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टेरापैड: ब्लॉगिंग से आगे की सोच? छापें ई-मेल
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बेकारअति उत्तम 
इस के लेख़क हैं रवि रतलामी   

शायद नहीं। या शायद हाँ। चिट्ठाकारों के लिए अब बहुत से अच्छे विकल्प उपलब्ध हैं और इनमें नित्य प्रति इजाफ़ा होता जा रहा है। एक नया,  आल-इन-वन किस्म का ब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म - टेरापैड जारी किया गया है जो कि न सिर्फ मुफ़्त है (यदि आप विज्ञापनों से नहीं चिढ़ते हैं तो, चूंकि इसकी मुफ़्त सेवा विज्ञापन समर्थित है), ढेरों अन्य सुविधाओं से भी लेस है।

Terapad टेरापैड कुछ ऐसी सेवाओं व विशेषताओं को आपके लिए लेकर आया है जो आपकी पारंपरिक चिट्ठाकारी की दशा व दिशा को बदल सकता है। यदि आप टेरापैड के जरिए अपना चिट्ठा लिखने की सोच रहे हैं तो आपको प्रमुखतः इसमें निम्न अतिरिक्त सुविधाएँ मिलेंगी जो अन्य ब्लॉग प्लेटफ़ॉर्म में अनुपलब्ध हैं:
  • पेपॉल रेडी शॉप - इसका अर्थ है, आप अपने ब्लॉग को ई-बे जैसा शॉपिंग माल मिनटों में बना सकते हैं।
  • पूरा सीएसएस नियंत्रण - माने कि बोरिंग ब्लॉगर व सीमित वर्डप्रेस टैम्प्लेटों से पूरा छुटकारा। आप अपने ब्लॉग को मनचाहा रूपाकार दे सकते हैं।
  • प्रोब्लागिंग औजार- (ये क्या है भई? हमें भी नहीं पता)
  • WTSIWYG संपादन सुविधा - यह तो सभी में है, परंतु इसमें यह उन्नत किस्म का है।
  • सामग्री प्रबंधन - आप अपने चिट्ठा पोस्टों के अतिरिक्त भी अन्य सामग्री डाल सकते हैं।
  • समाचार व आरएसएस फ़ीड जोड़ सकते हैं (यह कोई नई सुविधा नहीं है)
  • इमेज गैलरी
  • पाठकों की आवाजाही पर निगाह - (यह तो सबसे जरूरी वस्तु है)
  • परिचर्चा फोरम (वाह! क्या बात है)
  • नौकरी तथा कर्मकुण्डली खोज- बेरोजगारों के लिए बढ़िया है।
  • कैलेण्डर
  • मुफ़्त मासिक 10 गीबा बैंडविड्थ  /  तथा कुल 2 गीबा डाटा
चलिए अब कुछ खामियों की बातें भी करें। वैसे तो कुछेक ही हैं, पर हैं तो :

एक ही स्थल पर बहुत सी चीजें एक आम चिट्ठाकार के लिए अनावश्यक ही होंगी। इसका इंटरफ़ेस अनावश्यक रूप से अव्यवस्थित है और सारा मामला घालमेल प्रतीत होता है। इसका यूजर इंटरफेस छोटे-छोटे कार्यों के लिए अवांछित नेविगेशन मांगता है जो खीझ भरा हो जाता है। उदाहरण के लिए, आपको नया ब्लॉग पोस्ट बनाने के लिए कड़ी तब तक दिखाई नहीं देती जब तक कि आप कोई श्रेणी बना कर उसे क्लिक नहीं करते! कौन नया चिट्ठाकार इसे समझ सकेगा भला?

एक नया व्यापारिक जोखिम जिसे गूगल खरीद लेगा? बहुत संभव है, परंतु फिर इसके उपयोक्ता आधार को करोड़ों में भी तो पहुँचना चाहिए। संभावना तो कम ही नजर आती है!

रवि रतलामी
About the author:

जन्मतिथि: 5 अगस्त 1958

जन्मस्थान: राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)

विद्युत अभियांत्रिकी में स्नातक, MVP. कम्प्यूटरों व इंटरनेट पर हिन्दी के प्रयोग में अगुआ तथा पथप्रदर्शक. लिनक्स तंत्र के हिन्दीकरण में महत्वपूर्ण योगदान. अंग्रेज़ीहिन्दी में चिट्ठा, स्तम्भतकनीकी लेखन.

संप्रति: विद्युत मंडल से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पश्चात् तकनीकी सलाहकार व स्वतंत्र लेखन.

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टिप्पणियाँ (1)add
सही अभिज्ञान
written by हरिराम on मई 31, 2007

बिल्कुल सही रूप में गुण-दोष विवेचन सहित उत्तम अभिज्ञान दिया गया है। धन्यवाद।

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