जन्म: 14 जून 1962 को बांडीपुर, कश्मीर में। शिक्षा: कश्मीर विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक। जॉन्स हॉफ्किन्स यूनिवर्सिटी, बाल्टीमोर में स्नातकोत्तर छात्र।
इंटरनेट पर हिंदी का प्रयोग बढ़ाने के प्रयत्नों में कार्यशील। हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेज़ी और मातृभाषा कश्मीरी में चिठ्ठाकारी करते हैं। अपने हिन्दी चिट्ठे इधर उधर की पर विविध विषयों पर लिखते रहते हैं। हिंदी संबंधित विभिन्न चर्चा–समूहों, टीम–ब्लॉग, विकी और बुनो–कहानी जैसे प्रकल्पों में सक्रिय। यूनीनागरी नामक इनके बनाये हिन्दी आनलाईन टाईपराईटर से जाल पर अनेकों ने हिन्दी लिखना सीखा है व सीख रहे हैं। संप्रति मेरीलैंड, अमरीका में रेलवे उपकरण अभिकल्प इंजीनियर।
दीना मुम्बई स्थित गुणात्मक शोध परामर्शदाता हैं। उन्हें 16 वर्ष का कार्यानुभव है। सामाजिक मीडीया और तकनलाजी में उनका शोध तब प्रारंभ हुआ जब 2003 में उन्होंने अपने ब्लॉग कि स्थापना की। एक शोधकर्ता और खोजी के रूप में दीना की सामाजिक तंत्र सेवाएँ, औज़ार तथा तकनीकों में विशेष रुचि है। इस से आते बदलाव कि परख के लिए वे दुनिया भर के लोगों के साथ बातचीत में मुबतला हैं। दीना वर्ल्ड चेनजिंग और द साउथ-ईस्ट एशिया अर्थक्वेक एंड त्सुनामीज़ ब्लॉग के लिए भी लिखती हैं।
मिर्ची सेठ के लेखक पंकज नरूला की चिट्ठाकारी के प्रति प्रतिबद्धतता का उदाहरण इस बात से भी दिया जा सकता है कि उन्होंने ब्लॉगर पर अपना चिट्ठा प्रारंभ करने के पश्चात जल्दी ही अपनी निजी होस्टिंग की ओर रूख कर लिया। पंकज हिन्दी चिट्ठाजगत से कई अनूठे प्रयासों के प्रणेता रहे हैं, जिनमें चिट्ठाकारों की अपनी चौपाल अक्षरग्राम, सार्वजनिक विकि सर्वज्ञ, ब्लॉग एग्रीगेटर नारद इत्यादि। जब हिन्दी ब्लॉगज़ीन निरंतर की होस्टिंग की बात आई तो पंकज ने सहर्ष इसकी होस्टिंग अपने जालस्थल पर करने का जिम्मा उठाया था।
अतानु डे का ब्लॉग दिशा 2004 की इंडीब्लॉगीज़ प्रतोयोगिता में बेस्ट इंडीब्लॉग के पुरस्कार से नवाज़ा गया है। अतानु मैकेनिकल इंजीनियर हैं और कंप्यूटर साईंस में स्नात्तकोत्तर। तकरीबन 6 साल उन्होंने सिलिकॉन वैली में ह्यूलेट पैकार्ड के लिये उत्पाद विपणन का कार्य किया। पाँच साल तक भारत, अमरीका और यूरोप की खाक छानी और फिर यह एहसास हुआ कि अर्थशास्त्र के बारे में तो कुछ जानते ही नहीं। तो उन्होंने बर्कले स्थित यूनिवर्सिटी आफ कैलिफॉर्निया से अर्थशास्त्र पढ़ा और भारतीय दूरसंचार क्षेत्र पर अपना शोधप्रबंध पूरा किया।
अपने खाली समय में अतानु शास्त्रीय संगीत सुनते हैं, विपासना ध्यान लगाते हैं, भौतिक विज्ञान पढ़ते हैं, बौद्ध धर्म पर व्याख्यान देते हैं और अपने ब्लॉग पर लिखते हैं। उनकी कवितायें भी प्रकाशित हो चुकी हैं।
हिन्दी कवियत्री और संस्कृत की विद्वती डा॰ रति सक्सेना के हिन्दी में तीन कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। वेदिक साहित्य एवं भारत-शास्त्र पर कई शोध पत्र लिखे हैं इन्होंने। मलयालम की साहित्यिक रचनाओं के अनुवाद के लिए रति जी को 2000 में केन्द्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला है। कई अन्य पुरस्कारों के अतिरिक्त इन को इन्दिरा गान्धी राष्ट्रीय संस्कृति एवं कला फेलोशिप से भी सम्मानित किया गया है। चिट्ठामंडल की नई सदस्या रति का निरन्तर के लिए लिखा संस्मरण प्रस्तुत है।
जीतेंद्र चौधरी कुवैत में रहते हैं और लोकप्रिय हिंदी ब्लॉगर हैं। जीतू सॉफ्टवेयर और तकनीकी मार्केटिंग से जुड़े हैं लेकिन उनके मेरा पन्ना ब्लॉग पर कंप्यूटर की तकनीकी जानकारी से लेकर भारत के गांव तक की बातें पढ़ने को मिल जाती है। इसके अलावा जीतू हिंदी चिट्ठों के एग्रीगेटर नारद के संचालक हैं।
गौरव का जन्म 7 जुलाई, 1986 को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के 'जिवाना गुलियान' गाँव में हुआ। आरम्भिक शिक्षा-दीक्षा संगरिया (राजस्थान) में हुई। उसके बाद आईआईटी, रुड़की से बीटेक करने के बाद वे संप्रति गुड़गाँव में कार्यरत हैं। गौरव आईआईटी की साहित्यिक पत्रिका 'क्षितिज' के मुख्य संपादक रहे हैं। सिनेमा का जुनून है, कुछ करने की कोशिश जारी है। उनका हिन्दी चिट्ठा http://merasaman.blogspot.com पर है।
डॉ वीणा सिन्हा कॉलेज ऑफ कॉमर्स, मगध यूनिवर्सिटी, पटना में सोशियोलॉजी की अवकाशप्राप्त प्रोफेसर हैं। 60 के दशक में उनकी लिखी कहानियाँ सारिका, माया, मनोरमा (मनोरमा तब की, आज वाली नहीं) में प्रकाशित हुईं, फिर लिखना छूट सा गया। उन्हीं दिनों पटना रेडियो पर सुगम व अर्ध शास्त्रीय गायन के कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये। वीणा लोकप्रिय हिन्दी चिट्ठाकार प्रत्यक्षा की माँ हैं।
शिक्षा : संस्कृत साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि, स्वातंत्र्योत्तर संस्कृत साहित्य पर शोध, पत्रकारिता और वेब डिज़ायनिंग में डिप्लोमा।
कार्यक्षेत्र : पीलीभीत (उत्तर प्रदेश, भारत) की सुंदर घाटियों जन्मी पूर्णिमा वर्मन को प्रकृति प्रेम और कला के प्रति बचपन से अनुराग रहा। मिर्ज़ापुर और इलाहाबाद में निवास के दौरान इसमें साहित्य और संस्कृति का रंग आ मिला। पत्रकारिता जीवन का पहला लगाव था जो आजतक साथ है। खाली समय में जलरंगों, रंगमंच, संगीत और स्वाध्याय से दोस्ती।
संप्रति : पिछले बीस-पचीस सालों में लेखन, संपादन, स्वतंत्र पत्रकारिता, अध्यापन, कलाकार, ग्राफ़िक डिज़ायनिंग और जाल प्रकाशन के अनेक रास्तों से गुज़रते हुए फिलहाल संयुक्त अरब इमारात के शारजाह नगर में साहित्यिक जाल पत्रिकाओं 'अभिव्यक्ति' और 'अनुभूति' के संपादन, हिन्दी विकीपीडया में योगदान देने और कलाकर्म में व्यस्त।
ब्लॉगिंग के बाद इंटरनेट पर एक और विधा ने जोर पकड़ा है। जी हाँ ट्विटर, पाउंस और प्लर्क के दीवाने अपने बलॉग छोड़ दीवाने हो चले हैं माईक्रोब्लॉगिंग के। पैट्रिक्स और देबाशीष कर रहे हैं इस लोकप्रिय तकनीक की संक्षिप्त पड़ताल जिसमें लोग फकत 140 अक्षरों में कभी अपने मोबाईल, कभी डेस्कटॉप तो कभी जालस्थल द्वारा अपना हालेदिल लिखे चले जाते हैं।
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