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मन कहे

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समस्या पूर्तिसमस्या पूर्ति की नई समस्या पर आपका स्वागत है। इस चित्र और दिये शीर्षक पर ध्यान दीजिये और रच डालिए एक छोटी सी कविता। कविता ज्यादा बड़ी न हो तो अच्छा, चार लाईना हो तो उत्तम, हाइकू हो तो क्या कहनें! शीर्षक मुख्यतः भाव के लिए है, पर आप इसे कविता में प्रयोग कर सकते हैं। यदि आपकी रचना निरंतर संपादक मंडल को पसंद आ गई तो आप का नाम अगले अंक में विजेता कर रूप में प्रकाशित होगा। अपनी प्रविष्टि टिप्पणी के माध्यम से ही दें, ईमेल द्वारा भेजी प्रविष्टि मान्य नहीं होगी।

प्रतियोगिता के नियम:

  • कविता इस पोस्ट पर अपने टिप्पणी (कमेंट) के रूप में ही प्रेषित करें। ईमेल या निरंतर रचना भेजने के फॉर्म द्वारा प्रविष्टि स्वीकार्य नहीं होगी।
  • रचना मौलिक व पूर्व अप्रकाशित होनी चाहिए।
  • एक प्रेषक से एक ही प्रविष्टि स्वीकार्य होगी।
  • संपादक मंडल का निर्णय साधारण अथवा विवाद की स्थिति में अंतिम व सर्वमान्य होगा।
  • संपादक मंडल व उनके परिवार के सदस्य इस प्रतियोगिता में भाग नहीं ले सकते।
  • रचना भेजने की अंतिम तिथि हैः 25 नवंबर 2006

पिछली प्रतियोगिता के परिणाम:


अगस्त 2006 की समस्या पूर्ति में अनेकों प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं। सभी का धन्यवाद!

सभी प्रविष्टियाँ बहुत अच्छी थीं पर संपादक मंडल ने बहुमत से "नितिन बागला " की प्रविष्टि को सर्वश्रेष्ठ माना। नितिन को हमारी हार्दिक बधाई!


टिप्पणियाँ (5)add
भीगी किस्मत
written by रचना on नवम्बर 07, 2006

जब थी जरूरत, तब ना बरसा,
अब देखो पानी ही पानी!
क्या मुझसे कोई बैर है?ईश्वर
क्यूँ करते एसी बेईमानी?


प्यासा मन
written by sanju on नवम्बर 09, 2006

कहाँ से इतना जल है आया,
मेरे मन को कितना भाया,
रोक लूँ इसको हाथ बढाकर,
हो न जाए ये कंही जाया।

मन कहे
written by तरूण on नवम्बर 16, 2006

मन कहे इतना ना बरसो,
भूखे रहना ना पड‌े कल परसों।
खेती काटने का वक्त है आया,
डूब जाये ना सारी सरसों।

mat barso
written by devesh on दिसम्बर 18, 2006

mat barso itna aaj
maana bahut gehri hai pyaas
par jo saara ras barsa jaoge
kaise pura hoga madhumaas

...
written by wahid on जनवरी 13, 2007

prayas achcha hai

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