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	<title>निरंतर -हिन्दी ब्लॉगज़ीन &#124; Nirantar - Hindi Blogzine &#187; Bloglines</title>
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	<description>Nirantar - World&#039;s first Hindi Blogzine</description>
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		<title>बोलबाला मीडिया रिच चिट्ठों का</title>
		<link>http://www.nirantar.org/0405-halchal</link>
		<comments>http://www.nirantar.org/0405-halchal#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 09 Apr 2005 12:56:19 +0000</pubDate>
		<dc:creator>देबाशीष चक्रवर्ती</dc:creator>
				<category><![CDATA[हलचल]]></category>
		<category><![CDATA[Bloglines]]></category>
		<category><![CDATA[Yahoo]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://localhost/wp27nirantar/%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9a-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%a0/</guid>
		<description><![CDATA[<span class="intro">याहू 360&#176; का आगमन, याहू द्वारा फ्लिकर के अधिग्रहण की अफ़वाहें, पत्रकार प्रद्युम्न माहेश्वरी के प्रसिद्ध ब्लॉग मीडियाह पर टाईम्स आफ इंडिया ने लगवाया ताला और आस्कर अवार्ड्स ने भी बनाया अपना ब्लॉग। ये, और ढेर सारी और खबरें। हमारे स्तंभ <strong>हलचल </strong>में पढ़िए माह के दौरान घटित ब्लॉगजगत से संबंधित खबरें तड़के के साथ।</span>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><img src="http://www.nirantar.org/images/stories/halchal.gif" border="0" alt="हलचल" hspace="2" vspace="2" align="right" /><strong>ब्लॉग जगत से संबंधित माह की प्रमुख घटनाओं की जानकारी देता है हलचल। पहले माह की बड़ी खबरें&#8230;</strong></p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">2 बिलियन डॉलर में आस्क जीव्स की खरीदी</h3>
<p>पिछले अंक में हमने आपको     <a href="http://akshargram.com/nirantar/halchal">खबर दी</a> ब्लॉगलाईंस के अधिग्रहण की और लगता है अब यह नए हाथों में जाने वाला है।     <a href="http://www.nytimes.com/2005/03/21/business/21deal.html?ex=1269061200&amp;en=a043e61af38c1f9c&amp;ei=5090&amp;partner=rssuserland">खबर है</a> कि     <a href="http://www.iac.com/">आई.ए.सी ईंटरएक्टिव कार्प</a> अब     <a href="http://www.nytimes.com/redirect/marketwatch/redirect.ctx?MW=http://custom.marketwatch.com/custom/nyt-com/html-companyprofile.asp&amp;symb=ASKJ">आस्क जीव्स</a> का ही अधिग्रहण करने वाला है। आई.ए.सी ईंटरएक्टिव कार्प के पास अनके जालस्थलों की मालिकियत है।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">याहू 360° का आगमन</h3>
<div id="section-teaser" style="padding: 5px; width: 100px; float: right;"><strong>यह भी पढ़ें</strong><br />
याहू द्वारा फ्लिकर के अधिग्रहण और याहू 360° के पर्दापण पर निरंतर द्वारा <a href="http://www.nirantar.org/0405-nazariya">बदलते परिदृश्य का आंकलन</a>।</div>
<p><img src="http://www.nirantar.org/images/stories/0405/yahoo360.gif" border="0" alt="याहू 360°" hspace="5" vspace="5" align="left" />अब बोलबाला होने वाला है मीडिया रिच चिट्ठों का। जी हाँ अपने व्यक्तिगत, निजी रूप का चोला उतार कर ब्लॉग अब तड़कीले भड़कीले अवतार में सामने आने वाले हैं जिनमें आडियो, फोटो, विडियो झेसे तमाम मिडिया के स्वरूप सब शामिल होगें। यह यह ज़माना सोशीयम नेटवर्किंग का और ऐसे ब्लॉग बनाने की सुविधा प्रदान करने वाले     <a href="http://www.bubbler.com/">बब्लर</a> नुमा इक्का दुक्का जालस्थलों के बाद अब इस क्षेत्र में याहू जैसे बलशाली खिलाड़ी का     <a href="http://www.reuters.com/newsArticle.jhtml?type=internetNews&amp;storyID=7922762">पर्दापण</a> हुआ है     <a href="http://360.yahoo.com/">याहू 360°</a> के साथ। ब्लॉगिंग के मैदान में मौजूदा रस्साकशी में याहू के आने से क्या असर पढ़ता है यह माजरा देखना तो काफी रोचक होगा ही।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">फ्लिकर की फिकर अब याहू को</h3>
<p>याहू 360° के साथ की ही जबरदस्त खबर है कि अंर्तजाल पर चित्र सहेजने की मुफ्त सेवा देने वाले जालस्थल     <a href="http://www.flickr.com/">फ्लिकर</a> को याहू ने खरीद लिया है। यह सच है या गप्प हमें पता नहीं। अगर आप जानना चाहते हैं कि आपके चित्रों का क्या होगा? घबराइये नही,     <a href="http://blog.flickr.com/flickrblog/2005/03/yahoo_actually_.html">यहाँ पढिये</a> आपके फोटो कहीं गुम नही हो जाने वाले, अलबत्ता यह संभव है कि हर चित्र देखने दिखाने कि बहाने याहू के विज्ञापन साथ में झेलने पड़ें।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">याहू का बेतार न्यूज़रीडर</h3>
<p><img src="http://www.nirantar.org/images/stories/0405/yahoo_mobile.JPG" border="0" alt="याहू मोबाइल" hspace="5" vspace="5" align="left" />याहू ने अपने संजाल पर अपने मोबाइल प्रयोक्ताओ के लिये &#8220;माई वाई!&#8221; नामक     <a href="http://www.webpronews.com/news/ebusinessnews/wpn-45-20050310YahooDebutsWirelessRSSReader.html">सुविधा</a> प्रारंभ की है जिसके द्वारा मोबाइल से याहू के संजाल पर आने वाले उपभोक्ता समाचार और सुर्खियां देख सकते है। इस मुफ्त सेवा का wap 2.0 डिवाईस पर प्रयोग किया जा सकता है। याहू का कहना है, &#8220;हमने इसको बहुत आसान बनाया है, ताकि लोग अपने मोबाइल पर ही समाचार सुर्खियों को देख सके और यदि आपके पास एच.टी.एम.एल फोन है तो सिर्फ एक क्लिक द्वारा पूरा समाचार या बलॉग पढ़ा जा सकेगा।&#8221;</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">एक और आनलाईन न्यूज़रीडर</h3>
<p><a href="http://www.bloglines.com/">ब्लॉगलाइंस</a> और     <a href="http://www.rojo.com/">रोजो</a> के लिए अब कुछ चुनौती आ रही है।     <a href="http://www.micropersuasion.com/2005/02/exclusive_cnet_.html">खबर है</a> कि     <a href="http://www.news.com/">सीनेट न्यूज़ डॉट कॉम</a> संजाल आधारित एक आर.एस.एस समाचार एग्रीगेटर     <a href="http://www.newsburst.com/">न्यूज़बर्स्ट</a> ला रही है। न्यूज़बर्स्ट जाल पर मौजूद तकरीबन हर तरह की जानकारी जैसे समाचारों, ब्लॉग, शॉपिंग सूचियाँ, मौसम, नीलामियों और खोज परिणामों की खबर रखेगा। बड़े मीडिया समुहों द्वारा पाठकों की कृपादृष्टि बनाए रखने के लिए ब्रान्डेड आर.एस.एस समाचार एग्रीगेटर जारी करने की यह शुरुआती प्रवृत्ति प्रतीत होती है।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">मीडियाह की जुबान पर लगा ताला</h3>
<div id="section-teaser" style="padding: 5px; width: 100px; float: right;"><strong>यह भी पढ़ें</strong><br />
क्या भारत में मीडिया और ब्लॉग का सहअस्तित्व संभव होगा? पढ़ें इस अंक की <a href="http://www.nirantar.org/0405-cover-story">आमुख कथा</a> और <a href="http://www.nirantar.org/0405-nazariya">संपादकीय</a>।</div>
<p>लेखक और पत्रकार माहेश्वरी ने अपना सुप्रसिद्ध ब्लॉग मीडियाह <a href="http://mediaah.blogspot.com/2005/03/mediaah-is-dead.html">बन्द कर</a> दिया। उन्हें भारत की जाने माने प्रकाशन समूह <a href="http://www.timesofindia.com/">टाइम्स आफ इन्डिया</a> से कानूनी नोटिस आया था जिसमें उन्हें अपने उन्नीस लेखों को हटाने की बात कही गयी थी और भविष्य में ऐसे लेख छापने से मना किया गया था। घुटने टेकने के बजाए माहेश्वरी ने अपना ब्लॉग बन्द करना उचित समझा। हालांकि प्रेस की आजादी चाहने वाले कुछ लोगो ने इस प्रकाशन समूह के विरूद्द जाल पर अपनी पैटिशन डाल दी है, लेकिन क्या इससे कुछ हासिल होगा? मामले की ज्यादा जानकारी और विवादित चिट्ठों को     <a href="http://savemediaah.blogspot.com/">यहाँ</a> पढ़ा जा सकता है।</p>
<h1>कुछ और खबरें&#8230;</h1>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">अफगानिस्तान ने थामा ब्लॉगमंडल का हाथ</h3>
<p>दुर्दिन से हालिया वापसी के बाद अफगानिस्तान भी ब्लॉगिंग की दुनिया में     <a href="http://radiofreeblogistan.com/2005/03/13/afghan_blogger_read_all_about_it.html">कूद पड़ा है</a>। अमेरीकी सेना के साथ गत 2 सालों से दुभाषिये के रूप में काम करने वाले 20 वर्षीय     <a href="http://afghanwarrior.blogspot.com/2005/03/afghanistans-first-blog.html">वाहिद</a> शायद इस देश के पहले चिट्ठाकार हैं।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">आर.एस.एस फीड, बड़े काम की चीज़</h3>
<p>पैसा बनाने वाले बड़े जुगाड़ु होते हैं। वे जानते है कि कहाँ पर पैसा बनाया जा सकता है। ब्लॉग भी अब उनकी नजरों में हैं।     फीडो के अनुसार आर.एस.एस फीड में भी मनोरंजक विज्ञापन दिये जा रहे है। इसके बेहतर नतीजे सामने आये है और यह इमेंल मार्केटिंग से बेहतर भी है। अगर अपने ब्लॉग की     <a href="http://akshargram.com/sarvagya/xml_feed">क्षमल फीड</a> पर आपका नियंत्रण है तो पैसे कमाने का यह ज़रिया कोई बुरा नहीं है।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">कित्ता कित्ता पानी?</h3>
<p>प्यू ब्लॉगिंग सर्वे और सिक्स एपार्ट द्वारा लाइव जर्नल के अधिग्रहण के बाद फिर से वही विवाद शुरु हो गया कि आखिर     <a href="http://www.blogherald.com/2005/01/10/blog-numbers-are-closer-to-345-million-wordwide/">कितने ब्लॉग</a> लिखे जाते है दुनिया भर में। प्यू के मुताबिक अकेले अमरीका में ही अन्दाज़न 80 लाख ब्लॉग लिखे जाते है जबकि सिक्स एपार्ट के मुताबिक लगभग 65 लाख तो     <a href="http://www.livejournal.com/">लाइवजर्नल</a>, टाइपपैड और     <a href="http://movabletype.org/">मूवेबल टाइप</a> में ही है। जानकारों का मानना है कि गूगल के     <a href="http://www.blogger.com/">ब्लॉगर</a> के भी लगभग 30 लाख प्रयोक्ता है। ग़ैर अंग्रेज़ी चिट्ठों और     <a href="http://msn.com/">एम.एस.एन स्पेसेज़</a> के लगभग दस लाख प्रयोक्ताओं को भी गिना जाए तो कुल जमा साढे तीन करोड़ ब्लॉग बनते हैं। है ना विराट संख्या?</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">ये ब्लॉग किस चिड़िया का नाम है?</h3>
<p>एक ओर बात हो रही है ब्लॉगरों की विराट संख्या की तो दूजी ओर सीएनएन, यूएसए-टूडे और गैलप के एक हालिया     <a href="http://www.gallup.com/poll/content/?ci=15217">सर्वेक्षण</a> के अनुसार अपेक्षाकृत कम अमरीकी चिट्ठाकारी की दुनिया से वाकिफ हैं। यूँ तो तीन चौथाई अमरीकी इंटरनेट का प्रयोग कार्यस्थल, स्कूल या घर में करते हैं लेकिन चार में से केवल एक अमरीकी ही ब्लॉग से परिचित है। आधे से ज्यादा, लगभग 56 प्रतिशत को, ब्लॉग के बारे में कोई जानकारी नही है और इंटरनेट प्रयोग करने वालों में से सिर्फ 32 फीसदी ही ब्लॉग से परिचित हैं। ऐसा कोई सर्वे भारत में हो तो शायद यह संख्या छापने में भी शर्म आये।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">ब्लॉगरों की नैतिकता</h3>
<p>निरंतर के     <a href="http://akshargram.com/nirantar/?PHPSESSID=0489730762dac632ee714741ea23ef3c">मार्च अंक</a> में हमने     <a href="http://akshargram.com/nirantar/?PHPSESSID=0489730762dac632ee714741ea23ef3c">रेबेका ब्लड</a> की पुस्तक से वेबलॉग में नैतिकता विषय पर     <a href="http://akshargram.com/nirantar/?PHPSESSID=0489730762dac632ee714741ea23ef3c">अंश</a> प्रकाशित किये थे। अब     <a href="http://newcommforum.typepad.com/blogzine/2005/02/bloggers_arent_.html">जेरेमी राईट</a> का कहना है कि चिट्ठाकारों का नैतिकता से कतई सरोकार नहीं है। उनका कहना हैः</p>
<blockquote><p>चिट्ठाकार पत्रकारिता के मानकों के बाध्य नहीं हैं, ये मानक भी पिछली सदी में ही बनाए गए मुनाफा बढ़ाने के लिए। चिट्ठाकारों को इस नियमों में बँधने की दरकार नहीं&#8230;लिखे शब्द के सृजक के रूप में हमें अपने पाठकों का विश्वास मिलता है और इसका उल्लंघन महापाप है, चाहे वह कोई चिट्ठाकार हो, पत्रकार, कवि या नाटककार।</p></blockquote>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">ऐसे बुरे हम भी नहीं</h3>
<p>ब्लॉगर नैतिक नहीं यह मानने वालों से भी ज्यादा लोग यह मानते हैं कि युवा वर्ग द्वारा अंर्तजाल पर प्रयोग की जाने वाली ज़बान, जिसे &#8220;नेटस्पीक&#8221; भी कहते हैं, ज्यादा खतरनाक है। शिक्षक, संपादक, माता पिता सभी यह मानते हैं। फिर भी     <a href="http://www.realcities.com/mld/krwashington/11194526.htm">प्रेक्षक मानते हैं</a> कि ब्लॉग &#8220;डायरी लेखन की एक नयी विधा के जन्म का संकेत दे रहें हैं जिसे एक साहित्यिक विधा के रूप में कुछ सालों पहले मृतप्रायः मान लिया गया था।&#8221;</p>
<h1>और चलते चलते&#8230;</h1>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">आस्कर ब्लॉग</h3>
<p>अब जब हर विषय पर ब्लॉगिंग हो रही है तो भला आस्कर अवार्डस क्यों पीछे रहें? 77वें एकाडमी यानि आस्कर अवार्ड्स के बनाने वालों ने भी इस बार अपना     <a href="http://www.oscar.com/oscarnight/blog/blog.html">आधिकारिक ब्लॉग</a> बनाया।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">क्या चिट्ठाकारी एक पूर्णकालीन पेशा बन सकती है?</h3>
<p>कम से कम एक बन्दा तो है जो इसमें विश्वास करता है। पुराने ब्लॉगर     <a href="http://www.kottke.org/05/02/kottke-micropatron">कोटकी</a> ने अपनी नौकरी छोड़कर ब्लॉगिंग को अपना पेशा बना लिया है।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">वर्डप्रेस थीम प्रतियोगिता</h3>
<p>यदि आप डिजाइनर है तो फिर एलेक्स किंग की वर्डप्रेस की     <a href="http://www.alexking.org/software/wordpress/themes/blog/2005/02/27/theme-competition/">थीम प्रतियोगिता</a> में भाग ले सकते है।</p>
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		<title>आस्कजीव्स ने निगला ब्लॉगलाईंस को</title>
		<link>http://www.nirantar.org/0305-halchal</link>
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		<pubDate>Tue, 29 Mar 2005 12:04:30 +0000</pubDate>
		<dc:creator>निरंतर पत्रिका दल</dc:creator>
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		<description><![CDATA[क्या याहू सिक्स आपार्ट को हथिया लेगा? क्या गूगल अब डोमेन भी बेचेगा? ये और ढेर सारी और खबरें। पढ़िए माह के दौरान घटित ब्लॉगजगत से संबंधित खबरें तड़के के साथ।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">नई उम्मीदें</h3>
<p>टाईम पत्रिका ने ब्लॉगिंग के बढ़ते हुये प्रभाव के बारे में <a href="http://www.time.com/time/personoftheyear/2004/poymoments.html">में लिखा</a> है। हिन्दी ब्लॉगिंग में विविधता बढ़ रही है और हर मिज़ाज के ब्लॉग्स पैदा हो रहे है&#8230;इससे उम्मीद है कि जल्द ही हिन्दी ब्लॉगिंग अपनी शुरूआती दौर से निकलकर एक नये युग में पहुँचेगी।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">आस्कजीव्स द्वारा ब्लॉगलाइन्स का अधिग्रहण</h3>
<p><img src="http://www.nirantar.org/images/stories/0305/askjeeves.jpg" border="0" alt="आस्कजीव्स ने ब्लॉगलाइन्स का अधिग्रहण कर लिया है" hspace="8" vspace="8" width="172" height="124" align="right" />ब्लॉगों की संख्या और ब्लॉग सेवा की जरूरतें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। विभिन्न स्रोतों से जानकारियां प्राप्त करने के लिये &#8216;एग्रीगेटर&#8217; की आवश्यकता होती है ताकि लोगों को जानकारी के लिये भटकना न पड़े। <img src="http://www.nirantar.org/images/stories/0305/plumber.gif" border="0" alt="लोग नौकरियाँ बदलते है, पर ब्लॉगलाईन्स के प्लंबर महाशय के तो मालिक ही बदल गए। अब लोग सिक्स अपार्ट के बार में कयास लगाने लगे हैं।" hspace="8" vspace="8" width="75" height="148" align="left" />ब्लॉगलाइन्स ऐसा ही एक महत्वपूर्ण आनलाईन एग्रीगेटर है। आस्कजीव्स द्वारा ब्लॉगलाइन्स का अधिग्रहण कभी हाँ हाँ और कभी ना ना करते करते आखिरकार आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा हो ही गयी कि आस्कजीव्स ने ब्लॉगलाइन्स का <a href="http://www.ebcvg.com/articles.php?id=589">अधिग्रहण कर लिया</a> है, इससे ब्लॉगलाइन्स को कोई फायदा हो ना हो, लेकिन आस्कजीवस् को भरपूर फायदा होगा, क्योंकि उसे ब्लॉगलाइन्स के अथाह उपभोक्ता जो मिल जायेंगे। अधिग्रहण की कीमत अनुमानित लगभग 250 लाख डालर आंकी गई। सैकड़ों &#8211; हजारों ब्लॉगरों को आशा है कि &#8216;आस्कजीव&#8217; ब्लॉगलाइन्स के मूल स्वरूप में बदलाव नहीं करेंगे। अभी तक देखा गया है कि ब्लॉगर सेवायें बिकने के बाद उपेक्षा का शिकार हो गयीं। सिर्फ गूगल द्धारा ब्लॉगर की खरीद एक अपवाद है जिसकी सेवायें बदस्तूर जारी हैं, सेवाओं में निरंतर सुधार के साथ। पूरा समाचार <a href="http://www.webpronews.com/news/ebusinessnews/wpn-45-20050208ItsOfficialAskJeevesBuysBloglines.html">यहाँ पढिये</a>।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">क्या याहू सिक्स अपार्ट को हथिया लेगा?</h3>
<p>&#8216;ब्लॉगलाइन्स&#8217; की बिक्री के साथ इस बात पर बहस तेज हो गयी कि याहू को एक मात्र मुफ्त ब्लॉग सेवा &#8216;सिक्स अपार्ट&#8217; को खरीद लेना चाहिये। जनवरी में सिक्स अपार्ट ने लाईव जर्नल को <a href="http://www.internetnews.com/bus-news/article.php/3455151">खरीद</a> तकरीबन 55 लाख प्रयोकंताओं का साथ पा लिया। सिक्स अपार्ट अभी तक मुक्त है शायद इसीलिए डेविड जैक्सन ने यह <a href="http://www.internetstockblog.com/2005/01/yahoo_lacks_a_b.html">विवादास्पद भविष्यवाणी</a> की।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">गूगल अब डोमेन रजिस्ट्रेशन के क्षेत्र में भी?</h3>
<p>अपने गूगल भइया, जिनके अगले कदम के बारे में तरह तरह के कयास लगाये जाते है और दुनिया के सारे कम्प्यूटर वाले आंखे गड़ाये उनकी खबरों का इन्तजार करते है, अब डोमेन रजिस्ट्रेशन के क्षेत्र मे भी आने वाले है, इसका मतलब है कि अब जब आप मेराब्लॉग डॉट कॉम जैसा कोई डोमेन खरीदने निकले तो गूगल भइया भी आपको सेवा प्रदान कर सकते है। वैसे तो इस धन्धे मे कोई खास कमाई है नही ऊपर से प्रतिस्पर्धा इतनी कि पूछो मत, लेकिन गूगल के कूदने से तो माल फ्री ही बँटेगा। अब बाकी लोग अपनी दुकान बंद करे या बेचे, उपभोक्ता तो खुश। है ना मजेदार <a href="http://www.ecommercetimes.com/story/ebiz/google-domain-registrar-40250.html">खबर</a>।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">अब एबाउट डाट कॉम भी बिकाऊ</h3>
<p>बेचने खरीदने का सिलसिला जो 2004 मे चालू था वो 2005 मे भी थमता दिखाई नही देता। अब एबाउट डाट काम, इन्टरनेट पर सबसे बड़ी गाइड साइट, जिस पर हर क्षेत्र के बारे मे कुछ ना कुछ जानकारी है, सुना है वो भी बिकाऊ है, खरीददारों की दौड़ मे याहू चाचा, गूगल भईया और अपने आस्कजीव्स वाले भी <a href="http://www.thewhir.com/find/articlecentral/story.asp?recordid=1160">दौड़ लगा रहे</a> है।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">ब्लॉग दिस</h3>
<p>एम.एस.एन.बी.सी डॉट काम, जो कि इंटरनेट पर सूचना तथा पत्रकारिता के लिये सेवायें प्रदान करती है, ने बेहतर संचार के लिये <a href="http://www.econtentmag.com/Articles/ArticleReader.aspx?ArticleID=7605">&#8216;ब्लॉग दिस&#8217;</a> नामक सुविधा प्रदान की है। इसके जरिये एम.एस.एन.बी.सी.काम के लिये सूचना प्रदान करने हेतु &#8216;ब्लॉग&#8217; तथा समाचार तत्परता से लिखे जा सकते हैं।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">कमेंट स्पैम को धता बताएगी &#8220;नो फोलो&#8221;</h3>
<p>प्रमुख सर्च इंजन कंपनियों एम.एस.एन, याहू, गूगल तथा ब्लॉग के लिये सुविधा प्रदान करने वाली कंपनी सिक्स अपार्ट ने &#8216;कमेंट स्पैम&#8217; रोकने के लिये कमर कस ली है। अधिकतर ब्लॉगर अपने ब्लॉग में टिप्पणी की सुविधा प्रदान करते हैं। यह &#8216;स्पैमर&#8217; के लिये सुविधा देता है कि वे टिप्पणी की जगह दूसरी कड़ियां डाल दे। &#8216;नोफॉलो&#8217; नामक यह सुविधा ब्लॉग में प्रदान की जायेगी ताकि स्पैम की समस्या खतम हो सके। जब नोफॉलो की HTML टैग स्पैमग्रसित कड़ी के अंत में जोड़ दिया जावेगा तो यह खोज ईंजिनों के लिए संकेत होगा कि इस कड़ी की परवाह न करें, उद्देश्य यह है कि कड़ी जबरिया पोस्ट करने का स्पैमर को लाभ न मिले। यह टैग ब्लॉगिंग के औज़ार खुद ही जोड़ देंगे। <a href="http://blog.searchenginewatch.com/blog/050118-204728">इस लेख</a> में और विस्तार से जानकारी दी गई है।</p>
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<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">गूगल को गुस्सा कब आता है?</h3>
<p>बहुत से लोग ब्लॉग को अपनी दिल की भड़ास निकालने का साधन मानते हैं। <a href="http://99zeros.blogspot.com/">मार्क जेन</a> ने भी कुछ ऐसा ही किया। गूगल में नौकरी करते थे। उसकी कुछ नीतियों की आलोचना कर बैठे अपने ब्लॉग में। <a href="http://news.com.com/Google+blogger+I+was+terminated/2100-1038_3-5572936.html">निकाल दिये गये</a> कान पकड़ के बाहर, बाद की सफाइयां काम नहीं आई। अगर मार्क जेन महाभारत कथा (समय पाकर राजा की स्तुति करनी चाहिये) पर अमल करते तो शायद अभी वे गूगल में रहते &#8212; अनाम, अन्जान, किसी एक आंकड़े की तरह। ये घटनायें अब आम होने लगी हैं, हाल ही अमरीका में डेल्टा एयरलाईन्स की एक विमान परिचारिका को अपने ब्लॉग में कार्यालयीन गणवेश में खींचे चित्र छापने पर <a href="http://news.com.com/I+was+fired+for+blogging/2010-1030_3-5490836.html?tag=nl">निकाल बाहर</a> किया गया था।</div>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">&#8220;कटपेस्ट&#8221; सुल्तान</h3>
<p><a href="http://indiauncut.blogspot.com/">इंडिया अनकट</a> के अमित वर्मा ने <a href="http://www.rohitpinto.com/">रोहित पिंटो</a> द्वारा साहित्यिक चोरी का मामला बड़े जोर शोर उछाला। <a href="http://www.pnarula.com/akshargram-com/nirantar/">एक चिट्ठे</a> की टिप्पणी में <a href="http://muselog.net/">कुमारगुरु</a> ने चिट्ठों कि चोरी की अलावा रोहित कि और हरकतों का भी <a href="http://www.pnarula.com/akshargram-com/nirantar/">खुलासा किया</a>। खैर, कई पहचाने चिट्ठाकारों के लगातार दबाव से इतनी बात बनी कि रोहित ने अंततः माफी मांग ली और चिट्ठे हटा लिए। तब शायद अमित को लगा कि सही होते हुये भी कुछ ज्यादा ही उत्साह दिखाया गया, रोहित पिंटो को घेरने में। बहरहाल, मामले का पटाक्षेप हो गया है और रोहित का जालस्थल अब भारतीय ब्लॉजगत की सुर्खियाँ पेश करके शायद पश्चाताप कर रहा है।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">प्रद्युम्न की दूसरी पारी</h3>
<p>समाचार माध्यमों पर कड़ी नज़र रखने वाले प्रद्युम्न माहेश्वरी का गत वर्ष बंद हुआ चिट्ठा &#8220;<a href="http://mediaah.blogspot.com/2005/01/why-is-mediaah-back.html">मीडियाह</a>&#8221; अपने तीखे तेवर के साथ पुनः प्रारंभ किया गया है, आशा है इस बार की पारी लंबी होगी।</p>
<h3 style="padding-top: 10px; padding-bottom: 10px; font-size: 15px">इंडीब्लॉगीज़ 2004 संपन्न</h3>
<p><img title="Indibloggies" src="http://www.myjavaserver.com/%7Eindibloggies/banners/banner1.gif" border="0" alt="Indibloggies" hspace="8" vspace="8" align="right" />भारतीय लेखकों द्वारा रचित चिट्ठों पर केंद्रित ब्लॉगीज़ का भारतीय संस्करण अपने दूसरे साल में ज्यादा पहचाना गया पर नई पद्धति के अंर्तगत गठित 12 सदस्यीय ज्यूरी के चयन और चिट्ठों के चुनाव पर कुछ आपत्तियां भी उठीं। उल्लेखनीय रूप से इस बार कई चिट्ठाकार और संस्थान पुरस्कार प्रायोजन के माध्यम से इस आयोजन आ कर जुड़े जिनमें ब्लॉगस्ट्रीट, फीडडेमन, ब्लॉगजेट, माइक्रोसॉफ्ट शामिल थे। यह बात भी उल्लेखनीय है कि भारतीय भाषाओं की सहभागिता भी पिछले वर्ष की तुलना में आशातीत रही। इस आयोजन का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार यानि कि सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग का पुरस्कार मिला <a href="http://www.nirantar.org/0305/samvaad">अतानु दे</a> के चिट्ठे <strong>दीशा</strong> को। अधिक जानकारी <a href="http://indibloggies.org/indibloggies2004">यहाँ है</a>।</p>
<p class=note>समाचार संकलन व अनुवादः</strong> रमन बी, जीतेन्द्र, अतुल, देबाशीष तथा अनूप</p>
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