमें लगता था कि औरतें जन्मजात राजनीतिज्ञ होती हैं!</div>
<p>एक <a href="http://www.informationweek.com/story/showArticle.jhtml?articleID=160901697&amp;tid=5979%2C5989">सर्वेक्षण</a> से पता चला है कि इंटरनेट पर जाने वाले हर 5 अमरीकी वयस्कों में से 2 ने राजनैतिक चिट्ठे पढ़े हैं, और एक चौथाई से ज़्यादा लोग महीने में एक या ज़्यादा बार उन्हें पढ़ते हैं। वयस्क लोग राजनैतिक विशेषज्ञों और दलों की जाल पत्रिकाएँ पढ़ते तो हैं, पर टिप्पणियाँ काफी कम लोग लिखते हैं। मार्च में इंटरनेट पर जाने वाले 2630 वयस्कों पर हुए हैरिस इंटरैक्टिव सर्वे के अनुसार ऐसे चिट्ठों पर टिप्पणी करने वालों की संख्या 10 में से 1 से भी कम थी। जो वयस्क लोग राजनैतिक चिट्ठे पढ़ते हैं, उन में से 15 प्रतिशत लोगों ने कभी टिप्पणी लिखी थी। यह भी पता चला है कि स्नातक या स्नातकोत्तर डिग्रियों वाले लोगों की राजनैतिक चिट्ठा लिखने की संभावना उन लोगों से ज़्यादा है जो कम शिक्षित हैं, और पुरुषों की ऐसे चिट्ठे लिखने की संभावना महिलाओं की तुलना में अधिक है। और हमें लगता था कि औरतें जन्मजात राजनीतिज्ञ होती हैं!</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">क्या अमरीकी चिट्ठों को शक की नज़र से देखते हैं?</h3>
<p>लो, और सुनो! वेब होस्टिंग कंपनी होस्टवे द्वारा किए <a href="http://news.designtechnica.com/article7140.html">एक और सर्वेक्षण</a> से पता चला है कि लोग सामान्यतः चिट्ठों से ज़रा सावधान रहते हैं।</p>
<blockquote><p>&#8220;नतीजे कुछ अन्तर्विरोधी हैं। उदाहरणतः 52% ने कहा कि चिट्ठाकारों को वही सुरक्षा दी जानी चाहिए जो पत्रकारों को मिलती है। पर साथ ही उस से अधिक संख्या में लोग मानते हैं कि ऐसे चिट्ठों पर कुछ सेंसरशिप होनी चाहिए। सर्वे किए गए लोगों में से ८०% ने बताया कि चिट्ठाकारों को लोगों की निजी सूचना नहीं प्रकाशित करनी चाहिए, पर जहाँ तक मशहूर हस्तियों और राजनीतिज्ञों का सवाल है, ऐसी आपत्तियाँ कम थीं।&#8221;</p></blockquote>
<p>अमरीका में इस माह के प्रारंभ में यह घोषणा की गई है कि राजनैतिक चिट्ठाकारों को वही पत्रकारिता अधिकार और सुरक्षाएँ दी जाएँगी जो सीऍनऍन और रायटर्स जैसी कंपनियों को उपलब्ध हैं। क्या बात है! तो अमरीका में तो हमारे पौ बारह हैं।</p>
<h1>और चलते चलते&#8230;</h1>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">चिट्ठों का प्रयोग अब घोटालों के लिए भी</h3>
<div id="pullQuoteR">चिट्ठे हैकरों के आकर्षक वाहन कई कारणों से बन सकते हैं &#8211; चिट्ठे काफी मात्रा में मुफ्त जगह देते हैं, प्रविष्टियाँ डालने के लिए कोई परिचय प्रमाण आदि नहीं माँगते और अधिकाँश ब्लाग कंपनियाँ संचित फाइलों के लिए वाइरस सुरक्षा नहीं उपलब्ध करातीं।</div>
<p>कर्मचारी इंटरनेट प्रबन्धन समाधान कंपनी <a href="http://www.websense.com/">वेबसेन्स</a> ने <a href="http://news.bbc.co.uk/2/hi/technology/4441333.stm">चेतावनी दी है</a> कि चिट्ठों का दरुपयोग हानिकारक कोड और कुंजी रिकार्ड करने वाले सॉफ्टवेयर वितरित करने के लिए लगातार बढ़ रहा है। वेबसेन्स की सुरक्षा प्रयोगशाला ने चिट्ठों द्वारा हानिकारक कोड को संचित रखने और वितरित करने के सैंकड़ों किस्सों का पता लगाया। यह रहस्योद्घाटन फरवरी में आई उन <a href="http://www.blogherald.com/2005/02/23/blogger-blogs-hosting-spyware/">खबरों</a> के बाद हुए हैं, जिन में गूगल की ब्लॉगर ब्लागस्पॉट सेवा पर हानिकारक कोड संचित होने की बात कही गई थी। वेबसेन्स के अनुसार चिट्ठे हैकरों के आकर्षक वाहन कई कारणों से बन सकते हैं &#8211; चिट्ठे काफी मात्रा में मुफ्त जगह देते हैं, प्रविष्टियाँ डालने के लिए कोई परिचय प्रमाण आदि नहीं माँगते और अधिकाँश ब्लाग कंपनियाँ संचित फाइलों के लिए वाइरस सुरक्षा नहीं उपलब्ध करातीं।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">चिट्ठाकारों को एतराज़ नहीं विज्ञापनों से</h3>
<p>जब इतने सर्वेक्षणों की बात कि तो यह भी पढ़ें। ब्लॉग विज्ञापन गुट ब्लॉगकिट्स के एक <a href="http://www.blogkits.com/cgi-bin/artman/publish/article0019.shtml">सर्वेक्षण</a> ने पता लगाया है कि अधिकाँश चिट्ठाकार चिट्ठों पर विज्ञापनों को स्वीकार योग्य मानते हैं। लगभग 1000 चिट्ठाकारों में किए गए सर्वेक्षण में पता चला कि 71% सोचते हैं कि चिट्ठों पर विज्ञापन स्वीकार्य हैं। रोचक है कि इसके उलट 29% लोगों ने यह भी कहा कि चिट्ठों पर विज्ञापन उन को स्वीकार्य नहीं हैं। अत्यधिक आशावाद का ही चिह्न है कि 52% लोगों ने यह भी कहा कि वे सोचते हैं वे चिट्ठों द्वारा पूरी आजीविका चला सकते हैं।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">राजनीतिज्ञ चिट्ठों द्वारा वोट माँग रहे हैं</h3>
<div id="pullQuoteR">चिट्ठों से लोगों को राजनीतिज्ञों के वास्तविक जीवन की एक झलक मिलती है। लालू जी, अब आपके राजनैतिक करियर को जीवनदान मिल सकता है।</div>
<p>जब चिट्ठाकार चिट्ठों से घोटालें कर रहे हैं और भिक्षा तक मांग रहे हैं तो राजनेता कैसे पीछे रहें? दक्षिण पश्चिम (इंगलैंड) में उम्मीदवारों के लिए चिट्ठे चुनावी शस्त्रागार का <a href="http://news.bbc.co.uk/1/hi/uk_politics/vote_2005/england/4439353.stm">भाग बन गए हैं</a>। वेबलॉग, यानी ब्लॉग, के द्वारा उम्मीदवार ऐसी दैनन्दिनी लिखते हैं जिसे सभी पढ़ सकते हैं, और जिस में वे अपने देनिक विचार और कार्यकलाप लिखते हैं ताकि लोग तत्काल उन्हें देख सकें। राजनीतिज्ञ कहते हैं कि इस से उन्हें अपने विचार लोगों तक तुरन्त पहुँचाने और उन की प्रतिक्रिया प्राप्त करने में सहायता मिलती है। उन का यह भी कहना है कि इस से लोगों को राजनीतिज्ञों के वास्तविक जीवन की एक झलक मिलती है और वे मतदाताओं के लिए थोड़े और &#8220;मानुषिक&#8221; हो जाते हैं। लालू जी, अब आपके राजनैतिक करियर को जीवनदान मिल सकता है।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">थक कर चूर न होने के रास्ते</h3>
<p><a href="http://www.webpronews.com/news/ebusinessnews/wpn-45-20050418AvoidingBlogBurnout.html">डैरन रौज़</a> कहते हैं, चिट्ठाकारी लम्बे समय तक चलती रहे, यह निश्चित करने का एक अच्छा तरीका है बीच बीच में अवकाश लेना। ऐसा न करने से बोरियत हो सकती है और लेखन में अवरोध आ सकता है। अवकाश लेने के अतिरिक्त अन्य तरीके हैं अग्रिम प्रविष्टियाँ बनाना और समूह चिट्ठाकारी।</p>
<img src="http://www.nirantar.org/?ak_action=api_record_view&id=2221&type=feed" alt="" />]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.nirantar.org/0505-halchal/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>1</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>बोलबाला मीडिया रिच चिट्ठों का</title>
		<link>http://www.nirantar.org/0405-halchal</link>
		<comments>http://www.nirantar.org/0405-halchal#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 09 Apr 2005 12:56:19 +0000</pubDate>
		<dc:creator>देबाशीष चक्रवर्ती</dc:creator>
				<category><![CDATA[हलचल]]></category>
		<category><![CDATA[Bloglines]]></category>
		<category><![CDATA[Yahoo]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://localhost/wp27nirantar/%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9a-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%a0/</guid>
		<description><![CDATA[<span class="intro">याहू 360&#176; का आगमन, याहू द्वारा फ्लिकर के अधिग्रहण की अफ़वाहें, पत्रकार प्रद्युम्न माहेश्वरी के प्रसिद्ध ब्लॉग मीडियाह पर टाईम्स आफ इंडिया ने लगवाया ताला और आस्कर अवार्ड्स ने भी बनाया अपना ब्लॉग। ये, और ढेर सारी और खबरें। हमारे स्तंभ <strong>हलचल </strong>में पढ़िए माह के दौरान घटित ब्लॉगजगत से संबंधित खबरें तड़के के साथ।</span>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><img src="http://www.nirantar.org/images/stories/halchal.gif" border="0" alt="हलचल" hspace="2" vspace="2" align="right" /><strong>ब्लॉग जगत से संबंधित माह की प्रमुख घटनाओं की जानकारी देता है हलचल। पहले माह की बड़ी खबरें&#8230;</strong></p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">2 बिलियन डॉलर में आस्क जीव्स की खरीदी</h3>
<p>पिछले अंक में हमने आपको     <a href="http://akshargram.com/nirantar/halchal">खबर दी</a> ब्लॉगलाईंस के अधिग्रहण की और लगता है अब यह नए हाथों में जाने वाला है।     <a href="http://www.nytimes.com/2005/03/21/business/21deal.html?ex=1269061200&amp;en=a043e61af38c1f9c&amp;ei=5090&amp;partner=rssuserland">खबर है</a> कि     <a href="http://www.iac.com/">आई.ए.सी ईंटरएक्टिव कार्प</a> अब     <a href="http://www.nytimes.com/redirect/marketwatch/redirect.ctx?MW=http://custom.marketwatch.com/custom/nyt-com/html-companyprofile.asp&amp;symb=ASKJ">आस्क जीव्स</a> का ही अधिग्रहण करने वाला है। आई.ए.सी ईंटरएक्टिव कार्प के पास अनके जालस्थलों की मालिकियत है।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">याहू 360° का आगमन</h3>
<div id="section-teaser" style="padding: 5px; width: 100px; float: right;"><strong>यह भी पढ़ें</strong><br />
याहू द्वारा फ्लिकर के अधिग्रहण और याहू 360° के पर्दापण पर निरंतर द्वारा <a href="http://www.nirantar.org/0405-nazariya">बदलते परिदृश्य का आंकलन</a>।</div>
<p><img src="http://www.nirantar.org/images/stories/0405/yahoo360.gif" border="0" alt="याहू 360°" hspace="5" vspace="5" align="left" />अब बोलबाला होने वाला है मीडिया रिच चिट्ठों का। जी हाँ अपने व्यक्तिगत, निजी रूप का चोला उतार कर ब्लॉग अब तड़कीले भड़कीले अवतार में सामने आने वाले हैं जिनमें आडियो, फोटो, विडियो झेसे तमाम मिडिया के स्वरूप सब शामिल होगें। यह यह ज़माना सोशीयम नेटवर्किंग का और ऐसे ब्लॉग बनाने की सुविधा प्रदान करने वाले     <a href="http://www.bubbler.com/">बब्लर</a> नुमा इक्का दुक्का जालस्थलों के बाद अब इस क्षेत्र में याहू जैसे बलशाली खिलाड़ी का     <a href="http://www.reuters.com/newsArticle.jhtml?type=internetNews&amp;storyID=7922762">पर्दापण</a> हुआ है     <a href="http://360.yahoo.com/">याहू 360°</a> के साथ। ब्लॉगिंग के मैदान में मौजूदा रस्साकशी में याहू के आने से क्या असर पढ़ता है यह माजरा देखना तो काफी रोचक होगा ही।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">फ्लिकर की फिकर अब याहू को</h3>
<p>याहू 360° के साथ की ही जबरदस्त खबर है कि अंर्तजाल पर चित्र सहेजने की मुफ्त सेवा देने वाले जालस्थल     <a href="http://www.flickr.com/">फ्लिकर</a> को याहू ने खरीद लिया है। यह सच है या गप्प हमें पता नहीं। अगर आप जानना चाहते हैं कि आपके चित्रों का क्या होगा? घबराइये नही,     <a href="http://blog.flickr.com/flickrblog/2005/03/yahoo_actually_.html">यहाँ पढिये</a> आपके फोटो कहीं गुम नही हो जाने वाले, अलबत्ता यह संभव है कि हर चित्र देखने दिखाने कि बहाने याहू के विज्ञापन साथ में झेलने पड़ें।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">याहू का बेतार न्यूज़रीडर</h3>
<p><img src="http://www.nirantar.org/images/stories/0405/yahoo_mobile.JPG" border="0" alt="याहू मोबाइल" hspace="5" vspace="5" align="left" />याहू ने अपने संजाल पर अपने मोबाइल प्रयोक्ताओ के लिये &#8220;माई वाई!&#8221; नामक     <a href="http://www.webpronews.com/news/ebusinessnews/wpn-45-20050310YahooDebutsWirelessRSSReader.html">सुविधा</a> प्रारंभ की है जिसके द्वारा मोबाइल से याहू के संजाल पर आने वाले उपभोक्ता समाचार और सुर्खियां देख सकते है। इस मुफ्त सेवा का wap 2.0 डिवाईस पर प्रयोग किया जा सकता है। याहू का कहना है, &#8220;हमने इसको बहुत आसान बनाया है, ताकि लोग अपने मोबाइल पर ही समाचार सुर्खियों को देख सके और यदि आपके पास एच.टी.एम.एल फोन है तो सिर्फ एक क्लिक द्वारा पूरा समाचार या बलॉग पढ़ा जा सकेगा।&#8221;</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">एक और आनलाईन न्यूज़रीडर</h3>
<p><a href="http://www.bloglines.com/">ब्लॉगलाइंस</a> और     <a href="http://www.rojo.com/">रोजो</a> के लिए अब कुछ चुनौती आ रही है।     <a href="http://www.micropersuasion.com/2005/02/exclusive_cnet_.html">खबर है</a> कि     <a href="http://www.news.com/">सीनेट न्यूज़ डॉट कॉम</a> संजाल आधारित एक आर.एस.एस समाचार एग्रीगेटर     <a href="http://www.newsburst.com/">न्यूज़बर्स्ट</a> ला रही है। न्यूज़बर्स्ट जाल पर मौजूद तकरीबन हर तरह की जानकारी जैसे समाचारों, ब्लॉग, शॉपिंग सूचियाँ, मौसम, नीलामियों और खोज परिणामों की खबर रखेगा। बड़े मीडिया समुहों द्वारा पाठकों की कृपादृष्टि बनाए रखने के लिए ब्रान्डेड आर.एस.एस समाचार एग्रीगेटर जारी करने की यह शुरुआती प्रवृत्ति प्रतीत होती है।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">मीडियाह की जुबान पर लगा ताला</h3>
<div id="section-teaser" style="padding: 5px; width: 100px; float: right;"><strong>यह भी पढ़ें</strong><br />
क्या भारत में मीडिया और ब्लॉग का सहअस्तित्व संभव होगा? पढ़ें इस अंक की <a href="http://www.nirantar.org/0405-cover-story">आमुख कथा</a> और <a href="http://www.nirantar.org/0405-nazariya">संपादकीय</a>।</div>
<p>लेखक और पत्रकार माहेश्वरी ने अपना सुप्रसिद्ध ब्लॉग मीडियाह <a href="http://mediaah.blogspot.com/2005/03/mediaah-is-dead.html">बन्द कर</a> दिया। उन्हें भारत की जाने माने प्रकाशन समूह <a href="http://www.timesofindia.com/">टाइम्स आफ इन्डिया</a> से कानूनी नोटिस आया था जिसमें उन्हें अपने उन्नीस लेखों को हटाने की बात कही गयी थी और भविष्य में ऐसे लेख छापने से मना किया गया था। घुटने टेकने के बजाए माहेश्वरी ने अपना ब्लॉग बन्द करना उचित समझा। हालांकि प्रेस की आजादी चाहने वाले कुछ लोगो ने इस प्रकाशन समूह के विरूद्द जाल पर अपनी पैटिशन डाल दी है, लेकिन क्या इससे कुछ हासिल होगा? मामले की ज्यादा जानकारी और विवादित चिट्ठों को     <a href="http://savemediaah.blogspot.com/">यहाँ</a> पढ़ा जा सकता है।</p>
<h1>कुछ और खबरें&#8230;</h1>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">अफगानिस्तान ने थामा ब्लॉगमंडल का हाथ</h3>
<p>दुर्दिन से हालिया वापसी के बाद अफगानिस्तान भी ब्लॉगिंग की दुनिया में     <a href="http://radiofreeblogistan.com/2005/03/13/afghan_blogger_read_all_about_it.html">कूद पड़ा है</a>। अमेरीकी सेना के साथ गत 2 सालों से दुभाषिये के रूप में काम करने वाले 20 वर्षीय     <a href="http://afghanwarrior.blogspot.com/2005/03/afghanistans-first-blog.html">वाहिद</a> शायद इस देश के पहले चिट्ठाकार हैं।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">आर.एस.एस फीड, बड़े काम की चीज़</h3>
<p>पैसा बनाने वाले बड़े जुगाड़ु होते हैं। वे जानते है कि कहाँ पर पैसा बनाया जा सकता है। ब्लॉग भी अब उनकी नजरों में हैं।     फीडो के अनुसार आर.एस.एस फीड में भी मनोरंजक विज्ञापन दिये जा रहे है। इसके बेहतर नतीजे सामने आये है और यह इमेंल मार्केटिंग से बेहतर भी है। अगर अपने ब्लॉग की     <a href="http://akshargram.com/sarvagya/xml_feed">क्षमल फीड</a> पर आपका नियंत्रण है तो पैसे कमाने का यह ज़रिया कोई बुरा नहीं है।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">कित्ता कित्ता पानी?</h3>
<p>प्यू ब्लॉगिंग सर्वे और सिक्स एपार्ट द्वारा लाइव जर्नल के अधिग्रहण के बाद फिर से वही विवाद शुरु हो गया कि आखिर     <a href="http://www.blogherald.com/2005/01/10/blog-numbers-are-closer-to-345-million-wordwide/">कितने ब्लॉग</a> लिखे जाते है दुनिया भर में। प्यू के मुताबिक अकेले अमरीका में ही अन्दाज़न 80 लाख ब्लॉग लिखे जाते है जबकि सिक्स एपार्ट के मुताबिक लगभग 65 लाख तो     <a href="http://www.livejournal.com/">लाइवजर्नल</a>, टाइपपैड और     <a href="http://movabletype.org/">मूवेबल टाइप</a> में ही है। जानकारों का मानना है कि गूगल के     <a href="http://www.blogger.com/">ब्लॉगर</a> के भी लगभग 30 लाख प्रयोक्ता है। ग़ैर अंग्रेज़ी चिट्ठों और     <a href="http://msn.com/">एम.एस.एन स्पेसेज़</a> के लगभग दस लाख प्रयोक्ताओं को भी गिना जाए तो कुल जमा साढे तीन करोड़ ब्लॉग बनते हैं। है ना विराट संख्या?</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">ये ब्लॉग किस चिड़िया का नाम है?</h3>
<p>एक ओर बात हो रही है ब्लॉगरों की विराट संख्या की तो दूजी ओर सीएनएन, यूएसए-टूडे और गैलप के एक हालिया     <a href="http://www.gallup.com/poll/content/?ci=15217">सर्वेक्षण</a> के अनुसार अपेक्षाकृत कम अमरीकी चिट्ठाकारी की दुनिया से वाकिफ हैं। यूँ तो तीन चौथाई अमरीकी इंटरनेट का प्रयोग कार्यस्थल, स्कूल या घर में करते हैं लेकिन चार में से केवल एक अमरीकी ही ब्लॉग से परिचित है। आधे से ज्यादा, लगभग 56 प्रतिशत को, ब्लॉग के बारे में कोई जानकारी नही है और इंटरनेट प्रयोग करने वालों में से सिर्फ 32 फीसदी ही ब्लॉग से परिचित हैं। ऐसा कोई सर्वे भारत में हो तो शायद यह संख्या छापने में भी शर्म आये।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">ब्लॉगरों की नैतिकता</h3>
<p>निरंतर के     <a href="http://akshargram.com/nirantar/?PHPSESSID=0489730762dac632ee714741ea23ef3c">मार्च अंक</a> में हमने     <a href="http://akshargram.com/nirantar/?PHPSESSID=0489730762dac632ee714741ea23ef3c">रेबेका ब्लड</a> की पुस्तक से वेबलॉग में नैतिकता विषय पर     <a href="http://akshargram.com/nirantar/?PHPSESSID=0489730762dac632ee714741ea23ef3c">अंश</a> प्रकाशित किये थे। अब     <a href="http://newcommforum.typepad.com/blogzine/2005/02/bloggers_arent_.html">जेरेमी राईट</a> का कहना है कि चिट्ठाकारों का नैतिकता से कतई सरोकार नहीं है। उनका कहना हैः</p>
<blockquote><p>चिट्ठाकार पत्रकारिता के मानकों के बाध्य नहीं हैं, ये मानक भी पिछली सदी में ही बनाए गए मुनाफा बढ़ाने के लिए। चिट्ठाकारों को इस नियमों में बँधने की दरकार नहीं&#8230;लिखे शब्द के सृजक के रूप में हमें अपने पाठकों का विश्वास मिलता है और इसका उल्लंघन महापाप है, चाहे वह कोई चिट्ठाकार हो, पत्रकार, कवि या नाटककार।</p></blockquote>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">ऐसे बुरे हम भी नहीं</h3>
<p>ब्लॉगर नैतिक नहीं यह मानने वालों से भी ज्यादा लोग यह मानते हैं कि युवा वर्ग द्वारा अंर्तजाल पर प्रयोग की जाने वाली ज़बान, जिसे &#8220;नेटस्पीक&#8221; भी कहते हैं, ज्यादा खतरनाक है। शिक्षक, संपादक, माता पिता सभी यह मानते हैं। फिर भी     <a href="http://www.realcities.com/mld/krwashington/11194526.htm">प्रेक्षक मानते हैं</a> कि ब्लॉग &#8220;डायरी लेखन की एक नयी विधा के जन्म का संकेत दे रहें हैं जिसे एक साहित्यिक विधा के रूप में कुछ सालों पहले मृतप्रायः मान लिया गया था।&#8221;</p>
<h1>और चलते चलते&#8230;</h1>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">आस्कर ब्लॉग</h3>
<p>अब जब हर विषय पर ब्लॉगिंग हो रही है तो भला आस्कर अवार्डस क्यों पीछे रहें? 77वें एकाडमी यानि आस्कर अवार्ड्स के बनाने वालों ने भी इस बार अपना     <a href="http://www.oscar.com/oscarnight/blog/blog.html">आधिकारिक ब्लॉग</a> बनाया।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">क्या चिट्ठाकारी एक पूर्णकालीन पेशा बन सकती है?</h3>
<p>कम से कम एक बन्दा तो है जो इसमें विश्वास करता है। पुराने ब्लॉगर     <a href="http://www.kottke.org/05/02/kottke-micropatron">कोटकी</a> ने अपनी नौकरी छोड़कर ब्लॉगिंग को अपना पेशा बना लिया है।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">वर्डप्रेस थीम प्रतियोगिता</h3>
<p>यदि आप डिजाइनर है तो फिर एलेक्स किंग की वर्डप्रेस की     <a href="http://www.alexking.org/software/wordpress/themes/blog/2005/02/27/theme-competition/">थीम प्रतियोगिता</a> में भाग ले सकते है।</p>
<img src="http://www.nirantar.org/?ak_action=api_record_view&id=2220&type=feed" alt="" />]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.nirantar.org/0405-halchal/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>आस्कजीव्स ने निगला ब्लॉगलाईंस को</title>
		<link>http://www.nirantar.org/0305-halchal</link>
		<comments>http://www.nirantar.org/0305-halchal#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 29 Mar 2005 12:04:30 +0000</pubDate>
		<dc:creator>निरंतर पत्रिका दल</dc:creator>
				<category><![CDATA[हलचल]]></category>
		<category><![CDATA[Bloglines]]></category>
		<category><![CDATA[Google]]></category>
		<category><![CDATA[Indibloggies]]></category>
		<category><![CDATA[Yahoo]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://localhost/wp27nirantar/%e0%a4%86%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%97/</guid>
		<description><![CDATA[क्या याहू सिक्स आपार्ट को हथिया लेगा? क्या गूगल अब डोमेन भी बेचेगा? ये और ढेर सारी और खबरें। पढ़िए माह के दौरान घटित ब्लॉगजगत से संबंधित खबरें तड़के के साथ।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">नई उम्मीदें</h3>
<p>टाईम पत्रिका ने ब्लॉगिंग के बढ़ते हुये प्रभाव के बारे में <a href="http://www.time.com/time/personoftheyear/2004/poymoments.html">में लिखा</a> है। हिन्दी ब्लॉगिंग में विविधता बढ़ रही है और हर मिज़ाज के ब्लॉग्स पैदा हो रहे है&#8230;इससे उम्मीद है कि जल्द ही हिन्दी ब्लॉगिंग अपनी शुरूआती दौर से निकलकर एक नये युग में पहुँचेगी।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">आस्कजीव्स द्वारा ब्लॉगलाइन्स का अधिग्रहण</h3>
<p><img src="http://www.nirantar.org/images/stories/0305/askjeeves.jpg" border="0" alt="आस्कजीव्स ने ब्लॉगलाइन्स का अधिग्रहण कर लिया है" hspace="8" vspace="8" width="172" height="124" align="right" />ब्लॉगों की संख्या और ब्लॉग सेवा की जरूरतें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। विभिन्न स्रोतों से जानकारियां प्राप्त करने के लिये &#8216;एग्रीगेटर&#8217; की आवश्यकता होती है ताकि लोगों को जानकारी के लिये भटकना न पड़े। <img src="http://www.nirantar.org/images/stories/0305/plumber.gif" border="0" alt="लोग नौकरियाँ बदलते है, पर ब्लॉगलाईन्स के प्लंबर महाशय के तो मालिक ही बदल गए। अब लोग सिक्स अपार्ट के बार में कयास लगाने लगे हैं।" hspace="8" vspace="8" width="75" height="148" align="left" />ब्लॉगलाइन्स ऐसा ही एक महत्वपूर्ण आनलाईन एग्रीगेटर है। आस्कजीव्स द्वारा ब्लॉगलाइन्स का अधिग्रहण कभी हाँ हाँ और कभी ना ना करते करते आखिरकार आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा हो ही गयी कि आस्कजीव्स ने ब्लॉगलाइन्स का <a href="http://www.ebcvg.com/articles.php?id=589">अधिग्रहण कर लिया</a> है, इससे ब्लॉगलाइन्स को कोई फायदा हो ना हो, लेकिन आस्कजीवस् को भरपूर फायदा होगा, क्योंकि उसे ब्लॉगलाइन्स के अथाह उपभोक्ता जो मिल जायेंगे। अधिग्रहण की कीमत अनुमानित लगभग 250 लाख डालर आंकी गई। सैकड़ों &#8211; हजारों ब्लॉगरों को आशा है कि &#8216;आस्कजीव&#8217; ब्लॉगलाइन्स के मूल स्वरूप में बदलाव नहीं करेंगे। अभी तक देखा गया है कि ब्लॉगर सेवायें बिकने के बाद उपेक्षा का शिकार हो गयीं। सिर्फ गूगल द्धारा ब्लॉगर की खरीद एक अपवाद है जिसकी सेवायें बदस्तूर जारी हैं, सेवाओं में निरंतर सुधार के साथ। पूरा समाचार <a href="http://www.webpronews.com/news/ebusinessnews/wpn-45-20050208ItsOfficialAskJeevesBuysBloglines.html">यहाँ पढिये</a>।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">क्या याहू सिक्स अपार्ट को हथिया लेगा?</h3>
<p>&#8216;ब्लॉगलाइन्स&#8217; की बिक्री के साथ इस बात पर बहस तेज हो गयी कि याहू को एक मात्र मुफ्त ब्लॉग सेवा &#8216;सिक्स अपार्ट&#8217; को खरीद लेना चाहिये। जनवरी में सिक्स अपार्ट ने लाईव जर्नल को <a href="http://www.internetnews.com/bus-news/article.php/3455151">खरीद</a> तकरीबन 55 लाख प्रयोकंताओं का साथ पा लिया। सिक्स अपार्ट अभी तक मुक्त है शायद इसीलिए डेविड जैक्सन ने यह <a href="http://www.internetstockblog.com/2005/01/yahoo_lacks_a_b.html">विवादास्पद भविष्यवाणी</a> की।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">गूगल अब डोमेन रजिस्ट्रेशन के क्षेत्र में भी?</h3>
<p>अपने गूगल भइया, जिनके अगले कदम के बारे में तरह तरह के कयास लगाये जाते है और दुनिया के सारे कम्प्यूटर वाले आंखे गड़ाये उनकी खबरों का इन्तजार करते है, अब डोमेन रजिस्ट्रेशन के क्षेत्र मे भी आने वाले है, इसका मतलब है कि अब जब आप मेराब्लॉग डॉट कॉम जैसा कोई डोमेन खरीदने निकले तो गूगल भइया भी आपको सेवा प्रदान कर सकते है। वैसे तो इस धन्धे मे कोई खास कमाई है नही ऊपर से प्रतिस्पर्धा इतनी कि पूछो मत, लेकिन गूगल के कूदने से तो माल फ्री ही बँटेगा। अब बाकी लोग अपनी दुकान बंद करे या बेचे, उपभोक्ता तो खुश। है ना मजेदार <a href="http://www.ecommercetimes.com/story/ebiz/google-domain-registrar-40250.html">खबर</a>।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">अब एबाउट डाट कॉम भी बिकाऊ</h3>
<p>बेचने खरीदने का सिलसिला जो 2004 मे चालू था वो 2005 मे भी थमता दिखाई नही देता। अब एबाउट डाट काम, इन्टरनेट पर सबसे बड़ी गाइड साइट, जिस पर हर क्षेत्र के बारे मे कुछ ना कुछ जानकारी है, सुना है वो भी बिकाऊ है, खरीददारों की दौड़ मे याहू चाचा, गूगल भईया और अपने आस्कजीव्स वाले भी <a href="http://www.thewhir.com/find/articlecentral/story.asp?recordid=1160">दौड़ लगा रहे</a> है।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">ब्लॉग दिस</h3>
<p>एम.एस.एन.बी.सी डॉट काम, जो कि इंटरनेट पर सूचना तथा पत्रकारिता के लिये सेवायें प्रदान करती है, ने बेहतर संचार के लिये <a href="http://www.econtentmag.com/Articles/ArticleReader.aspx?ArticleID=7605">&#8216;ब्लॉग दिस&#8217;</a> नामक सुविधा प्रदान की है। इसके जरिये एम.एस.एन.बी.सी.काम के लिये सूचना प्रदान करने हेतु &#8216;ब्लॉग&#8217; तथा समाचार तत्परता से लिखे जा सकते हैं।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">कमेंट स्पैम को धता बताएगी &#8220;नो फोलो&#8221;</h3>
<p>प्रमुख सर्च इंजन कंपनियों एम.एस.एन, याहू, गूगल तथा ब्लॉग के लिये सुविधा प्रदान करने वाली कंपनी सिक्स अपार्ट ने &#8216;कमेंट स्पैम&#8217; रोकने के लिये कमर कस ली है। अधिकतर ब्लॉगर अपने ब्लॉग में टिप्पणी की सुविधा प्रदान करते हैं। यह &#8216;स्पैमर&#8217; के लिये सुविधा देता है कि वे टिप्पणी की जगह दूसरी कड़ियां डाल दे। &#8216;नोफॉलो&#8217; नामक यह सुविधा ब्लॉग में प्रदान की जायेगी ताकि स्पैम की समस्या खतम हो सके। जब नोफॉलो की HTML टैग स्पैमग्रसित कड़ी के अंत में जोड़ दिया जावेगा तो यह खोज ईंजिनों के लिए संकेत होगा कि इस कड़ी की परवाह न करें, उद्देश्य यह है कि कड़ी जबरिया पोस्ट करने का स्पैमर को लाभ न मिले। यह टैग ब्लॉगिंग के औज़ार खुद ही जोड़ देंगे। <a href="http://blog.searchenginewatch.com/blog/050118-204728">इस लेख</a> में और विस्तार से जानकारी दी गई है।</p>
<div id="boxR">
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">गूगल को गुस्सा कब आता है?</h3>
<p>बहुत से लोग ब्लॉग को अपनी दिल की भड़ास निकालने का साधन मानते हैं। <a href="http://99zeros.blogspot.com/">मार्क जेन</a> ने भी कुछ ऐसा ही किया। गूगल में नौकरी करते थे। उसकी कुछ नीतियों की आलोचना कर बैठे अपने ब्लॉग में। <a href="http://news.com.com/Google+blogger+I+was+terminated/2100-1038_3-5572936.html">निकाल दिये गये</a> कान पकड़ के बाहर, बाद की सफाइयां काम नहीं आई। अगर मार्क जेन महाभारत कथा (समय पाकर राजा की स्तुति करनी चाहिये) पर अमल करते तो शायद अभी वे गूगल में रहते &#8212; अनाम, अन्जान, किसी एक आंकड़े की तरह। ये घटनायें अब आम होने लगी हैं, हाल ही अमरीका में डेल्टा एयरलाईन्स की एक विमान परिचारिका को अपने ब्लॉग में कार्यालयीन गणवेश में खींचे चित्र छापने पर <a href="http://news.com.com/I+was+fired+for+blogging/2010-1030_3-5490836.html?tag=nl">निकाल बाहर</a> किया गया था।</div>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">&#8220;कटपेस्ट&#8221; सुल्तान</h3>
<p><a href="http://indiauncut.blogspot.com/">इंडिया अनकट</a> के अमित वर्मा ने <a href="http://www.rohitpinto.com/">रोहित पिंटो</a> द्वारा साहित्यिक चोरी का मामला बड़े जोर शोर उछाला। <a href="http://www.pnarula.com/akshargram-com/nirantar/">एक चिट्ठे</a> की टिप्पणी में <a href="http://muselog.net/">कुमारगुरु</a> ने चिट्ठों कि चोरी की अलावा रोहित कि और हरकतों का भी <a href="http://www.pnarula.com/akshargram-com/nirantar/">खुलासा किया</a>। खैर, कई पहचाने चिट्ठाकारों के लगातार दबाव से इतनी बात बनी कि रोहित ने अंततः माफी मांग ली और चिट्ठे हटा लिए। तब शायद अमित को लगा कि सही होते हुये भी कुछ ज्यादा ही उत्साह दिखाया गया, रोहित पिंटो को घेरने में। बहरहाल, मामले का पटाक्षेप हो गया है और रोहित का जालस्थल अब भारतीय ब्लॉजगत की सुर्खियाँ पेश करके शायद पश्चाताप कर रहा है।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">प्रद्युम्न की दूसरी पारी</h3>
<p>समाचार माध्यमों पर कड़ी नज़र रखने वाले प्रद्युम्न माहेश्वरी का गत वर्ष बंद हुआ चिट्ठा &#8220;<a href="http://mediaah.blogspot.com/2005/01/why-is-mediaah-back.html">मीडियाह</a>&#8221; अपने तीखे तेवर के साथ पुनः प्रारंभ किया गया है, आशा है इस बार की पारी लंबी होगी।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">इंडीब्लॉगीज़ 2004 संपन्न</h3>
<p><img title="Indibloggies" src="http://www.myjavaserver.com/%7Eindibloggies/banners/banner1.gif" border="0" alt="Indibloggies" hspace="8" vspace="8" align="right" />भारतीय लेखकों द्वारा रचित चिट्ठों पर केंद्रित ब्लॉगीज़ का भारतीय संस्करण अपने दूसरे साल में ज्यादा पहचाना गया पर नई पद्धति के अंर्तगत गठित 12 सदस्यीय ज्यूरी के चयन और चिट्ठों के चुनाव पर कुछ आपत्तियां भी उठीं। उल्लेखनीय रूप से इस बार कई चिट्ठाकार और संस्थान पुरस्कार प्रायोजन के माध्यम से इस आयोजन आ कर जुड़े जिनमें ब्लॉगस्ट्रीट, फीडडेमन, ब्लॉगजेट, माइक्रोसॉफ्ट शामिल थे। यह बात भी उल्लेखनीय है कि भारतीय भाषाओं की सहभागिता भी पिछले वर्ष की तुलना में आशातीत रही। इस आयोजन का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार यानि कि सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग का पुरस्कार मिला <a href="http://www.nirantar.org/0305/samvaad">अतानु दे</a> के चिट्ठे <strong>दीशा</strong> को। अधिक जानकारी <a href="http://indibloggies.org/indibloggies2004">यहाँ है</a>।</p>
<p class=note>समाचार संकलन व अनुवादः</strong> रमन बी, जीतेन्द्र, अतुल, देबाशीष तथा अनूप</p>
<img src="http://www.nirantar.org/?ak_action=api_record_view&id=2219&type=feed" alt="" />]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.nirantar.org/0305-halchal/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
	</channel>
</rss>

