खो गए ओ घन कहाँ तुम

(0 वोट)

अतानु दे

  

 Clouds

सूना जीवन

दीपा जोशी

खो गए ओ घन कहाँ तुम
हो कहाँ किस देश में पथरा गई कोमल धरा
चिर विरह की सेज में।

थी महक जिसमें समाई
तुम्हारे अचल प्रेम की
हुई तृषित वही वसुधा
विरहिणी के भेस में।

हो गए जो विरल घन तुम
सुधा निस्पंद हो गई
बसा पुलक धन उर में
चिर नींद में है सो गई।

लौट आओ तुम नीरधर
बन लघु पुराण विशेष
कह रहीं सूनी आँखें
बेसुध सुधा का संदेश।

अभिप्सा

अरूण कुलकर्णी

यह मेरा स्वल्प सा जीवन
रंगीन, सुगंधित, आह्लादित
सूरज की सुनहरी किरणों से
अभी अभी हुआ विकसित॥

ले आया है नये उमंग
भरा है नयी आशाओं से
अपने ही मन में दबी
अप्रकट इच्छाओं से॥

चाहता तो हूँ
कि बन जाऊँ प्रभु के गले का हार
या चढ़ जाऊँ उसके चरणों में
और कर दूँ किसी की पूजा साकार॥

या कर दूँ सुशोभित
किसी सुंदरी के घुंघराले बाल
या बन जाऊँ
किसी गुलद्स्ते की शान॥

अपने ही रंगों से कर दूँ
किसी तितली को आकर्षित
या किसी भ्रमर की गुंजन सुनकर
कर दूँ उसे अपना खजाना अर्पित॥

चाहता हूँ हवा के झोंकों पर
दिन भर नृत्य करना
उसी की संथ लहरों पर
अपने परागकण लुटाना॥

कभी कभी होता हूँ चिंतित मगर
ऐसी डरावनी कल्पनाओं से
मेरी अप्रकट इच्छाओं से विपरीत
ऐसी किसी संभावानाओं से॥

यह भी हो सकता है
कि चढ़ जाना पडे किसी मृत शरीर पर
या रह जाना पडे
किसी कब्र पर विराजमान होकर॥

या बनना पडे
किसी दुष्ट राजनेता के गले का हार
या गिरना पडे सूखकर
पौंधे तले निराधार॥

फिर चलता है मन में द्वंद्व
क्या उचित है ऐसी अप्रकट इच्छाओं को पालना
या डरावनी कल्पनाओं से बिना कारण ही मुरझाना
यह तो नही है धर्म मेरा
कि सोचूं, कौन है भोक्ता
मेरे सौंदर्य या सुगंध का
बल्कि सोचूं कि कैसे निरासक्त होकर
वितरण करूं अपने परिमल का॥


अतानु दे
About the author:
अतानु डे का ब्लॉग दिशा 2004 की इंडीब्लॉगीज़ प्रतोयोगिता में बेस्ट इंडीब्लॉग के पुरस्कार से नवाज़ा गया है। अतानु मैकेनिकल इंजीनियर हैं और कंप्यूटर साईंस में स्नात्तकोत्तर। तकरीबन 6 साल उन्होंने सिलिकॉन वैली में ह्यूलेट पैकार्ड के लिये उत्पाद विपणन का कार्य किया। पाँच साल तक भारत, अमरीका और यूरोप की खाक छानी और फिर यह एहसास हुआ कि अर्थशास्त्र के बारे में तो कुछ जानते ही नहीं। तो उन्होंने बर्कले स्थित यूनिवर्सिटी आफ कैलिफॉर्निया से अर्थशास्त्र पढ़ा और भारतीय दूरसंचार क्षेत्र पर अपना शोधप्रबंध पूरा किया।

अपने खाली समय में अतानु शास्त्रीय संगीत सुनते हैं, विपासना ध्यान लगाते हैं, भौतिक विज्ञान पढ़ते हैं, बौद्ध धर्म पर व्याख्यान देते हैं और अपने ब्लॉग पर लिखते हैं। उनकी कवितायें भी प्रकाशित हो चुकी हैं।
Read More >>
टिप्पणियाँ (0)add
password
 

 
< पिछला   अगला >

   
Click here to lend your support to: Nirantar and make a donation at www.pledgie.com !

कुछ खोज रहे हैं?

विशेष आकर्षण

क्या आप टैगिंग करते हैं?
क्या आप टैगिंग करते हैं?
टैगिंग जानकारी की जमावट और लोगों को जोड़ने का एक नया क्राँतिकारी माध्यम है जो अराजकता से व्यवस्था की सृष्टि कर मानवीय भावनाओं का प्रतीक भी बन चला है। देबाशीष चक्रवर्ती के आलेख द्वारा प्रवेश कीजिये कीवर्ड के साम्राज्य में  और अंदाज़ा लगाईये टैगिंग के भविष्य का।
Read More >>

कौन है ऑनलाइन

लेखकों के लिये सूचना

क्या आप निरंतर के लिये लिखना चाहते हैं? तो आज ही "निरंतर मित्र" समूह के निःशुल्क सदस्य बनें!

ईमेल पता भरें:

कॉपीराईट संबंधी सूचना

निरंतर पर प्रकाशित सामग्री को अंतर्जाल पर पुनर्प्रकाशित नहीं किया जा सकता। प्रिंट प्रकाशनों हेतु (यदि अन्यथा इंगित न किया गया हो तो) निम्नलिखित नियम लागू होते हैं। संशय की स्थिति में हमसे patrikaa at gmail dot com पर संपर्क करें।
Creative Commons License