मुखपृष्ठ arrow Advertise With Nirantar

मार्च 2005 का कच्चा चिट्ठा छापें ई-मेल
प्रयोक्ता का मुल्यांकन: / 0
बेकारअति उत्तम 
इस के लेख़क हैं अनूप शुक्ला   

आशीष तिवारी

Ashish Tiwariई-लेखा के लेखक आशीष फिरोज़ाबाद में जन्में, जयपुर में पले बढ़े, वाराणसी में स्नातक बने, बंगलोर में पेशेवर व स्नात्कोत्तर बने और संप्रति मोहाली में सॉफ्टवेयर में प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में कार्यरत हैं। वाराणसी से पहले एक साल जोधपुर व बँगलौर से पहले एक साल कटनी भी रह चुके हैं।

आशीष को हिन्दी से विशेष प्रेम है। फिल्में देखना व पुस्तक पढ़ना रूचिकर लगता है। आशीष विवाहित है और आलोक व इला को अपना पारिवारिक मित्र मानते हैं। उनका अपना गृह पृष्ठ भी है पर आलसी होने की वजह से उस पर जाले लग रहे हैं। उनकी कोई खास लेखन शैली नहीं है (और यही खास है)। आशीष मानते है कि भाषा भावना से जुडी हुई है और घर पर हिन्दी व दफ्तर में अंग्रेज़ी का उपयोग एक तरह का दुराव पैदा करता है। उनका सपना है कि हिन्दी व्यापार जगत की भाषा बने, हिन्दी का प्रसार अपने आप हो जाएगा। जब चीनी और जापानी इस प्रकार सफल हो सकते हैं तो भला हिन्दी क्यूँ नहीं।




अनुनाद सिंह

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के एक छोटे से गाँव में जन्में, प्रतिभास के लेखक अनुनाद सिंह, गाँव के सुरम्य वातावरण में ही पले-बढे हैं। माता-पिता कृषि वैज्ञानिक थे और अनुनाद सिंह को भी उनके काम में हाथ बटाना पडता था। आरम्भिक शिक्षा गाँव में ही हुई। अभियान्त्रिकी की पढ़ाई के लिए गाँव का साथ छूटा और जमशेदपुर जा पहुँचे। आप वैद्युत अभियान्त्रिकी में स्नातक है। पावर इलेक्त्रानिक्स आपका कर्म क्षेत्र रहा है। उच्च शक्ति व अत्यधिक स्थायित्व वाली विभिन्न प्रकार की पॉवर सप्लाय की परिकल्पना और निर्माण में आप सिद्धहस्त हैं। संप्रति आप इन्दौर में कार्यरत हैं और पावर कन्वर्टरों की डी. एस. पी. द्वारा रीयल टाइम कन्ट्रोल की समस्यायों से दो-चार हो रहे हैं। समाज हित के लिये सोचना और सम्मिलित प्रयास करना-करवाना उनकी विशेष रुचि है |

अनुनाद हिन्दी के भविष्य को भारत के भविष्य से जुडा हुआ मानते हैं। उनका मानना है कि भारत के विकास के साथ-साथ हिन्दी का भी विकास होगा और हिन्दी के भरपूर प्रयोग के बिना भारत के विकास को गति नही मिल सकती। वे कहते हैं कि हिन्दी को उपयोग की जरूरत है, वह अपने आप विकसित हो जाएगी। अगर हम हिन्दी का प्रयोग नहीं करेंगे तो हमेशा ही पंगु बने रहेंगे और हिन्दी को भी पंगु बनाये रखेंगे। अगर हिन्दी का ज्ञान नौकरी प्राप्ति के लिये आवश्यक बना दिया जाय तो हिन्दी रातोंरात रानी बन जायेगी और अंग्रेज़ी उसकी दासी।


अनूप शुक्ला
About the author:
जन्म: 16 सितंबर, 1963
शिक्षा: बी.ई़.(मेकेनिकल), एम ट़ेक (मशीन डिज़ाइन)
संप्रति: भारत सरकार रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आयुध निर्माणी में राजपत्रित अधिकारी।
लेखन: इंटरनेट पर नियमित लेखन। आपका हिन्दी चिट्ठा फुरसतिया खासा लोकप्रिय है। अनूप निरंतर पत्रिका के मुख्य संपादक हैं और चिट्ठा चर्चा करते रहते हैं।
Read More >>
टिप्पणियाँ (0)add
password
 

 

   
Click here to lend your support to: Nirantar and make a donation at www.pledgie.com !

कुछ खोज रहे हैं?

विशेष आकर्षण

वेबलॉग नीतिशास्त्र
वेबलॉग नीतिशास्त्र
सारांश में पेश करते हैं पुस्तकाँश या पुस्तक समीक्षा। निरंतर के पहले अंक में हमें प्रसन्नता है रेबेका ब्लड की पुस्तक "द वेबलॉग हैन्डबुक" के अंश का हिन्दी रूपांतर प्रस्तुत करते हुए। रेबेका 1996 से अंर्तजाल पर हैं, उनका ब्लॉग रेबेकाज़ पॉकेट खासा प्रसिद्ध है।
Read More >>

कौन है ऑनलाइन

लेखकों के लिये सूचना

क्या आप निरंतर के लिये लिखना चाहते हैं? तो आज ही "निरंतर मित्र" समूह के निःशुल्क सदस्य बनें!

ईमेल पता भरें:

कॉपीराईट संबंधी सूचना

निरंतर पर प्रकाशित सामग्री को अंतर्जाल पर पुनर्प्रकाशित नहीं किया जा सकता। प्रिंट प्रकाशनों हेतु (यदि अन्यथा इंगित न किया गया हो तो) निम्नलिखित नियम लागू होते हैं। संशय की स्थिति में हमसे patrikaa at gmail dot com पर संपर्क करें।
Creative Commons License