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विशेषज्ञ बिन सब सून

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रवि रतलामी

  

वातायनः व्यंग्यविशेषज्ञों का जमाना आ चुका है। इनके पैर जम चुके हैं। बिना विशेषज्ञों की मदद के दैनंदिनी जीवन के कार्य दूभर होते जा रहे हैं। जीवन के हर क्षेत्र में विशेषज्ञों की घुसपैठ जारी है। व्यक्ति के जन्म लेने से पहले ही विशेषज्ञों का रोल चालू हो जाता है। विशेषज्ञ गर्भ में ही लिंग भेद कर देते हैं। जन्मोपरांत के आरंभिक वर्षों के आचार-व्यवहार का अध्ययन कर विशेषज्ञ यह बता देते हैं कि व्यक्ति विशेष की किस क्षेत्र में रुचि है और वह राजनीति में प्रगति करेगा या क्रिकेट में। इस प्रकार उसके कैरियर का ग्राफ - भविष्य की दिशा विशेषज्ञ तय कर देते हैं और अब उसे उसी क्षेत्र में अपना कैरियर बनाना होता है।

जब आप बीमार पड़ते हैं तो डाक्टर के पास जाते हैं। वहाँ आपको पता चलता है कि दर्द या बुखार क्यों आया इसकी जाँच डायग्नोस्टिक एक्सपर्ट करेगा और इसके लिए पैथालाजिकल एक्सपर्ट की सलाह लेगा। बीमारी का पता चल चुकने के बाद आपको उस बीमारी के स्पेशलिस्ट के पास रेफर किया जाएगा ताकि आपका सही इलाज हो सके। शरीर के प्रत्येक अंग के इलाज के लिए अब विशेषज्ञ उपलब्ध हैं। आदमी का इलाज अब तथाकथित फैमिली डाक्टरों के बस का नहीं। किसी दिन सुबह पता चलता है कि आपको उस दिन अपना दांत दिखाने दंत रोग विशेषज्ञ के पास जाना है तो पत्नी को स्त्री रोग विशेषज्ञ को दिखाना है। एक बच्चे का एप्वाइंटमेंट नाक कान गला रोग विशेषज्ञ के साथ है तो दूसरे बच्चे को नेत्ररोग विशेषज्ञ को दिखाना है। अब यह बात दीगर है कि आपके मुन्ने के बारे में दो विशेषज्ञों की राय आपस में भिड़ जाती हो कि उसके टॉन्सिल का इलाज सर्जरी ही है या सिर्फ दवाइयाँ।

खानपान विशेषज्ञ - डायटीशियन आपको बताते हैं कि आपको क्या-क्या कितना खाना है और क्या नहीं खाना है। फैशन सलाहकार और सूट विशषज्ञ आपके ड्रेस की डिज़ाइनिंग करते हैं और आपको बताते हैं कि आपको कब-कब, क्या-क्या, किस-किस रंग का कौन-कौन से फ़ेब्रिक का ड्रेस पहनना है। ब्यूटिशियन और मेकअप विशेषज्ञ आपके बालों के स्टाइल से लेकर आपके उठने-बैठने, बोलने-चलने के बारे में अपनी एक्सपर्ट राय देते हैं और इसके लिए वे अत्याधुनिक कम्प्यूटर और कम्प्यूटर प्रोग्राम की सहायता लेते हैं।

आज आपको अपने प्रोफेशन में सफल होने के लिए विशेषज्ञों की सेवाएँ उपलब्ध हैं। वास्तव में, आज विशेषज्ञ की सेवा के बगैर किसी का अपने प्रोफेशन - व्यापार व्यवसाय, नौकरी इत्यादि में सफल होना मुश्किल है। बाजार विशेषज्ञ यह बताते हैं कि बाजार का ट्रेण्ड क्या है। कौन सी वस्तु बाजार में टिकेगी और कौन सी नहीं। किस चीज का बाजार में डिमांड सप्लाई गेप अधिक है और कौन सी चीज बाजार में सरप्लस है। कौन सा स्क्रिप, कौन सा शेयर आपकी उम्मीदों पर खरा उतरेगा और कौन सा शेयर आपकी लुटिया डुबो देगा। परंतु यह इत्तेफ़ाक की बात ही होगी कि मशहूर वित्त विशेषज्ञ की सलाह पर लगाई गई आपकी पूंजी का प्रतिफल वह नहीं मिल पाया जिसके दावे किए गए थे।

विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग दिनोंदिन बढ़ने के कारण लोग भी अब विशेषज्ञ बनने में दिलचस्पी ले रहे हैं। हमारे मुहल्ले का दर्जी जो एक अनाधिकृत विस्तारित दुकान पर अपना एकमात्र सिलाई मशीन रखकर सिलाई का अपना बिजनेस चलाता है, अपने आपको सूट स्पेशलिस्ट बताता है। अपने दुकान के साइन बोर्ड पर उसने सूट विशेषज्ञ का जिक्र विशेष रूप से किया है। क्योंकि उसे मालूम है कि अगर उसने अपने आपको विशेषज्ञ नहीं बताया तो लोग उसके पास चड्डी-बंडी भी सिलवाने नहीं आएंगे।

कल तक जो नाई बिना नाम की गुमटी में मक्खियाँ मारा करता था आज वह भयंकर रूप से बिजी हो गया है।

विशेषज्ञता की इस दौड़ में मुहल्ले का नाई भी पीछे नहीं रहा। पिछले दिनों उसने अपनी गुमटी में थोड़ा और अधिक अतिक्रमण करके दुकान का डेकोरेशन बढ़ाया। पाँच तरह के शेविंग क्रीम, तीन तरह के आफ़्टरशेव लोशन का इज़ाफ़ा अपनी दुकान में किया और बाहर हेयर स्टाइल विशेषज्ञ का बोर्ड बड़े अक्षरों में लिखवाया। बस, फिर क्या था, उसकी दुकान चल निकली। कल तक जिस बिना नाम की गुमटी में मक्खियाँ मारा करता था, लोगों के शेव बनाने के बजाए आलू छीला करता था, आज वह भयंकर रूप से बिजी हो गया है। लोगों को टाइम का एप्वाइंटमेंट देकर उनके बाल काटता है, शेव करता है। ऊपर से, जिस काम को वह अब तक जिस रेट से करता आया था, उसी काम को विशेषज्ञ का ठप्पा लगने के बाद अब पच्चीस गुना ऊँचे रेट पर करता है।

विशेषज्ञों से सम्बन्धित एक मजेदार घटना मेरे साथ घटी। मेरे आस पड़ोस में मेरी ख्याति कम्प्यूटर एक्सपर्ट के रूप में है। एक दिन पड़ोसी का कम्प्यूटर खराब हो गया। उसने मुझसे कहा कि मैं चूंकि कम्प्यूटर विशेषज्ञ हूँ, अत: उसके कम्प्यूटर की खराबी दूर करने में मदद करूँ। मैंने उसे समझाना चाहा कि मैं प्रोग्राम-सॉफ़्टवेयर विशेषज्ञ हूँ, कम्प्यूटर हार्डवेयर नहीं। परंतु तब से उसने मुझे अविश्वसनीय नज़रों से देखना शुरू कर दिया है।

बिना विशेषज्ञ अब जीना मुश्किल है। कारण यह है कि हमें अब कभी छींक भी आती है तो हमें चिकित्सा विशेषज्ञों से यह कन्फर्म कराना पड़ता है कि कहीं कोई कॉम्प्लीकेशन तो नहीं। कहीं कोई सेकेण्डरी इन्फेक्शन तो नहीं। कभी किसी केस में फंस गए तो आपराधिक प्रकरणों से बरी कराने के लिए क्रिमिनल केस स्पेशलिस्ट लायर हैं। कर चोरी के केस देखने दबाने के लिए आयकर, विक्रयकर सलाहकार हैं। प्रायमरी स्कूलों में भी अब विषय विशेषज्ञ भर्ती किए जा रहे हैं - बच्चों को पढ़ाने के लिए। गणित, विज्ञान, इतिहास इत्यादि विषयों के विषय विशेषज्ञ अब महाविद्यालयों - विश्वविद्यालयों की बपौती नहीं रह गए हैं। खेलों की बात करें तो हॉकी फुटबाल में आज कोई खिलाड़ी पेनाल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ है तो कोई पेनल्टी स्ट्रोक विशेषज्ञ। विशेषज्ञों का जलवा हर तरफ है - बात चाहे क्रिकेट की हो या एथलेटिक्स की।

और, आखिर में, व्यक्ति के जीवन के अंतिम क्षणों को सुखमय बनाने का दावा करने वाले, व्यक्ति की सोच को अंधकार से प्रकाश (?) की ओर ले जाने का दंभ भरने वाले, स्वर्ग (!) का रास्ता दिखाने वाले विशेषज्ञ यानी मुल्ला-मौलवी, पंडा-पुजारी और रागी-पादरी तो हैं ही - आपके सेवार्थ, नि:स्वार्थ - सदा हाजिर। मतलब यह कि जन्म से लेकर मृत्यु पर्यंत जीवन के हर क्षेत्र में विशेषज्ञों की सेवाएँ आपको लेना होंगी क्योंकि जमाना इनका है।


रवि रतलामी
About the author:

जन्मतिथि: 5 अगस्त 1958

जन्मस्थान: राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)

विद्युत अभियांत्रिकी में स्नातक, MVP. कम्प्यूटरों व इंटरनेट पर हिन्दी के प्रयोग में अगुआ तथा पथप्रदर्शक. लिनक्स तंत्र के हिन्दीकरण में महत्वपूर्ण योगदान. अंग्रेज़ीहिन्दी में चिट्ठा, स्तम्भतकनीकी लेखन.

संप्रति: विद्युत मंडल से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पश्चात् तकनीकी सलाहकार व स्वतंत्र लेखन.

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