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बोलबाला मीडिया रिच चिट्ठों का छापें ई-मेल
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इस के लेख़क हैं निरंतर   

हलचलब्लॉग जगत से संबंधित माह की प्रमुख घटनाओं की जानकारी देता है हलचल। पहले माह की बड़ी खबरें...

2 बिलियन डॉलर में आस्क जीव्स की खरीदी

पिछले अंक में हमने आपको खबर दी ब्लॉगलाईंस के अधिग्रहण की और लगता है अब यह नए हाथों में जाने वाला है। खबर है कि आई.ए.सी ईंटरएक्टिव कार्प अब आस्क जीव्स का ही अधिग्रहण करने वाला है। आई.ए.सी ईंटरएक्टिव कार्प के पास अनके जालस्थलों की मालिकियत है।

याहू 360° का आगमन

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याहू द्वारा फ्लिकर के अधिग्रहण और याहू 360° के पर्दापण पर निरंतर द्वारा बदलते परिदृश्य का आंकलन

याहू 360°अब बोलबाला होने वाला है मीडिया रिच चिट्ठों का। जी हाँ अपने व्यक्तिगत, निजी रूप का चोला उतार कर ब्लॉग अब तड़कीले भड़कीले अवतार में सामने आने वाले हैं जिनमें आडियो, फोटो, विडियो झेसे तमाम मिडिया के स्वरूप सब शामिल होगें। यह यह ज़माना सोशीयम नेटवर्किंग का और ऐसे ब्लॉग बनाने की सुविधा प्रदान करने वाले बब्लर नुमा इक्का दुक्का जालस्थलों के बाद अब इस क्षेत्र में याहू जैसे बलशाली खिलाड़ी का पर्दापण हुआ है याहू 360° के साथ। ब्लॉगिंग के मैदान में मौजूदा रस्साकशी में याहू के आने से क्या असर पढ़ता है यह माजरा देखना तो काफी रोचक होगा ही।

फ्लिकर की फिकर अब याहू को

याहू 360° के साथ की ही जबरदस्त खबर है कि अंर्तजाल पर चित्र सहेजने की मुफ्त सेवा देने वाले जालस्थल फ्लिकर को याहू ने खरीद लिया है। यह सच है या गप्प हमें पता नहीं। अगर आप जानना चाहते हैं कि आपके चित्रों का क्या होगा? घबराइये नही, यहाँ पढिये आपके फोटो कहीं गुम नही हो जाने वाले, अलबत्ता यह संभव है कि हर चित्र देखने दिखाने कि बहाने याहू के विज्ञापन साथ में झेलने पड़ें।

याहू का बेतार न्यूज़रीडर

याहू मोबाइलयाहू ने अपने संजाल पर अपने मोबाइल प्रयोक्ताओ के लिये "माई वाई!" नामक सुविधा प्रारंभ की है जिसके द्वारा मोबाइल से याहू के संजाल पर आने वाले उपभोक्ता समाचार और सुर्खियां देख सकते है। इस मुफ्त सेवा का wap 2.0 डिवाईस पर प्रयोग किया जा सकता है। याहू का कहना है, "हमने इसको बहुत आसान बनाया है, ताकि लोग अपने मोबाइल पर ही समाचार सुर्खियों को देख सके और यदि आपके पास एच.टी.एम.एल फोन है तो सिर्फ एक क्लिक द्वारा पूरा समाचार या बलॉग पढ़ा जा सकेगा।"

एक और आनलाईन न्यूज़रीडर

ब्लॉगलाइंस और रोजो के लिए अब कुछ चुनौती आ रही है। खबर है कि सीनेट न्यूज़ डॉट कॉम संजाल आधारित एक आर.एस.एस समाचार एग्रीगेटर न्यूज़बर्स्ट ला रही है। न्यूज़बर्स्ट जाल पर मौजूद तकरीबन हर तरह की जानकारी जैसे समाचारों, ब्लॉग, शॉपिंग सूचियाँ, मौसम, नीलामियों और खोज परिणामों की खबर रखेगा। बड़े मीडिया समुहों द्वारा पाठकों की कृपादृष्टि बनाए रखने के लिए ब्रान्डेड आर.एस.एस समाचार एग्रीगेटर जारी करने की यह शुरुआती प्रवृत्ति प्रतीत होती है।

मीडियाह की जुबान पर लगा ताला

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क्या भारत में मीडिया और ब्लॉग का सहअस्तित्व संभव होगा? पढ़ें इस अंक की आमुख कथा और संपादकीय

लेखक और पत्रकार माहेश्वरी ने अपना सुप्रसिद्ध ब्लॉग मीडियाह बन्द कर दिया। उन्हें भारत की जाने माने प्रकाशन समूह टाइम्स आफ इन्डिया से कानूनी नोटिस आया था जिसमें उन्हें अपने उन्नीस लेखों को हटाने की बात कही गयी थी और भविष्य में ऐसे लेख छापने से मना किया गया था। घुटने टेकने के बजाए माहेश्वरी ने अपना ब्लॉग बन्द करना उचित समझा। हालांकि प्रेस की आजादी चाहने वाले कुछ लोगो ने इस प्रकाशन समूह के विरूद्द जाल पर अपनी पैटिशन डाल दी है, लेकिन क्या इससे कुछ हासिल होगा? मामले की ज्यादा जानकारी और विवादित चिट्ठों को यहाँ पढ़ा जा सकता है।

कुछ और खबरें...

अफगानिस्तान ने थामा ब्लॉगमंडल का हाथ

दुर्दिन से हालिया वापसी के बाद अफगानिस्तान भी ब्लॉगिंग की दुनिया में कूद पड़ा है। अमेरीकी सेना के साथ गत 2 सालों से दुभाषिये के रूप में काम करने वाले 20 वर्षीय वाहिद शायद इस देश के पहले चिट्ठाकार हैं।

आर.एस.एस फीड, बड़े काम की चीज़

पैसा बनाने वाले बड़े जुगाड़ु होते हैं। वे जानते है कि कहाँ पर पैसा बनाया जा सकता है। ब्लॉग भी अब उनकी नजरों में हैं। फीडो के अनुसार आर.एस.एस फीड में भी मनोरंजक विज्ञापन दिये जा रहे है। इसके बेहतर नतीजे सामने आये है और यह इमेंल मार्केटिंग से बेहतर भी है। अगर अपने ब्लॉग की क्षमल फीड पर आपका नियंत्रण है तो पैसे कमाने का यह ज़रिया कोई बुरा नहीं है।

कित्ता कित्ता पानी?

प्यू ब्लॉगिंग सर्वे और सिक्स एपार्ट द्वारा लाइव जर्नल के अधिग्रहण के बाद फिर से वही विवाद शुरु हो गया कि आखिर कितने ब्लॉग लिखे जाते है दुनिया भर में। प्यू के मुताबिक अकेले अमरीका में ही अन्दाज़न 80 लाख ब्लॉग लिखे जाते है जबकि सिक्स एपार्ट के मुताबिक लगभग 65 लाख तो लाइवजर्नल, टाइपपैड और मूवेबल टाइप में ही है। जानकारों का मानना है कि गूगल के ब्लॉगर के भी लगभग 30 लाख प्रयोक्ता है। ग़ैर अंग्रेज़ी चिट्ठों और एम.एस.एन स्पेसेज़ के लगभग दस लाख प्रयोक्ताओं को भी गिना जाए तो कुल जमा साढे तीन करोड़ ब्लॉग बनते हैं। है ना विराट संख्या?

ये ब्लॉग किस चिड़िया का नाम है?

एक ओर बात हो रही है ब्लॉगरों की विराट संख्या की तो दूजी ओर सीएनएन, यूएसए-टूडे और गैलप के एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार अपेक्षाकृत कम अमरीकी चिट्ठाकारी की दुनिया से वाकिफ हैं। यूँ तो तीन चौथाई अमरीकी इंटरनेट का प्रयोग कार्यस्थल, स्कूल या घर में करते हैं लेकिन चार में से केवल एक अमरीकी ही ब्लॉग से परिचित है। आधे से ज्यादा, लगभग 56 प्रतिशत को, ब्लॉग के बारे में कोई जानकारी नही है और इंटरनेट प्रयोग करने वालों में से सिर्फ 32 फीसदी ही ब्लॉग से परिचित हैं। ऐसा कोई सर्वे भारत में हो तो शायद यह संख्या छापने में भी शर्म आये।

ब्लॉगरों की नैतिकता

निरंतर के मार्च अंक में हमने रेबेका ब्लड की पुस्तक से वेबलॉग में नैतिकता विषय पर अंश प्रकाशित किये थे। अब जेरेमी राईट का कहना है कि चिट्ठाकारों का नैतिकता से कतई सरोकार नहीं है। उनका कहना हैः
 

चिट्ठाकार पत्रकारिता के मानकों के बाध्य नहीं हैं, ये मानक भी पिछली सदी में ही बनाए गए मुनाफा बढ़ाने के लिए। चिट्ठाकारों को इस नियमों में बँधने की दरकार नहीं...लिखे शब्द के सृजक के रूप में हमें अपने पाठकों का विश्वास मिलता है और इसका उल्लंघन महापाप है, चाहे वह कोई चिट्ठाकार हो, पत्रकार, कवि या नाटककार।

ऐसे बुरे हम भी नहीं

ब्लॉगर नैतिक नहीं यह मानने वालों से भी ज्यादा लोग यह मानते हैं कि युवा वर्ग द्वारा अंर्तजाल पर प्रयोग की जाने वाली ज़बान, जिसे "नेटस्पीक" भी कहते हैं, ज्यादा खतरनाक है। शिक्षक, संपादक, माता पिता सभी यह मानते हैं। फिर भी प्रेक्षक मानते हैं कि ब्लॉग "डायरी लेखन की एक नयी विधा के जन्म का संकेत दे रहें हैं जिसे एक साहित्यिक विधा के रूप में कुछ सालों पहले मृतप्रायः मान लिया गया था।"

और चलते चलते...

आस्कर ब्लॉग

अब जब हर विषय पर ब्लॉगिंग हो रही है तो भला आस्कर अवार्डस क्यों पीछे रहें? 77वें एकाडमी यानि आस्कर अवार्ड्स के बनाने वालों ने भी इस बार अपना आधिकारिक ब्लॉग बनाया।

क्या चिट्ठाकारी एक पूर्णकालीन पेशा बन सकती है?

कम से कम एक बन्दा तो है जो इसमें विश्वास करता है। पुराने ब्लॉगर कोटकी ने अपनी नौकरी छोड़कर ब्लॉगिंग को अपना पेशा बना लिया है।

वर्डप्रेस थीम प्रतियोगिता

यदि आप डिजाइनर है तो फिर एलेक्स किंग की वर्डप्रेस की थीम प्रतियोगिता में भाग ले सकते है।

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कोई भला चिट्ठा क्यों लिखना चाहेगा?
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चिट्ठाकारी आसान है और नियमित चिट्ठा लेखकों को पुस्तक प्रकाशन के अनुबंध या स्वतंत्र लेखन कार्य द्वारा अर्थलाभ मिलना भी कोई असंभव काम नहीं है। सारांश में पढ़ें बिज़ स्टोन की पुस्तक "हू लेट द ब्लॉग्स आउट" से एक चुने हुये लेख "वाई वुड एनीवन वाँट टू ब्लॉग?" का रमण कौल द्वारा किया हिन्दी रूपांतर।
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