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	<title>निरंतर -हिन्दी ब्लॉगज़ीन &#124; Nirantar - Hindi Blogzine &#187; टैक दीर्घा</title>
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	<description>Nirantar - World&#039;s first Hindi Blogzine</description>
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		<title>मोबाइल फ़ोन तेरे कितने रूप?</title>
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		<pubDate>Tue, 29 May 2007 09:54:34 +0000</pubDate>
		<dc:creator>रविशंकर श्रीवास्तव</dc:creator>
				<category><![CDATA[टैक दीर्घा]]></category>
		<category><![CDATA[Banking]]></category>
		<category><![CDATA[Mobile]]></category>
		<category><![CDATA[SMS]]></category>

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		<description><![CDATA[मोबाइल फ़ोन डिजिटल कैमरा, एमपी3 प्लेयर, एफ़एम रेडियो के पर्याय तो थे ही। अब आप इसका इस्तेमाल क्रेडिट कार्ड के विकल्प के रूप में भी कर सकते हैं।<strong> रवि रतलामी</strong> बता रहे हैं&#160; दो इसी तरह की सेवाओं के बारे में,&#160; पहला एसएमएस आधारित <strong>पे-मेट </strong>तथा दूसरा मोबाइल एप्लीकेशन आधारित <strong>एम-चेक</strong>।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div class="dropCap">मो</div>
<p>बाइल फ़ोन का इस्तेमाल अब महज फोन करने के लिए तो नहीं रह गया है। एकदम प्रारंभिक स्तरों के सेलफ़ोनों में भी अंतर्निर्मति कैमरा, एमपी3 प्लेयर, एफ़एम रेडियो इत्यादि की सुविधाएँ तो मिल ही रही हैं, उच्च स्तर के मोबाइल फ़ोन तो संपूर्ण इंटरनेट इनेबल्ड, मल्टीमीडिया कम्प्यूटरों से कम नहीं हैं जिनमें आप अपने ऑफिस के भी तमाम काम निपटा सकते हैं। मोबाइल फ़ोन में हाल ही में एक और विशेषता जोड़ी गई है &#8211; आप इसका इस्तेमाल क्रेडिट कार्ड के विकल्प के रूप में बखूबी, आसानी से और ज्यादा सुरक्षित तरीके से कर सकते हैं।</p>
<p>क्रेडिट कार्ड के जरिए इंटरनेट पर सौदे हमेशा ही खतरे में बने रहते थे। तमाम तरह के ट्रोजन व की-लॉगर्स, फ़िशिंग साइटें हर साल ग्राहकों व क्रेडिट कार्ड कम्पनियों को करोड़ों का चूना लगाती रही हैं, और इनमें साल-दर-साल वृद्धि होती रही है। अब इन सौदों को मोबाइल फ़ोन के जरिए एक अतिरिक्त द्वितीय स्तरीय प्रमाणीकरण की व्यवस्था की जाकर सुरक्षा को और पुख्ता बनाए जाने की कोशिशें की जा रही हैं। वर्तमान में इस हेतु दो तरह की तकनीक काम में लाई जा रही है &#8211; एक तो एसएमएस आधारित तकनीक पे-मेट तथा दूसरी मोबाइल एप्लीकेशन आधारित तकनीक एम-चेक।</p>
<hr />
<h1>पे मेट: SMS से सुरक्षित खरीदारी</h1>
<p><a href="http://www.paymate.co.in" target="_blank"><img title="PayMate" src="http://www.nirantar.org/images/stories/0207/pay-mate.jpg" border="0" alt="PayMate" hspace="5" vspace="5" width="350" height="229" align="right" /></a> <a href="http://www.paymate.co.in" target="_blank">पे-मेट</a> एसएमएस आधारित सेवा है जो आपके मोबाइल फ़ोन को एक अत्यंत सुरक्षित क्रेडिट कार्ड के रूप में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है। हालांकि अभी इसके द्वारा दी जा रही <a href="http://www.paymate.co.in/merchants.asp" target="_blank">सेवाओं की संख्या</a> कम है, परंतु भविष्य में इसके व ऐसे ही अन्य सेवाओं के आने की पूरी संभावना है। पे-मेट का इस्तेमाल आसान है। यदि आपके पास सिटीबैंक का क्रेडिट कार्ड है तो 2484 पर एसएमएस संदेश &#8211; PayMate भेजें। आपको कॉलबैक किया जाएगा व आपके मोबाइल को पंजीकृत कर लिया जाएगा। जब आप पे-मेट के साथ सक्रिय व्यापारिक संस्थान से कोई खऱीदारी करते हैं तो आपको भुगतान हेतु वह संस्था आपको एक रेंडम जनरेटेड अल्फ़ा कोड के साथ आपके मोबाइल पर एक एसएमएस संदेश भेजती है। आपको उस संदेश को अपने पिन संख्या (गुप्त पासवर्ड) के साथ जवाब देना होता है। बस। और इस तरह सुरक्षित भुगतान हो जाता है। चूंकि यह सारा कार्य स्वचालित कमप्यूटरों द्वारा होता है और आपके संदेशों को कोई जीवित व्यक्ति नहीं पढ़ता और यह आपके पंजीकृत मोबाइल फ़ोन के जरिए ही होता है अतः यह अत्यंत सुरक्षित होता है।</p>
<p>भले ही पे-मेट के जरिए भुगतान को सुरक्षित माना गया है फिर भी आप इसके जरिए प्रति सौदे पाँच हजार रुपए तथा प्रति चौबीस घंटे में दस हजार रुपए से अधिक का भुगतान नहीं कर सकते। अतः यह सेवा अभी सिर्फ छोटे मोटे सौदों के लिए ही है और इसी वजह से इसके लोकप्रिय होने में समय लगेगा।</p>
<hr />
<h1>एम-चेक: मोबाइल बना क्रेडिट कार्ड</h1>
<p><a href="http://www.mchek.com" target="_blank"><img title="MChek" src="http://www.nirantar.org/images/stories/0207/mchek.jpg" border="0" alt="MChek" hspace="5" vspace="5" width="350" height="211" align="right" /></a> <a href="http://www.mchek.com" target="_blank"> एम-चेक</a> आपके क्रेडिट कार्ड के अस्तित्व को खत्म करने की संभावनाएँ लेकर आया है। परंतु यह उन्हीं उच्च वर्ग के मोबाइल फ़ोनों में काम में आ सकेगा जिसमें अतिरिक्त मोबाइल एप्लीकेशन संस्थापित करने की सुविधा होगी। अगर एम-चेक जैसी सेवाएँ लोकप्रिय होंगी तो बहुत संभव है कि भविष्य में मोबाइल फ़ोन ऐसे अनुप्रयोगों के साथ ही जारी हों। हालाकि यह भी आपके इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन में द्वितीय स्तरीय सुरक्षा प्रदान करता है, परंतु फिर भी, मोबाइल वायरस भी इस मोबाइल एप्लीकेशन को निशाना बना सकते हैं, और सुरक्षा में सेंध लगा सकते हैं।</p>
<p>एम-चेक का इस्तेमाल भी बहुत आसान है। आपको अपने मोबाइल फ़ोन को एम-चेक के लिए अपने बैंकर से पंजीकृत करवाना होगा और अपने मोबाइल में एम-चेक अनुप्रयोग संस्थापित करना होगा। फिर जहाँ भी आप ऑनलाइन खरीदारी करते हैं, या व्यावसायिक संस्थान में खरीदारी करते हैं, वहाँ क्रेडिट कार्ड से भुगतान के लिए नंबर के स्थान पर आपके मोबाइल के एम-चेक अनुप्रयोग द्वारा रेंडम जनित पास कोड को डालना होगा। बस। चूंकि आपके मोबाइल में संस्थापित एम-चेक अनुप्रयोग हर बार नया पास कोड देता है, अतः यह कोड सिर्फ एक ही सौदे के लिए काम में आता है, और इस तरह से क्रेडिट कार्ड नंबर चुरा कर धोखा करने वालों के मंसूबे नाकाम कर देता है। अच्छी बात यह है कि इसके प्रयोग के लिये आपको कोई अनुप्रयोग डाउनलोड नहीँ करना होता और न ही सिम में कोई परिवर्तन लगता है</p>
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		<title>टेरापैड: ब्लॉगिंग से आगे की सोच?</title>
		<link>http://www.nirantar.org/0207-tech-deergha-terrapad</link>
		<comments>http://www.nirantar.org/0207-tech-deergha-terrapad#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 29 May 2007 09:43:36 +0000</pubDate>
		<dc:creator>रविशंकर श्रीवास्तव</dc:creator>
				<category><![CDATA[टैक दीर्घा]]></category>
		<category><![CDATA[Blog]]></category>
		<category><![CDATA[Blogging]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://localhost/wp27nirantar/0507tech-deerghaterrapad/</guid>
		<description><![CDATA[<strong>टेरापैड</strong> कुछ ऐसी सेवाओं व विशेषताओं को आपके लिए लेकर आया है जो आपकी पारंपरिक चिट्ठाकारी की दशा व दिशा को बदल सकता है। जानिये <strong>रविशंकर श्रीवास्तव</strong> क्या कहते हैं इस नये ब्लॉग प्लैटफॉर्म के बारे में।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>शायद नहीं। या शायद हाँ। चिट्ठाकारों के लिए अब बहुत से अच्छे विकल्प उपलब्ध हैं और इनमें नित्य प्रति इजाफ़ा होता जा रहा है। एक नया,  आल-इन-वन किस्म का ब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म &#8211; टेरापैड जारी किया गया है जो कि न सिर्फ मुफ़्त है (यदि आप विज्ञापनों से नहीं चिढ़ते हैं तो, चूंकि इसकी मुफ़्त सेवा विज्ञापन समर्थित है), ढेरों अन्य सुविधाओं से भी लेस है।</p>
<p><a href="http://www.terapad.com" target="_blank"><img title="Terapad" src="http://www.nirantar.org/images/stories/0207/terapad.jpg" border="0" alt="Terapad" hspace="6" vspace="5" width="350" height="235" align="right" /> टेरापैड</a> कुछ ऐसी सेवाओं व विशेषताओं को आपके लिए लेकर आया है जो आपकी पारंपरिक चिट्ठाकारी की दशा व दिशा को बदल सकता है। यदि आप टेरापैड के जरिए अपना चिट्ठा लिखने की सोच रहे हैं तो आपको प्रमुखतः इसमें निम्न अतिरिक्त सुविधाएँ मिलेंगी जो अन्य ब्लॉग प्लेटफ़ॉर्म में अनुपलब्ध हैं:</p>
<ul>
<li>पेपॉल रेडी शॉप &#8211; इसका अर्थ है, आप अपने ब्लॉग को ई-बे जैसा शॉपिंग माल मिनटों में बना सकते हैं।</li>
<li>पूरा सीएसएस नियंत्रण &#8211; माने कि बोरिंग ब्लॉगर व सीमित वर्डप्रेस टैम्प्लेटों से पूरा छुटकारा। आप अपने ब्लॉग को मनचाहा रूपाकार दे सकते हैं।</li>
<li>प्रोब्लागिंग औजार- (ये क्या है भई? हमें भी नहीं पता)</li>
<li>WTSIWYG संपादन सुविधा &#8211; यह तो सभी में है, परंतु इसमें यह उन्नत किस्म का है।</li>
<li>सामग्री प्रबंधन &#8211; आप अपने चिट्ठा पोस्टों के अतिरिक्त भी अन्य सामग्री डाल सकते हैं।</li>
<li>समाचार व आरएसएस फ़ीड जोड़ सकते हैं (यह कोई नई सुविधा नहीं है)</li>
<li>इमेज गैलरी</li>
<li>पाठकों की आवाजाही पर निगाह &#8211; (यह तो सबसे जरूरी वस्तु है)</li>
<li>परिचर्चा फोरम (वाह! क्या बात है)</li>
<li>नौकरी तथा कर्मकुण्डली खोज- बेरोजगारों के लिए बढ़िया है।</li>
<li>कैलेण्डर</li>
<li>मुफ़्त मासिक 10 गीबा बैंडविड्थ  /  तथा कुल 2 गीबा डाटा</li>
</ul>
<p>चलिए अब कुछ खामियों की बातें भी करें। वैसे तो कुछेक ही हैं, पर हैं तो :</p>
<p>एक ही स्थल पर बहुत सी चीजें एक आम चिट्ठाकार के लिए अनावश्यक ही होंगी। इसका इंटरफ़ेस अनावश्यक रूप से अव्यवस्थित है और सारा मामला घालमेल प्रतीत होता है। इसका यूजर इंटरफेस छोटे-छोटे कार्यों के लिए अवांछित नेविगेशन मांगता है जो खीझ भरा हो जाता है। उदाहरण के लिए, आपको नया ब्लॉग पोस्ट बनाने के लिए कड़ी तब तक दिखाई नहीं देती जब तक कि आप कोई श्रेणी बना कर उसे क्लिक नहीं करते! कौन नया चिट्ठाकार इसे समझ सकेगा भला?</p>
<p>एक नया व्यापारिक जोखिम जिसे गूगल खरीद लेगा? बहुत संभव है, परंतु फिर इसके उपयोक्ता आधार को करोड़ों में भी तो पहुँचना चाहिए। संभावना तो कम ही नजर आती है!</p>
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		</item>
		<item>
		<title>जादुई तकनीक का वामनावतारः आईफ़ोन</title>
		<link>http://www.nirantar.org/1206-tech-deergha-iphone</link>
		<comments>http://www.nirantar.org/1206-tech-deergha-iphone#comments</comments>
		<pubDate>Fri, 09 Feb 2007 07:58:11 +0000</pubDate>
		<dc:creator>देबाशीष चक्रवर्ती</dc:creator>
				<category><![CDATA[टैक दीर्घा]]></category>
		<category><![CDATA[Apple]]></category>
		<category><![CDATA[IPhone]]></category>
		<category><![CDATA[subLead]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://localhost/wp27nirantar/1206tech-deerghaiphone/</guid>
		<description><![CDATA[जनवरी में एप्पल ने कैमरा फ़ोन, पीडीए, मल्टीमीडिया प्लेयर व बेतार संचार प्रणाली से लैस <strong>आईफ़ोन</strong> के आगमन का शंखनाद किया। नये स्तंभ टेक दीर्घा में <strong>ईस्वामी</strong> जानकारी दे रहे हैं इस इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की जिसकी &#34;एक क्रांतिकारी और जादुई उत्पाद&#34; के रूप में हर तरफ चर्चा है।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<table style="margin: 5px" border="0" cellspacing="5" cellpadding="5" width="275" align="left">
<tbody>
<tr>
<td><img title="IPhone" src="http://www.nirantar.org/images/stories/1206/iphone.gif" border="0" alt="IPhone" hspace="0" vspace="0" width="270" height="336" align="left" /></td>
</tr>
<tr style="margin: 5px; padding: 5px" bgcolor="#e6e6e6">
<td>
<table border="0" cellspacing="4" cellpadding="4" width="100%" align="center">
<tbody>
<tr>
<td>
<h1>गिला शिकवा भी कम नहीं</h1>
<p>आईफ़ोन की हर कोई वाह वाह कर रहा हो ऐसा नहीं है। आईये कुछ नकारात्मक बातों का भी जायजा लें।</p>
<ul style="padding-left: 0px; list-style-type: none; list-style-image: none; list-style-position: outside">
<li style="border-bottom: 2px solid #ffffff; padding: 4px">आईफ़ोन पर कई लोकप्रिय व्यावसायिक अनुप्रयोग नहीं चलाए जा सकते &#8211; अत: व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का इस उपकरण को अपने वेतनभोगियों को पीडीए या स्मार्ट फ़ोन के स्थान पर उपलब्ध करवाने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। जो लोग पहले से ऐसे उपकरण प्रयोग में ला रहे हैं &#8211; वे दो उपकरण भला क्यों रखने लगे!</li>
<li style="border-bottom: 2px solid #ffffff; padding: 4px">क्या? मात्र 2 मेगापिक्सेल का कैमरा?</li>
<li style="border-bottom: 2px solid #ffffff; padding: 4px">बैटरी को निकाला नहीं जा सकता &#8211; अर्थात बैक-अप बैटरी ले कर चलने की सुविधा नहीं होगी।</li>
<li style="border-bottom: 2px solid #ffffff; padding: 4px">3जी के बजाय EDGE तकनीक का प्रयोग।</li>
<li style="border-bottom: 2px solid #ffffff; padding: 4px">जीपीएस सुविधा अनुपलब्ध है।</li>
<li style="border-bottom: 2px solid #ffffff; padding: 4px">कुछ लोगों का पूछना है की ऊंगलियों के निशान से गंदी हुई स्क्रीन पर कुछ देखना क्या जमेगा?</li>
<li style="border-bottom: 2px solid #ffffff; padding: 4px">कई लोग आई-ट्यून्स नामक अनुप्रयोग को ही पसंद नहीं करते जिसकी मदद से आईफ़ोन कई सूचनाओं का आयात-निर्यात करेगा।</li>
<li style="border-bottom: 2px solid #ffffff; padding: 4px">499 डॉलर का मूल्य कई प्रयोगकर्ताओं को अधिक लग रहा है &#8211; खास तौर पर यदि सिंग्यूलर की बेतार सेवाओं के लिये एक या दो वर्षों का करार करना पड़े।</li>
<li style="border-bottom: 2px solid #ffffff; padding: 4px">आई-पॉड पर उपलब्ध गेम्स आईफ़ोन में अनुपलब्ध है।</li>
<li style="border-bottom: 2px solid #ffffff; padding: 4px">बाहरी अनुप्रयोग चलाने की सुविधा नहीं है।</li>
<li style="border-bottom: 2px solid #ffffff; padding: 4px">सिंग्युलर के अलावा किसी और कंपनी के सिम कार्ड प्रयोग करने की सुविधा नहीं है।</li>
<li style="padding: 4px 4px 0px">किसी भी प्रकार से स्टोरेज कैपेसिटी बढ़ाने की सुविधा नहीं है।</li>
</ul>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<div class="dropCap">ज</div>
<p>नवरी 2007 में आईफ़ोन का प्रदर्शन करते हुए एप्पल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीव जॉब्स नें इसका परिचय &#8220;एक क्रांतिकारी और जादुई उत्पाद&#8221; कह कर दिया। स्टीव आईफ़ोन की विशेषताओं से परिचित करवाते जाते और उपस्थित जनसमूह हर्ष और करतल ध्वनियों से अपना अनुमोदन और उत्साह दर्शाते जाते। ढाई साल की तैयारी से बने इस उत्पाद में लगी तकनीकों को अधिकृत रखने के लिए एप्पल ने 200 अलग अलग पेटेंट की अर्जी दी है।</p>
<div id="pullQuoteR">आईफ़ोन कितना ही नन्हा क्यों न हो कोई खिलौना नहीं है, यह एक शक्तिशाली उपकरण है!</div>
<p>आईफ़ोन एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो कैमरा फ़ोन, पीडीए (पर्सनल डिजिटल असिस्टैंट), मल्टीमीडिया प्लेयर और बेतार संचार प्रणाली से लैस है। आईफ़ोन के माध्यम से चलित दूरभाषण, ई-मेल, लिखित संदेश आदि सूचना सेवाएं बेतार उपलब्ध होंगी।</p>
<p>एप्पल के उत्पाद अपनी सुंदरता, परिष्कृत डिज़ाईन और आसान अंतराफ़लकों के लिए जाने जाते हैं। एप्पल ने अपने मैक कंप्यूटरों में प्रयुक्त शक्तिशाली X 10 आपरेटिंग सिस्टम और सफ़ारी ब्राऊज़र से इस मात्र 4.5 X 2.4 X 0.46 इंच के हस्तधारित आईफ़ोन को सुसज्जित कर के सिद्ध कर दिया है की वे इसके अनुप्रयोगों के प्रति कितने गंभीर हैं।</p>
<p>आईफ़ोन कितना ही नन्हा क्यों न हो कोई खिलौना नहीं है, यह एक शक्तिशाली उपकरण है! आईफ़ोन के प्रति उपभोक्ताओं के उत्साह का अंदाज़ा इस बात से ही लग जाता है की प्रदर्शन के एक हफ़्ते के भीतर कंप्यूटर प्रोग्रामर्स ने वर्तमान में उपलब्ध विंडोज़ आधारित स्मार्ट-फ़ोन उपकरणों के लिये आईफ़ोन के जैसी दिखने वाली आवरण बना कर इन्टरनेट पर उपलब्ध करवा दिए, जिन्हें हटाने के लिए अपने कॉपीराईट के प्रति सजग एप्पल के वकीलों ने उन्हें चेताया।</p>
<div id="pullQuoteR">आईफ़ोन जून में अमरीकी बाज़ार में 499 अमरीकी डॉलर की कीमत में उपलब्ध होगा।</div>
<p>आईफ़ोन की सबसे बडी विशेषता क्या है? इस उपकरण पर मात्र एक बटन है और पूरा उपकरण एक 3.5 इंच के पतले एलसीडी पर्दे सा दिखता है। आईफ़ोन पर उपलब्ध हर सुविधा का प्रयोग ऊंगलियों के माध्यम से इसके टच स्क्रीन को छू कर अलग अलग अनुप्रयोगों को चला कर किया जाता है। जो काम किसी पीसी पर माऊस करता है वही काम यहां तर्जनी करती है!</p>
<p>उपकरण पर तीन संवेदी अवयव लगे हैं जो हाथ की दूरी, उसका इशारा और प्रकाश की तीव्रता को समझने का काम करते हैं। उपकरण इतना समझदार है की प्रयोगकर्ता स्क्रीन पर जिस तेज़ी से उंगली को उपर से नीचे की तरफ़ चलाता है स्क्रीन पर डाटा भी उतना ही तेज़ स्क्रॉल होता है। तर्जनी और अंगूठे को आपस में एक दूसरे से सटा कर स्क्रीन पर रखने के बाद यदि उनके बीच की दूरी बढाई जाए तो स्क्रीन पर खुले चित्र का आकार ज़ूम यानि बढने लगता है या, दूरी कम करने पर चित्र का आकार घटने लगता है।</p>
<p>आईफ़ोन के पिछली तरफ 2 जीबी के कैमरे का लेंस है। निचली और माईक और स्पीकर सहित बैटरी चार्ज करने और कंप्यूटर से सूचना के आयात-निर्यात करने का जैक है। उपर हैडफ़ोन का जैक है। आईफ़ोन ब्लूटूथ तकनीक से सुसज्जित है अत: इसके साथ बेतार हैडफ़ोन का प्रयोग किया जा सकता है। इसके अलावा ये क्वॉड-बैंड जीएसएम, 802.11 बी/जी और वाई-फ़ाई तकनीक से भी लैस है।</p>
<p>आईफ़ोन को खड़ा या आड़ा पकड़ कर काम में लाया जा सकता है &#8211; स्क्रीन पर दृश्य अपने आप हमेशा सीधा ही दिखेगा। 160 पिक्सेल प्रति इंच दिखाने वाले स्क्रीन पर 320 X 480 पिक्सेल दृश्य होंगे, 4 जीबी या 8 जीबी के डाटा संग्रहण के विकल्प होंगे अत: समूची फ़ीचर फ़िल्में और हज़ारों गानें इस पर सहेजे और देखे सुने जा सकते हैं।</p>
<p>एप्पल ने सिंग्यूलर, गूगल तथा याहू जैसी कंपनियों से भागीदारी कर गूगल मैप्स, याहू पुश मेल और अन्य कई विश्वस्तरीय जुगतों को भी मुहैया कराया है।</p>
<p style="text-align: center;"><img class="aligncenter" style="border: 0pt none; margin-top: 5px; margin-bottom: 5px;" src="http://www.nirantar.org/images/stories/1206/story-big-iphone.jpg" border="0" alt="openid" vspace="5" width="500" height="250" align="middle" /></p>
<p>आईफ़ोन जून में अमरीकी बाज़ार में उतारा जाएगा &#8211; जिसका करपूर्व न्यूनतम खुदरा मूल्य 499 अमरीकी डॉलर होगा। 8 गीगाबाईट वाले आईफ़ोन की कीमत मात्र 499 डॉलर होगी।</p>
<img src="http://www.nirantar.org/?ak_action=api_record_view&id=2200&type=feed" alt="" />]]></content:encoded>
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		</item>
		<item>
		<title>विकिलीक्स बतायेगा पर्दे के पीछे का सच</title>
		<link>http://www.nirantar.org/1206-tech-deergha-wikileaks</link>
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		<pubDate>Fri, 09 Feb 2007 07:51:07 +0000</pubDate>
		<dc:creator>देबाशीष चक्रवर्ती</dc:creator>
				<category><![CDATA[टैक दीर्घा]]></category>
		<category><![CDATA[Classified]]></category>
		<category><![CDATA[subLead]]></category>
		<category><![CDATA[Wikileaks]]></category>
		<category><![CDATA[Wikipedia]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://localhost/wp27nirantar/1206tech-deerghawikileaks/</guid>
		<description><![CDATA[नये स्तंभ <strong>टेक दीर्घा</strong> में <strong> रवि रतलामी</strong> बता रहे हैं विकिपीडिया की तर्ज पर प्रारंभ, पर उससे काफी अलाहदा, एक नये और अनोखे प्रकल्प <strong>विकिलीक्स</strong> के बारे में।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>तमाम विश्व के हर क्षेत्र के स्वयंसेवी सम्पादकों के बल पर मात्र कुछ ही वर्षों में विकिपीडिया आज कहीं पर भी, किसी भी फ़ॉर्मेट में उपलब्ध एनसाइक्लोपीडिया में सबसे बड़ा, सबसे वृहद एनसाइक्लोपीडिया बन चुका है। कुछेक गिनती के उदाहरणों को छोड़ दें तो इसकी सामग्री की वैधता पर कहीं कोई प्रश्नचिह्न नहीं लगा। इसी की तर्ज पर एक नया प्रकल्प प्रारंभ किया जाने वाला है <a href="http://www.wikileaks.org" target="_blank">विकिलीक्स</a> ।</p>
<div id="pullQuoteR">विकिलीक्स में हर किस्म के, बिना सेंसर किए, ऐसे गोपनीय दस्तावेज़ शामिल किये जा सकेंगे जिन्हें सरकारें और संगठन अपने फ़ायदे के लिए आम जन की पहुँच से दूर रखती है।</div>
<p><img class="alignleft" style="border: 0pt none; margin: 3px 8px;" title="Wikileaks" src="http://www.nirantar.org/images/stories/1206/wikileaks.gif" border="0" alt="Wikileaks" hspace="8" vspace="3" width="110" height="246" align="left" />विकिलीक्स तकनीक में तो भले ही <a href="http://www.wikipedia.org" target="_blank">विकिपीडिया</a> के समान है &#8211; विकि आधारित तंत्र पर कोई भी उपयोक्ता इसमें अपनी सामग्री डाल सकेगा, परंतु इसकी सामग्री पूरी तरह अलग किस्म की होगी। इसमें हर किस्म के, बिना सेंसर किए, ऐसे गोपनीय दस्तावेज़ शामिल किये जा सकेंगे जिन्हें सरकारें और संगठन अपने फ़ायदे के लिए आम जन की पहुँच से दूर रखती हैं। यही विकिलीक्स का मूल सिद्धान्त है।</p>
<p>विकिलीक्स में कोई भी उपयोक्ता ऐसे दस्तावेज़ों को मुहैया करवा सकता है। विकिपीडिया के विपरीत जहाँ उपयोक्ताओं के आईपी पते दर्ज किए जाते हैं, विकिलीक्स में क्रिप्टोग्रॉफ़िक तकनॉलाजी के जरिए इसके उपयोक्ताओं के पूरी तरह अनाम व अचिह्नित बने रहने की पूरी गारंटी दी जा रही है। जाहिर है, बहुत से दस्तावेज़ जिन्हें आम जनता तक पहुँचना चाहिए, परंतु गोपनीयता कानूनों, दंड और कानूनी कार्यवाही के भय से दबे और छुपे रह जाते हैं निश्चित रूप से आम पाठक तक प्रचुरता में पहुंचेंगे।</p>
<p>विकिलीक्स को अभी आम जन के लिए प्रारंभ नहीं किया गया है, मगर इसकी भावी लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि सिर्फ इसकी सूचना मात्र से ही इसे 12 लाख गोपनीय दस्तावेज़ विभिन्न स्रोतों से उपलब्ध कराए जा चुके हैं।</p>
<p>ऐसी आशंका भी निर्मूल नहीं कि विकिलीक्स का इस्तेमाल ग़लत कार्यों के लिए भी हो सकता है। राजनीतिक दल, संगठन व व्यक्ति एक दूसरे की पोल खोलने व ब्लेकमेल करने के अस्त्र के रूप में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। गोपनीय दस्तावेज़ों की असलियत पर प्रश्न चिह्न भी बना रहेगा। पर सचाई यह है विकिपीडिया की विश्वसनीयता पर भी शुरूआती दिनों में प्रश्नचिह्न लगाए जाते रहे थे। गोपनीय दस्तावेज़ों के विकिलीक्स पर उपलब्ध होते ही इसकी सत्यता तथा इसकी आलोचना-प्रत्यालोचना संगठनों व सरकारों द्वारा तो की ही जा सकेगी, मतभिन्नता रखने वाले विभिन्न समूहों द्वारा भी इनका विश्लेषण खुलेआम किया जा सकेगा ऐसे में इस तरह के प्रयोग की बातें बेमानी ही होंगी &#8211; ऐसा विकिलीक्स का मानना है।</p>
<p>विकिलीक्स का शुभारंभ फरवरी या मार्च 2007 को प्रस्तावित है। देखते हैं इंटरनेट पर सैद्धांतिक अवज्ञा की यह गांधीगिरी क्या गुल खिलाती है!</p>
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