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निरंतर के अनिरंतर प्रकाशन का एक मुख्य कारण सामग्री का अभाव रहा है। जिस तरह के खोजी, ज्ञानपरक, सामाजिक और तकनीकी लेख हम छापते हैं उनके लेखकों का टोटा पड़ा रहता है। निरंतर पर हम लेखकों को पारिश्रमिक देने का मन बना रहे हैं। पर किसी वेब पत्रिका के लिये यह विज्ञापनदाताओं और संरक्षकों के बिना करना असंभव है। अतः हर माह ज़रूरी राशि संजोने के लिये हम तुरंत प्रभाव से निरंतर पर बैनर एड शुरु करने जा रहे हैं। यदि आप या आपका संस्थान निरंतर को समर्थन देना चाहता हो तो हम तिमाही, छमाही और वार्षिक अवधि के लिये आपका बैनर एड सशुल्क निरंतर पर दिखायेंगे। इच्छुक व्यक्ति व संस्थान अधिक जानकारी के लिये हमें patrikaa at gmail dot com पर लिख सकते हैं।
अच्छा अंतर्जाल कहां चला गया?
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निरंतर
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- अलजाइमर पीड़ितों के लिये दौड़ - प्रथम मैराथन धावक की डायरी
- डाक्टरों ने नेत्र कोषिकाओं को रौशनी दिखाई डाक्टरों ने आखों को रौशनी के प्रति संवेदनशील बनाते हुये कुछ खास तरह के अंधेपन के इलाज का तरीका खोज निकाला है
- दिमाग के दायें भाग का बदलातार्किक रूप से यह माना जाता है कि दिमाग के बायें हिस्से सूचनायें मिलीं। अब बारी है अवधारणओं की जिसमें कला, दूसरों के बारे में समझ तथा भावों की प्रधानता होगी
- समाज में लोगों में मेलजोल, सामाजिकता घट रही है
- आर्थराइटिस की दवा से दिल खतरे में हृदय को नुकसान की आशंका से आर्थराइटिस की जिस दवा की बिक्री पर रोक लगा दी गयी थी, वह मौत तक का कारण बन सकती थी
- समुद्र तट पर जंगली जानवर, वैज्ञानिक से कलाकार बने स्वयंभू भगवान थियो जैनसन सस्ते सामानों से जानवरों की दुनिया बनाने में मशग़ूल हैं। ये जानवर हवा के इशारे पर चलते हैं, खाते हैं तथा अन्य हरकते करते हैं, उद्भेद का दर्जा देते हैं जबकि दूसरे लोग इसे सम्मोहित करने वाला बताते हैं
- ब्लॉग शिक्षा का माध्यम, शिक्षा के माध्यम के रूप में ब्लॉग की लोकप्रियता छात्रों तथा शिक्षकों के बीच दिन पर दिन बढती जा रही है
- कार्टून चरित्रो की चार अंगुलियाँ ही क्यों बनायी जाती है?
- पाँचवे वार्षिक चिट्ठाकारी पुरस्कार समारोह
- आन्सर.काम दस लाख से अधिक विषयों की परिभाषा देते हुये विस्तार से जानकारी दी गयी है
- साइमन होगेसबर्ग ने बताया कि लगभग तीन माह तक मैनें १५० अजनबी लोगों को सडक पर रोककर पूंछा कि रोके जाने के एक क्षण पहले वे क्या सोच रहे थे। माइक तथा डिक्टाफोन का प्रयोग करके मैने उनकी आवाज टेप की तथा उनकी फोटो ली।
- अंर्तजाल पर सेक्स की भूख, अच्छा अंतर्जाल कहां चला गया?
- घनत्व का वास्तुशिल्प, माइकल वुल्फ के विशाल रंगीन चित्रों की प्रदर्शनी। वुल्फ दस साल से हाँगकाँग में रहे और काम करते रहे। इस क्षेत्र की गूढ़ शहरी गतिशीलता से प्रभावित हो कर उन्होंने वहाँ के वास्तुशिल्प के चकरा देने वाले चित्र लिए।
- गूगल-मेल टिप्स का सम्पूर्ण संग्रह
- यह एक स्वप्न नही, चिट्ठाकारी से बदलाव लाया जा सकता है
- मानो या ना मानो, चिट्ठों के पैर होते है, चिट्ठाकारी वैसे ही शक्तिशील हो सकती है, जैसे आज का पूँजीवाद -- बस सूचना ही इसका रोकड़ा है। आप न सिर्फ देख सकते हैं, साथ मिल भी सकते हैं।
- "टाडा" सूचियाँ बचे हुए काम की सरल, साझी सूचियाँ।
- मांसपेशियों से चलने वाले 'ज़िन्दा' रोबाट, जीवित मांसपेशियों से चलने वाले छोटे छोटे रोबाट बन गए हैं।
- मुक्त सूत्री जीव विज्ञान का उद्भव, क्या बाग़ी वैज्ञानिकों का एक गिरोह पेटेण्ट की हुई तकनीकों को इकट्ठा कर के इण्टरनेट द्वारा दान कर सकता है?
- अमरीकी रक्षा मंत्रालय द्वारा अस्वीकार किये गये अस्त्रो पर सनसनीखेज खुलासा इसमे एक ऐसा रासायनिक अस्त्र भी शामिल है जो सैनिको मे 'सेक्स की इच्छा' को इतना बढाता कि वो लड़ाई छोड़कर एक दूसरे के पीछे भागते हैं।
- अच्छा ब्लॉग कैसे बनायें, कुछ बहुत अच्छी सलाहें।
- भाड़ मे गया इन्टरनेट!, इन्टरनेट मर चुका है।
- अमेरिका खराब है बढ़ती कमरिया के लिए
- जिंदगी की खोज, दुबारा MIT के इंजीनियर जीववैज्ञानिक विश्व की पुर्नरचना करना चाहते थे, बेड़ा गर्क कुछ डिज़ाइन थे बड़े जटिल। बस फिर क्या था! वे सब कुछ तैयार करने लगे शुरुआत से और जन्म हुआ कृत्रिम जीवविज्ञान का।
- चिट्ठाकारी नीति और चिट्ठाकारो के लिये आचार संहिता, जी हाँ और भी लोग रिबेका बल्ड जैसा सोचते हैं!
- उत्तरी कोरिया ने लम्बे बालों के खिलाफ छेड़ी जंग, उत्तरी कोरिया का नया दुश्मन है लम्बे बाल।
- ईरान मे लिंग परिवर्तन की शल्यक्रिया, क्यों ईरान ने समलैंगिकता के खिलाफ होते हुए भी लिंग परिवर्तन मंजूरी दी?
- साईडब्लॉग बहुत बढ़िया!
- तुरन्त नशामुक्ति, मात्र 24 घन्टों मे नशामुक्ति पाये, कोई आत्मसंयम, अलगाव अथवा उपदेश के बिना। आप इसे इलाज कहें या तुरत विज्ञान। बस एक कदम की दूरी पर
- दर्दनिवारक दवाएँ अँतड़ियो के लिये खतरा, दर्जनो के हिसाब से ब्रूफेन और एस्प्रिन खाने वालो सावधान, वैज्ञानिको ने पता लगाया है कि इन दवाओ से आँतो को अनुमान से ज्यादा नुकसान पहुँचता है
- एक नयी कलैन्डर पद्दति एक अमरीकी वैज्ञानिक एक लोगो के बीच एक नयी कैलैन्डर पद्दति अपनाने के लिये खेमाबन्दी कर रहा है, जिसमे हर तारीख अगले सालों मे उसी दिन पड़ेगी
- अब आलू से हैपेटाइटिस बी का इलाज, अमरीकी वैज्ञानिको ने आलू द्वारा लीवर के इस खतरनाक रोगथाम का टीका तैयार किया
- यदि आपके इनबाक्स मे एक स्क्रीन से ज्यादा विपत्र है तो आप सचमुच अक्खड़ किस्म के है
- एक योग्यवान का स्पष्टीकरण, डैनियल टामैट एक जाने माने विद्वान है। वे गणित के कठिनतम गणनाये पलक झपकते कर देते है, लेकिन साथ ही इसका राज भी आपको बताते है। टामैट सात भाषाये बोलते है और अपनी अलग भाषा रचना भी कर रहे है। अब वैज्ञानिक पूछ रहे है कि क्या ये साहबान अपनी विलक्षण प्रतिभा से दिमाग की बीमारी के रहस्यों पर से पर्दा उठा सकेंगे।
- किसी जीवित चीज़ से DNA कैसे निकालें? (साभारः कोटके)
- सूनामी की वजह से पौराणिक अवशेष खोजे गये, खतरनाक सूनामी की वजह से दक्षिण भारत मे समुद्र किनारे के एक पौराणिक शहर के अवशेष मिले
- ५१ सीधे साधे कदमों मे अपना ब्लॉग कैसे तैयार करें!
- ब्लॉग बाइन्डर डॉट कॉम, अपने चिट्ठो को साकार स्वरूप दें, आपके चिट्ठों को किताब की शक्ल देने मे मदद करती है
- दर्द भरा सच ईराक युद्ध एक नए प्रकार का नर्क है -- किसी अन्य युद्ध के मुकाबले अधिक लोग, जो बच तो गए पर हमेशा के लिए लूले, लंगड़े, अन्धे हो गए। सामरिक चिकित्सा शास्त्र में आई एक क्रांति ऐसे लोगों की मदद कर रही है दर्द पर हावी होने में।
- बुक एक स्केचबुक जो छत्तीस हफ्तों तक बिना किसी निश्चित क्रम से चार कलाकारों के बीच इधर उधर होती रही। हर कलाकार को पिछले कलाकार के चित्र के जवाब में चित्र बनाने के किए 5 दिन दिए गए। स्केचबुक 60,000 मील चली और करीब एक साल में पूरी हुई।
- ज़्यादती चिट्ठों की, अच्छे ख़ासे मुद्दे को दफन करने का फन
- नया विचार प्रस्तुत करने के तरीके
खास निरंतर के लिए हुसैन द्वारा संकलित
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लेखकों के लिये सूचना
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विशेष आकर्षण
| वेबलॉग नीतिशास्त्र |  |
| सारांश में पेश करते हैं पुस्तकाँश या पुस्तक समीक्षा। निरंतर के पहले अंक में हमें प्रसन्नता है रेबेका ब्लड की पुस्तक "द वेबलॉग हैन्डबुक" के अंश का हिन्दी रूपांतर प्रस्तुत करते हुए। रेबेका 1996 से अंर्तजाल पर हैं, उनका ब्लॉग रेबेकाज़ पॉकेट खासा प्रसिद्ध है। |
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written by v9y on फ़रवरी 29, 2008
अपनी भाषा अपनी बोली
अपने अन्दाज़ में लिखना
मुद्दे कुछ हों शिकवे कुछ हों
अपना ही नज़रिया कहना
आज़ाद सतह पर छपती हो
मन की मन में ना रखना
कभी देर-सवेर भले हो लेकिन
सदा निरन्तर रहना
शुभ...
- विनय
(Submitted on Thu, 2005-03-10 04:19)
written by रमन बी on फ़रवरी 29, 2008
पूरी पत्रिका ही बढ़िया है.. इस लेख में काफ़ी अच्छे लिंक्स दिये गये है.. बहुत बहुत बधाईयां.
(Submitted on Wed, 2005-03-09 17:23)