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	<title>निरंतर -हिन्दी ब्लॉगज़ीन &#124; Nirantar - Hindi Blogzine &#187; Alchemist</title>
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	<description>Nirantar - World&#039;s first Hindi Blogzine</description>
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		<title>अल्केमिस्ट &#8211; आधुनिक परीकथा</title>
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		<pubDate>Mon, 23 May 2005 12:34:38 +0000</pubDate>
		<dc:creator>रविशंकर श्रीवास्तव</dc:creator>
				<category><![CDATA[वातायन]]></category>
		<category><![CDATA[Alchemist]]></category>
		<category><![CDATA[Coelho]]></category>
		<category><![CDATA[Review]]></category>

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		<description><![CDATA[जिस किताब की 2 करोड़ से अधिक प्रतियाँ बिक चुकी हों व 55 भाषाओं में अनुवाद हो चुका हो वह किसी भी साहित्य प्रेमी को ललचाएगी ही। बचपन में सुनी परीकथा के नये, सुफ़ियाना संस्करण सी है ब्राजीली लेखक <strong>पाओलो कोएलो </strong>की पुस्तक <strong>अलकेमिस्ट</strong>, कह रहे हैं समीक्षक <strong>रवि रतलामी</strong>।&#160; इस पुस्तक का हिन्दी अनुवाद <strong>स्व. कमलेश्वर</strong> ने किया था।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><img title="वातायनः पुस्तक समीक्षा" src="http://www.nirantar.org/images/stories/excerpts.gif" border="0" alt="वातायनः पुस्तक समीक्षा" hspace="5" vspace="5" width="135" height="140" align="right" />
<div class="dropCap">कि</div>
<p>सी किताब पर अगर कमलेश्वर जैसे महारथी साहित्यकार का नाम उसके अनुवादक के रूप में हो, उसकी 2 करोड़ से अधिक प्रतियाँ बिक चुकी हों, देश-विदेश की 55 भाषाओं में जिसका अनुवाद हो चुका हो, तो यह किताब किसी भी साहित्य प्रेमी को पढ़ने के लिए ललचाएगी ही कि आखिर इस किताब में ऐसी क्या चीजें कही गई हैं? पहली ही नज़र में ऐसा प्रतीत होता है कि किताब में दम तो होना ही चाहिए। पर, कभी-कभी कुछ कयास ठीक से नहीं बैठ पाते। ब्राजीली लेखक <a href="http://www.paulocoelho.com.br/engl/"> पाओलो कोएलो</a> की लिखी, हिन्दी में अनूदित किताब <a href="http://www.amazon.com/exec/obidos/ASIN/0694524441/nirantar-20/102-8448730-6183312?%5Fencoding=UTF8&amp;camp=1789&amp;link%5Fcode=xm2"> अल्केमिस्ट</a> के बारे में कुछ ऐसा ही कहा जा सकता है।</p>
<div id="pullQuoteL">चमत्कारों-घटनाओं को किस्सागोई अंदाज में कहने की कला के फलस्वरूप ही चंद्रकांता संतति तथा हैरी पॉटर जैसी किताबें लोकप्रिय हुए, और शायद अल्केमिस्ट की लोकप्रियता का कारण भी यही है।</div>
<p>जैसे कि किताब के टैग लाइन दिया गया है- अपने सपनों को साकार करने की एक ऐंद्रजालिक कहानी – समूची किताब संयोगों, चमत्कारों से पटी पड़ी है और इसमें अविश्वसनीय, काल्पनिक रासायनिक क्रियाओं के द्वारा स्वर्ण बनाने की कला अंतत: सीख लेने के एक कीमियागर और एक छुपे खजाने को खोजने में लगे एक गड़रिए युवक की कहानियाँ हैं। किसी सुखांत नाटक की तरह कहानी के अंत में वह खजाना नायक को नाटकीय अंदाज में अपने ही ठौर पर दबा हुआ मिलता है, जिसे वह अपने स्वप्न के आधार पर तमाम दुनिया में तलाशता फिर रहा था।</p>
<p>किताब में जगह-जगह ईश्वर पर आस्था बनाए रखने और अपनी चाहत, अपने सपनों को बनाए रखने के संदेश है। और, प्राय: एक ही तरह की बात बार-बार, अलग-अलग तरीके से दोहराए गए हैं। जैसे कि –</p>
<blockquote><p>“जब तुम सचमुच किसी चीज को पाना चाहते हो तो संपूर्ण सृष्टि उसकी प्राप्ति में मदद के लिए तुम्हारे लिए षड्यंत्र रचती है”</p></blockquote>
<p>तथा-</p>
<blockquote><p>“जब तुम पूरे दिल से किसी चीज को पाना चाहते हो तभी तुम उस विश्वात्मा के सबसे नजदीक होते हो। और वह शक्ति सदैव सकारात्मक होती है।”</p></blockquote>
<p align="center"><a title="Buy Alchemist from Amazon" href="http://www.amazon.com/exec/obidos/ASIN/0694524441/nirantar-20/102-8448730-6183312?%5Fencoding=UTF8&amp;camp=1789&amp;link%5Fcode=xm2" target="_blank"><img title="Alchemist by Paulo Coelho" src="http://www.nirantar.org/images/stories/0505/alchemist.JPG" border="0" alt="Alchemist by Paulo Coelho" hspace="5" vspace="5" align="middle" /></a></p>
<p>चमत्कारों-घटनाओं को किस्सागोई अंदाज में कहने की कला के फलस्वरूप ही चंद्रकांता संतति तथा हैरी पॉटर जैसी किताबें शायद इसीलिए ही लोकप्रिय हुए, और शायद अल्केमिस्ट की लोकप्रियता का कारण भी यही है।</p>
<p>हिन्दी साहित्य के महारथी कमलेश्वर इस किताब का चुनाव अनुवाद हेतु करने में भले ही गच्चा खा गए हों, परंतु अपने अनुवादों में वे पूरे सफल रहे हैं। कुछ विदेशी नामों को छोड़ कर आपको कहीं भी ऐसा प्रतीत नहीं होता कि आप कोई अनुवाद पढ़ रहे हैं। भाषा का प्रवाह गतिमान है। पठनीयता, रहस्य-रोमांच अंत तक बना रहता है। इसके प्रकाशक <a href="http://www.wisdomtreeindia.com/"> विस्डम ट्री</a> ने किताब का कलेवर और काग़ज़ शानदार प्रस्तुत किया है। प्रूफ की अशुद्धियाँ नगण्य सी हैं और टाइप सेट ऐसा है कि पाठक को पढ़ने में थकान महसूस नहीं होती है।</p>
<p>कुल मिलाकर, अगर आप अपने बचपन के दिनों की किसी परीकथा को नए-सूफ़ियाना अंदाज में फिर से पढ़ना चाहते हों तो यह किताब किसी धूप भरी, छुट्टी की दुपहरी के लिए ठीक है। परंतु, जैसा कि किताब में कई-कई बार दोहराया गया है, अगर आपका कोई सपना है, उसे पूरा करना है, तो इस किताब को पढ़कर समय बरबाद मत कीजिए। बेहतर है कि आप अपने उस स्वप्न को पूरा करने में लग जाएँ। ईश्वरीय शक्तियाँ आपके सपने को पूरा करने का षड्यंत्र रचेंगी और आपका सपना सचमुच पूरा होगा। आमीन!</p>
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