निधि

ओपन आईडीः ताले अनेक, चाबी सिर्फ एक

सिंगल साईन आन की तर्ज़ पर आकार ले रही है ओपन आईडी प्रणाली

जितने जालस्थल उतने लॉगिन, अपने यूज़रनेम और पासवर्ड की जोड़ी याद रखना सरदर्दी है। शुक्र है कि सिंगल साईन आन की तर्ज़ पर अंतर्जाल पर भी एक प्रणाली आकार ले रही है, जिसका नाम है ओपन आईडी। निधि में पढ़ें आईडेन्टिटी 2.0 और ओपन आईडी की जानकारी देता देबाशीष चक्रवर्ती का आलेख।

Feb 9th 2007, 4

लड़कर वही निर्मल ज़माना लाना होगा

February 9, 2007 | Comments Off on लड़कर वही निर्मल ज़माना लाना होगा

image पर्यावरणविद् व चिपको आंदोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा पिछले दिनों जनशिक्षण मंच में पर्यावरण विषय पर व्याख्यान देने रतलाम आये। इस अवसर पर निरंतर के लिए पर्यावरण न अन्य विषयों पर रविशंकर श्रीवास्तव ने उनसे बातचीत की। संवाद में प्रस्तुत है उसी वार्तालाप के अंश। लेख पढ़ें »
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नारियल का मिर्ची के साथ गठबंधन

July 1, 2005 | 1 Comment

बंगलौर में नारियल की चटनी में इतनी मिर्ची क्यों डालते हैं? तोगडिया जी हमेशा गुस्से मे क्यों रहते है? आग लगने पर ही पानी भरने की याद क्यों आती है? जब ये सवाल पूछे गये हैं फुरसतिया से तो भई जवाब भी मजेदार ही होंगे, फुरसतिया स्टाईल. लेख पढ़ें »
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जादुई तकनीक का वामनावतारः आईफ़ोन

February 9, 2007 | 1 Comment

image जनवरी में एप्पल ने कैमरा फ़ोन, पीडीए, मल्टीमीडिया प्लेयर व बेतार संचार प्रणाली से लैस आईफ़ोन के आगमन का शंखनाद किया। नये स्तंभ टेक दीर्घा में ईस्वामी जानकारी दे रहे हैं इस इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की जिसकी "एक क्रांतिकारी और जादुई उत्पाद" के रूप में हर तरफ चर्चा है। लेख पढ़ें »
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वेबलॉग नीतिशास्त्र

March 29, 2005 | Comments Off on वेबलॉग नीतिशास्त्र

image सारांश में पेश करते हैं पुस्तकाँश या पुस्तक समीक्षा। निरंतर के पहले अंक में हमें प्रसन्नता है रेबेका ब्लड की पुस्तक "द वेबलॉग हैन्डबुक" के अंश का हिन्दी रूपांतर प्रस्तुत करते हुए। रेबेका 1996 से अंर्तजाल पर हैं, उनका ब्लॉग रेबेकाज़ पॉकेट खासा प्रसिद्ध है। लेख पढ़ें »
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आखिर ब्लॉग किस चिड़िया का नाम है?

May 23, 2005 | 1 Comment

image जब सेंकड़ों मस्तिष्क साथ काम करें तो जेम्स सुरोविकी के शब्दों में, "भीड़ चतुर हो जाती है"। गोया, इंसान को इंसान से मिलाने का जो काम धर्म को करना था वो टैग कर रहे हैं। निरंतर के संपादकीय में पढ़िये देबाशीष चक्रवर्ती और अतुल अरोरा का नज़रिया। लेख पढ़ें »
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मुक्त बाज़ार के महात्मा कब आयेंगे?

May 23, 2005 | Comments Off on मुक्त बाज़ार के महात्मा कब आयेंगे?

image राजनैतिक आज़ादी की अभिजात संकल्पना को गाँधीजी ने सरल रूप देकर जन आंदोलन बनाया और देश को आजादी दिलाई। नितिन पई मानते हैं कि एक शताब्दी पश्चात भारत को आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्ति के लिये हमें महात्मा गाँधी की दुबारा ज़रुरत है। लेख पढ़ें »
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आईए फायरफॉक्स अपनाएं – 1

March 29, 2005 | Comments Off on आईए फायरफॉक्स अपनाएं – 1

image निधि में प्रस्तुत होगी जाल और चिट्ठाकारी के तकनीकी मुद्दों पर चर्चा और आलेख। इस अंक में पंकज नरूला की कलम से फायरफॉक्स के प्रयोग पर रोचक लेख का पहला भाग जिसमें सीखें टैब्ड ब्राउज़िंग के गुर। लेख पढ़ें »
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मेरा दोस्त कादर

February 9, 2007 | 2 Comments

विगत दिनों सिटिज़न्स फॉर पीस तथा इंडियन एक्सप्रेस अखबार द्वारा आयोजित द्वितीय वार्षिक निबंध प्रतियोगिता २००६ में नई दिल्ली स्थित लेखक व स्तंभकार एन कुंजू के अंग्रेज़ी निबंध "माई फ्रेंड कादर" को अंग्रेज़ी श्रेणी में प्रथम पुरस्कार मिला। निबंध का विषय था "हम जैसे नहीं : नागरिकों की दुविधा" वातायन में पढ़िये इसी मार्मिक आलेख का आलोक कुमार द्वारा किया गया हिन्दी रूपांतर। लेख पढ़ें »
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चिठ्ठाकारी को ज़्यादा गँभीरता से न लें

June 1, 2005 | Comments Off on चिठ्ठाकारी को ज़्यादा गँभीरता से न लें

image ब्लॉग नैशविल गोष्ठी पर एक रपट, अंतर्जाल पर हिन्दी के बढ़ते चरण, न्यूज़गेटर द्वारा फ़ीड-डेमन का अधिग्रहण, आई.बी.एम ने कर्मचारियों को दी चिट्ठाकारी करने की छूट, तीसमारखाँ ब्लॉगर और ऐसी ही और खबरें हलचल में। लेख पढ़ें »
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विशेषज्ञ बिन सब सून

April 9, 2005 | Comments Off on विशेषज्ञ बिन सब सून

जीवन के हर क्षेत्र में विशेषज्ञों की घुसपैठ जारी है। व्यक्ति के जन्म लेने से पहले ही विशेषज्ञों का रोल चालू हो जाता है। कटाक्ष कर रहे हैं रविशंकर श्रीवास्तव। लेख पढ़ें »
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