रविन्द्र कालिया हिन्दी साहित्य जगत के सुपरिचित लेखक हैं‚ इनकी पत्नी ममता कालिया भी लोकप्रिय उपन्यासकार और कथा लेखिका हैं। दो वयस्क होते बच्चों के पिता रविन्द्र बड़े जीवन्त व्यक्ति हैं।
रविन्द्र कालिया उन विरल रचनाकारों में से एक हैं‚ जिन्होंने पिछले अरसे में कहानी में शिल्प‚ शैली और संवेदना के स्तर पर कई परिवर्तन किये हैं। उनकी लेखकीय परिपक्वता‚ सहजता और साहस का दस्तावेज है 'गालिब छुटी शराब'। जिगर की गम्भीर बीमारी से जूझते हुए जहाँ कोई रचनाकार टूट कर बिखर जाता वहीं रविन्द्र जी ने उसी संघर्ष को अपना पाथेय बना बड़ी बेबाकी से उसे पाठकों से रूबरू करवाया है।
रविन्द्र ने अब तक की अपनी ज़िन्दगी में चित्र–विचित्र बहुत से रंग देखे हैं‚ और हर हाल में मस्त रहे हैं। उनकी चौबीस प्रकाशित मौलिक पुस्तकें इसकी भरपूर मिसाल हैं।
प्रमुख कृतियां –
उपन्यास – खुदा सही सलामतकहानी संग्रह – नौ साल छोटी पत्नी¸ काला रजिस्टर¸ गरीबी हटाओ (हिन्दी संस्थान द्वारा पुरूस्कृत)¸ बाँके लाल¸ गली–कूँचे¸ चकै या नीम¸ सत्ताईस साल की उमर तकसंस्मरण – स्मृतियों की जन्मपत्री¸ कामरेड मोनालिज़ा¸ सृजन के सहयात्री¸ गालिब छुटी शराब।