मुखपृष्ठ


ऐ इंसानों, ओस न चाटो!

(1 वोट)

निरंतर

  

 ऐ इंसानों ओस न चाटो!
 

सीखो बेखौफ़ साँसों का कर्ज़ चुकाना

 

मुबारक हो सबको ये मंजर सुहाना
शान से ये परचम हवा में फहराना।

पर संभलिए हवा कुछ अलग बह रही है
सरसराते हुए हमसे कुछ यूं कह रही है
घिसने लगा है परचम का ताना-बाना
कई सुरों में बंटा है आज कौमी तराना।

गुटबाज़ी ने किए देश के कई हिस्से
सच्चाई ईमानदारी के बचे सिर्फ किस्से
सैंकड़ों सेनानियों के सपने है टूटे
निज देश को अपने देशवासी ही लूटें।

देश की साख पल-पल घट रही है
गली-कूचों में मगर मिठाईयां रही हैं
ये मिठाइयां ही देश को है मंहगी पड़ी
इनकी रिश्वत से ही तो जड़ें तक सड़ी।

जो न जानें देश के लिये कुछ लुटाना
वही कहते ये मंज़र है कितना सुहाना
बस यही हवा हर ओर बह रही है
मदहोशी की थपकी कौम को दे रही है।

उठो, गफ़लत से जागो, टूटो बन कर कहर
वतन-फरामोशों का लहू जाए रगों में ठहर
जाति-मज़हब भूलो, याद रखो फर्ज़ अपना
पूरा करना है तुमको देशभक्तों का सपना।

बेखौफ़ साँसों का कर्ज़ जब तुम सीखो चुकाना
तभी शान से आकर ये अपना परचम फहराना।

- रत्ना सोनी 

 

ऐ इंसानों, ओस न चाटो!

ऐ इंसानों, ओस न चाटो!

आंधी के झूले पर झूलो!
आग बबूला बनकर फूलो!

कुरबानी करने को झूमो!
लाल सबेरे का मुंह चूमो!

अपने हाथों पर्वत काटो!

पथ की नदियां खींच निकालो!
जीवन पीकर प्यास बुझा लो!

रोटी तुमको राम न देगा!
वेद तुम्हारा काम न देगा!

जो रोटी का युद्ध करेगा!
वह रोटी को आप वरेगा!

- गजानन माधव मुक्तिबोध
[साभारः अभिव्यक्ति]


टिप्पणियाँ (1)add
तभी शान से आकर ये अपना परचम फहराना।
written by नीरज दीवान on अगस्त 11, 2006


ओजस्वी कविता के लिए रत्ना सोनी जी को हार्दिक धन्यवाद. आज़ादी की सालगिरह पर यह कविता प्रेरणास्पद है.


मुक्तिबोध की यह रचना दोबारा पढ़ी.. मुक्तिबोध सदा प्रासंगिक रहेंगे. संपादक को धन्यवाद

''रोटी तुमको राम न देगा!वेद तुम्हारा काम न देगा!
जो रोटी का युद्ध करेगा!वह रोटी को आप वरेगा!''

password
 

 
< पिछला   अगला >

   
Click here to lend your support to: Nirantar and make a donation at www.pledgie.com !

कुछ खोज रहे हैं?

विशेष आकर्षण

लाल परी - भाग 1
लाल परी - भाग 1
"हर इन्सान के अंदर एक और रूप छिपा होता है, जेकिल और हाईड की तरह। जैसे दिन की शान्त, संकोची अरु रात होते ही लाल परी में बदल जाती है - चंचल, शोख, बीस-साला बिंदास बाला!" वातायन में प्रस्तुत है विश्व की पहली इंटरैक्टिव धारावाहिक कथा "लाल परी", प्रत्यक्षा की कलम से। पहला भाग पढ़ें और तय करें कहानी का अगला भाग कैसा हो।
Read More >>

कौन है ऑनलाइन

लेखकों के लिये सूचना

क्या आप निरंतर के लिये लिखना चाहते हैं? तो आज ही "निरंतर मित्र" समूह के निःशुल्क सदस्य बनें!

ईमेल पता भरें:

कॉपीराईट संबंधी सूचना

निरंतर पर प्रकाशित सामग्री को अंतर्जाल पर पुनर्प्रकाशित नहीं किया जा सकता। प्रिंट प्रकाशनों हेतु (यदि अन्यथा इंगित न किया गया हो तो) निम्नलिखित नियम लागू होते हैं। संशय की स्थिति में हमसे patrikaa at gmail dot com पर संपर्क करें।
Creative Commons License