निरंतर
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 मस्त रहो न यार!
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written by रजनी भार्गࠤ on अगस्त 08, 2006
कँधों पे बोझ,
ज़िन्दगी ये संघर्ष,
मुस्कराओ न.
written by Pratik Pandey on अगस्त 08, 2006
कोई चिट्ठा पढ़े, न पढ़े
टिप्पणियों की संख्या बढ़े, न बढ़े
लेकिन लिखते रहो बार-बार
मस्त रहो न यार।
बंद हुई थी तो क्या हुआ
पाठकों ने पहले इसे कम छुआ
लेकिन ख़ूब चलेगी इस बार
मस्त रहो न यार।
written by लक्ष्मीनार on अगस्त 09, 2006
मस्त रहो न यार, ज़िन्दगी मुस्काएगी।
कभी तुम्हारे जीवन में भी, फिर बहार आएगी।
नई कोपलें फूटेंगी, नई कलियाँ आयेंगी।
मस्त रहो न यार ज़िन्दगी मुस्काएगी।
लक्ष्मीनारायण गुप्त
written by Tarun on अगस्त 11, 2006
ईराक, अफगानिस्तान, काश्मीर, लेबनान, अफ्रीका में सैकड़ों की संख्या में निर्दोषों के रोज मरने पर बाकी देशों के लोगों का सोचना कुछ ऐसा ही है -
दुनिया में युद्ध हो रहे, हमको पड़ी क्या यार।
अपना कोई नही मर रहा, मस्त रहो ना यार।।
written by नितिन बागलࠤ on सितम्बर 01, 2006
हरा भरा था काट दिया,
कंकरीट में गाड दिया,
फिर भी कहते हो, मस्त रहो..!!!
ना यार!
written by रेणू आहूजा. on सितम्बर 04, 2006
खड़े खड़े ही काटूं जीवन,
रहे पाहुन मुझ पर मगन,
नियती यही जब, तो क्यूं, झल्लाना है हर बार,
मन-झूले की ड़ोर पर झूलो, मस्त रहो ना यार.
-रेणू आहूजा.
written by rachana on सितम्बर 13, 2006
मै यँहा तक देर से पहुँची हूँ,,६ सित. निकल चुकी है.फिर भी वृक्ष के सम्मान मे अपनी बात रखना चाहती हूँ----
छीन ली तुमसे फूल पत्तियाँ,
कँधोँ पर है छत का भार.
अब न कोई पतझड होगा,
अब न होगी कोई बहार.
इतना होकर भी तुम कहते,
'मस्त रहो यार'
हर हाल मे खुश रहने की,
कैसे पाई शक्ति अपार?
written by डॉ० भावना कà on सितम्बर 15, 2006
देखा लिखने को कुछ नया मिला तो खुद को रोक नहीं पाई। आज ही यह विषय पढा । क्षमा सहित..
देखकर हालत वृक्ष की
मुझको रोना आ गया,
जब बना किसी का घर
और फर्नीचर किसी को भा गया।
दर्द भरी ये सिसकी सुनी-
"मुझे भी जीने की इच्छा है"
"ना करो यूँ अत्याचार"
तभी किसी ने टोका मुझे
चलो हटो तुम्हें क्या पडी है
मस्त रहो न यार ।
written by लावण्या on सितम्बर 18, 2006
डीझनी लेण्ड के काफे का
नैँ भी हूँ एक अजूबा,
खरा नहीँ खोटा हूँ यारोँ,
पीयो पेप्सी या कोला !
फेँक पैसा देख तमाशा
पर, मस्त रहो ना यार!
written by देबाशीष on अक्टूबर 30, 2006
भागीदारी के लिये सभी पाठकों का दिली शुक्रिया! आशा है आपका साथ यूं ही मिलता रहेगा।
written by कवि कुलवंत à on दिसम्बर 06, 2007
सर पर है भार
खड़ा नही बेकार,
बोझ हो पास फिर भी
मस्त रहो न यार !