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वाराणसी, बनारस और काशी के नाम से प्रासिद्ध नगर मेरा जन्मस्थान है। पूर्वज गुजरात के कच्छ जिले से व्यापार के सिलसिले में यहाँ बसे थे, बचपन यहाँ पर ही बीता। इंजीनियरिंग की शिक्षा के लिए पुणे गया, कुछ वर्ष वहाँ काम करने के बाद से संयुक्त राज्य अमेरिका में बसा हुआ हुँ। फिलहाल टेक्सास के ह्युस्टन नगर में आई-टी में कार्यरत। हिन्दीनी, नारद, परिचर्चा , ई-स्वामी आदि की मदद से हिन्दी को कंप्यूटर के साथ जोड़ना सीखा। हिन्दी चिट्ठों का प्रशंसक, विश्वास रखता हूँ कि हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओ के द्वारा बहुत सारे लोग इंटरनेट से जल्द ही जुड़ेंगे। यह लोग इंटरनेट और कंप्यूटर को नई नजर से देखेंगे और इंटरनेट से जुड़ा विश्व इनको एक नई नज़रिये से देखेगा।
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जन्म: 1 मई 1960, शंभूनगला, फर्रुखाबाद, उ.प्र. शिक्षा: एम.ए.हिंदी साहित्य में, एम.एड., पीएचडी शोधकार्य: लखनऊ विश्वविद्यालय से 'कनउजी लोकगाथाओं का सर्वेक्षण और विश्लेषण' पर। भारत की लगभग सभी पत्र पत्रिकाओं में शोध लेख, कहानी, बालकहानी, हाइकु, नवगीत आदि का अनवरत प्रकाशन। आकाशवाणी दिल्ली, मथुरा, सूरतगढ़, ग्वालियर, लखनऊ, भोपाल आदि केंद्रों से कविता, कहानी, वार्ताओं का प्रसारण। शोधग्रंथ 'कनउजी लोकगाथाओं का सर्वेक्षण और विश्लेषण' के लिए 'प्रकाशिनी हिंदी निधि,कन्नौज' द्वारा सम्मानित। 'नन्हा बलिदानी' बाल उपन्यास के लिए पांच पुरस्कार। संप्रति केंद्रीय विद्यालय एस.पी.एम, होशंगाबाद, म.प्र. में पी.जी.टी. हिंदी पद पर कार्यरत। प्रकाशित कृतियां: काव्य संग्रह:– इंद्रधनुष,भोर के स्वर। शोध ग्रंथ:– कन्नौजी लोकगाथाओं का सर्वेक्षण और विश्लेषण, कन्नौजी लाकोक्ति और मुहावरा कोश। बाल उपन्यास:– नन्हा बलिदानी, डब्बू की डिबिया बाल कहानी संग्रह:– सगुनी का सपना संपादित कहानी संग्रह:– आज़ादी के आस–पास, कहानियों का कुनबा संपादन– हाइकु दर्पण, बाल प्रतिबिंब
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कवयित्री रंजना भाटिया की कविता और हिंदी-साहित्य में विशेष रुचि है। बच्चन, अमृता प्रीतम और दुष्यंत जी को पढ़ना बहुत पसंद है। उनकी रचनायें उनके हिन्दी चिट्ठे पर पढ़ सकते हैं।
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