निधि

ओपन आईडीः ताले अनेक, चाबी सिर्फ एक

सिंगल साईन आन की तर्ज़ पर आकार ले रही है ओपन आईडी प्रणाली

जितने जालस्थल उतने लॉगिन, अपने यूज़रनेम और पासवर्ड की जोड़ी याद रखना सरदर्दी है। शुक्र है कि सिंगल साईन आन की तर्ज़ पर अंतर्जाल पर भी एक प्रणाली आकार ले रही है, जिसका नाम है ओपन आईडी। निधि में पढ़ें आईडेन्टिटी 2.0 और ओपन आईडी की जानकारी देता देबाशीष चक्रवर्ती का आलेख।

Feb 9th 2007, 4

वर्डप्रेस की सफलता का श्रेय प्रयोक्ताओं को

June 1, 2005 | Comments Off on वर्डप्रेस की सफलता का श्रेय प्रयोक्ताओं को

image ह्यूस्टन, अमरीका में जन्में मैट मुलनवेग केवल 20 वर्ष के हैं और अंतर्जाल तकनलाजी के दीवाने हैं। मुक्त लाईसेंस वाले ब्लॉगिंग सॉफ्टवेयर तथा अर्थगत व्यक्तिगत प्रकाशन आधार वर्डप्रेस के वे प्रमुख विकासकर्ता हैं। लेख पढ़ें »
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परिपक्व हो जायेंगे तब भोली भाली बातें करेंगे

June 1, 2005 | Comments Off on परिपक्व हो जायेंगे तब भोली भाली बातें करेंगे

image आजकल के बच्चों मे बचपना क्यों नज़र नही आता? हिंदुस्तानी फिल्मों में इतने गाने क्यों होते हैं? नेताओं के स्वागत पोस्टर में नाम के आगे "मा." क्यों लिखा रहता है? भूख क्यों लगती है? सारे जवाब यहाँ दिये जायेंगे, फुरसत से। ससूरा गूगलवा भला अब किस काम का, पूछिये फुरसतिया से! लेख पढ़ें »
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मोबाइल फ़ोन तेरे कितने रूप?

May 29, 2007 | 2 Comments

image मोबाइल फ़ोन डिजिटल कैमरा, एमपी3 प्लेयर, एफ़एम रेडियो के पर्याय तो थे ही। अब आप इसका इस्तेमाल क्रेडिट कार्ड के विकल्प के रूप में भी कर सकते हैं। रवि रतलामी बता रहे हैं  दो इसी तरह की सेवाओं के बारे में,  पहला एसएमएस आधारित पे-मेट तथा दूसरा मोबाइल एप्लीकेशन आधारित एम-चेक। लेख पढ़ें »
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ट्रैफ़िक जाम और सपने

August 1, 2005 | Comments Off on ट्रैफ़िक जाम और सपने

image सारांश में इस बार एक महिला लेखिका के प्रथम उपन्यास के अंश प्रकाशित करते हुए हमें हर्ष है। सामयिक प्रकाशन द्वारा प्रकाशित सुषमा जगमोहन के इस प्रयास "ज़िंदगी ई-मेल" का 28 जुलाई, 2005 को दिल्ली में विमोचन हुआ। सुषमा पेशे से पत्रकार हैं और उनकी रचनायें हंस, मधुमती व सखी जैसी पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। लेख पढ़ें »
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धौंस नहीं सहेंगे चिट्ठों के सिपाही

April 9, 2005 | 1 Comment

image आंदोलन का प्रतीक माने जाने वाले अखबार कार्पोरेट्स के हाथों अपना ज़मीर बेच चुके हैं। ऐसे में ब्लॉग्स का ईमानदार स्वर आशाएं जगाता है। पढ़िये ब्लॉग्स पर मीडिया मुगलों की दादागिरी पर निरंतर का दो टूक संपादकीय।साथ ही पढ़ें याहू द्वारा फ्लिकर के अधिग्रहण और याहू 360° के पर्दापण पर निरंतर द्वारा बदलते परिदृश्य का आंकलन, "बड़े खिलाड़ी के आने से बड़ा हुआ खेल"। लेख पढ़ें »
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भारतीय ब्लॉगिंग: टिप्पिंग प्वाईंट पर

March 29, 2005 | 1 Comment

image विचार, संदेश और व्यवहार उसी तरह फैलते हैं जैसे कि कोई वायरस। दीना मेहता मानती हैं कि भारतीय ब्लॉगिंग मैल्कम ग्लैडवेल द्वारा पारिभाषित "टिप्पिंग प्वाइंट" की कगार पर है और अनुमान लगा रही हैं कि इसका भविष्य कैसा होगा। लेख पढ़ें »
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आइए वर्डप्रेस अपनाएँ

June 1, 2005 | 1 Comment

यदि आपके पास अपना जालस्थान या वेबस्पेस उपलब्ध है तो आप अपने ब्लॉग को एक ऐसे ब्लॉगिंग तंत्रांश पर स्थापित कर सकते हैं जिसके दीवाने दुनिया भर में हैं। निरंतर के वर्डप्रेस विशेषाँक के अन्तर्गत प्रस्तुत है रमण कौल का आलेख जिसकी मदद से आप वर्डप्रेस पर अपना चिट्ठा शुरू करने की चाहत को मूर्त रूप दे सकते हैं। लेख पढ़ें »
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खो गए ओ घन कहाँ तुम

May 23, 2005 | Comments Off on खो गए ओ घन कहाँ तुम

वातायन के काव्य प्रभाग में आस्वादन कीजिये दीपा जोशी की कविता "सूना जीवन" और अरूण कुलकर्णी रचित कविता "अभिप्सा" का। लेख पढ़ें »
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वर्डप्रेस की सर्च-इंजनों में हेरफेर?

May 23, 2005 | 1 Comment

image क्या वर्डप्रेस ने सर्च इंजनों में हेरा फेरी की? क्या अमरीकी चिट्ठों को शक की नज़र से देखते हैं? सिक्स अपार्ट और अडोब मिल कर कौन सी खिचड़ी पका रहे हैं? और गूगल ने जीमेल में कौन सी नई तकनीक जोड़ी है? इन सवालों का जवाब पाने के लिये पढ़ें हमारा स्तंभ हलचल जिसमें पेश कर रहे हैं माह की चुनिंदा खबरें। लेख पढ़ें »
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जम्बू द्वीप की उन्नति कैसे हो?

March 29, 2005 | Comments Off on जम्बू द्वीप की उन्नति कैसे हो?

हास परिहास में पढ़िए सुने अनसुने लतीफ़े और मज़ेदार वाकये। लेख पढ़ें »
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