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| डॉ सुनील दीपक |
| जन्म: 13 जून 1954 को लखनऊ, उत्तरप्रदेश में।
हिंदी लेखन और शिक्षण से जुड़ा परिवार। दिल्ली विश्वविद्यालय से चिकित्सा शास्त्र में स्नातक। विभिन्न जगहों से उच्च शिक्षा जिनमें अमरीका में जॉन हॉप्किन्स तथा इंग्लैंड में लीडस् विश्वविद्यालय भी हैं। हिंदी के अतिरिक्त अँग्रेजी तथा इतालवी भाषा में चिट्ठाकारी और लेखन।
संप्रति बोलोनिया (इटली) में एक गैर सरकारी संस्था में वैज्ञानिक और चिकित्सा विशेषज्ञ और विश्व स्वास्थ्य संस्थान, (जेनेवा, स्विटज़रलैंड) में विकलाँगता विषय पर सलाहकार।
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| रवीन्द्र कालिया |
| रविन्द्र कालिया हिन्दी साहित्य जगत के सुपरिचित लेखक हैं‚ इनकी पत्नी ममता कालिया भी लोकप्रिय उपन्यासकार और कथा लेखिका हैं। दो वयस्क होते बच्चों के पिता रविन्द्र बड़े जीवन्त व्यक्ति हैं।
रविन्द्र कालिया उन विरल रचनाकारों में से एक हैं‚ जिन्होंने पिछले अरसे में कहानी में शिल्प‚ शैली और संवेदना के स्तर पर कई परिवर्तन किये हैं। उनकी लेखकीय परिपक्वता‚ सहजता और साहस का दस्तावेज है 'गालिब छुटी शराब'। जिगर की गम्भीर बीमारी से जूझते हुए जहाँ कोई रचनाकार टूट कर बिखर जाता वहीं रविन्द्र जी ने उसी संघर्ष को अपना पाथेय बना बड़ी बेबाकी से उसे पाठकों से रूबरू करवाया है।
रविन्द्र ने अब तक की अपनी ज़िन्दगी में चित्र–विचित्र बहुत से रंग देखे हैं‚ और हर हाल में मस्त रहे हैं। उनकी चौबीस प्रकाशित मौलिक पुस्तकें इसकी भरपूर मिसाल हैं।
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| अतुल अरोरा |
| जन्म: 7 मई 1970¸ कानपुर में। शिक्षा: पीपीएन कॉलेज कानपुर से बीएससी, एचबीटीआई से मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लिकेशन। कार्यक्षेत्र: फिलाडेल्फिया में एक कंप्यूटर प्रोग्रामर की हैसियत से कार्यरत।
सिनेमा¸ भ्रमण एवं फोटोग्राफी में रुचि। शौकिया तौर पर एक ब्लॉग रोजनामचा लिखना शुरू किया¸ जिसमें हल्के–फुल्के विषयों से लेकर राजनीति जैसे गंभीर विषयों पर निजी विचार व्यक्त कर छपास की निजी पीड़ा को बुझाया है।
अमेरिका प्रवास में हुए अनुभवों में हास्यमिश्रण कर उन्हें एक छोटी पुस्तक का रूप देने की कोशिश है 'लाइफ इन ए एचओवी लेन' में। इनका हिन्दी चिट्ठा है रोजनामचा जो वर्ष 2004 में इंडीब्लॉगीज़ पुरस्कार से नवाजा़ जा चुका है।
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| डॉ जगदीश व्योम |
| जन्म: 1 मई 1960, शंभूनगला, फर्रुखाबाद, उ.प्र. शिक्षा: एम.ए.हिंदी साहित्य में, एम.एड., पीएचडी शोधकार्य: लखनऊ विश्वविद्यालय से 'कनउजी लोकगाथाओं का सर्वेक्षण और विश्लेषण' पर।
भारत की लगभग सभी पत्र पत्रिकाओं में शोध लेख, कहानी, बालकहानी, हाइकु, नवगीत आदि का अनवरत प्रकाशन। आकाशवाणी दिल्ली, मथुरा, सूरतगढ़, ग्वालियर, लखनऊ, भोपाल आदि केंद्रों से कविता, कहानी, वार्ताओं का प्रसारण। शोधग्रंथ 'कनउजी लोकगाथाओं का सर्वेक्षण और विश्लेषण' के लिए 'प्रकाशिनी हिंदी निधि,कन्नौज' द्वारा सम्मानित। 'नन्हा बलिदानी' बाल उपन्यास के लिए पांच पुरस्कार। संप्रति केंद्रीय विद्यालय एस.पी.एम, होशंगाबाद, म.प्र. में पी.जी.टी. हिंदी पद पर कार्यरत।
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| गोविंद उपाध्याय |
| सशक्त युवा कथाकार गोविंद उपाध्याय का जन्म 5 अगस्त, 1960 को हुआ। देश की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में उनकी लगभग 150 रचनायें प्रकाशित हुई हैं, कथा संग्रह "पंखहीन" शीघ्र प्रकाश्य। जाल पर आप उनकी कथायें यहाँ, यहाँ, यहाँ और यहाँ पढ़ सकते हैं। सम्प्रति- आयुध निर्माणी में कार्यरत हैं।
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| अमरीक सिंह दीप |
| जन्म: 5 अगस्त 1942 को कानपुर में। शिक्षा हाईस्कूल प्रकाशित कृतियां कहानी संग्रह: कहां जाएगा सिद्धार्थ, काला हाण्डी, चांदनी हूं मैं¸ सिर फोड़ती चिड़िया।
हंस, कथादेश, कथाक्रम, वसुधा¸ साक्षात्कार और वागर्थ जैसी पत्रिकाओं में निरंतर कहानियां प्रकाशित। सम्प्रति – स्वतंत्र लेखन।
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| मितुल पटेल |
| वाराणसी, बनारस और काशी के नाम से प्रासिद्ध नगर मेरा जन्मस्थान है। पुर्वज गुजरात के कच्छ जिले से व्यापार के सिलसिले मे यहा बसे थे। बचपन यहा पे ही बीता, इंजीनियर शिक्षा के लिए पुणे गया, कुछ वर्ष वहा काम करने के बाद से संयुक्त राज्य अमेरिका मे बसा हुआ हु। फिलहाल टेक्सास के ह्युस्टन नगर मे आई-टी मे कार्यरत। हिन्दीनी, नारद, परिचर्चा , ई-स्वामी आदी की मदद से हिन्दी को कंप्यूटर के साथ जोड्ना सीखा। हिन्दी चिट्ठो का प्रशंसक, विश्वास रखता हु कि हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओ के द्वारा बहुत सारे लोग इंटरनेट से जल्द ही जुडेगे। यह लोग इंटरनेट और कंप्यूटर को नई नजर से देखेगे और इंटरनेट से जुडा विश्व इनको एक नई नज़रिये से देखेगा।
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