निधि

IDN करेंगे हिन्दी का नाम रोशन

संपूर्ण डोमेन नाम अपनी भाषा में लिख सकने के मार्ग हो रहे हैं प्रशस्त

जब जालपृष्ठ हिन्दी में है तो भला डोमेन नाम हिन्दी में क्यों नहीं? अन्तरराष्ट्रीय डोमेन नाम (IDN) द्वारा ग़ैर-अंग्रेज़ी भाषी इंटरनेट प्रयोक्ताओं को इसका हल तो मिला ही है, भविष्य में संपूर्ण डोमेन नाम अपनी भाषा में लिख सकने के मार्ग भी प्रशस्त हो रहे हैं। पढ़िये आइडीएन के बारे में विस्तृत जानकारी देता वरुण अग्रवाल का लिखा, रमण कौल द्वारा अनूदित लेख।

Jul 15th 2008, 2

विकास तय करने का भी अधिकार मिले: मेधा पाटकर

August 1, 2005 | 2 Comments

image नर्मदा घाटी के लोगों की अगुवाई करने वाली मेधा पाटकर ने एक वृहद, अहिंसक सामाजिक आंदोलन का रूप देकर समाज के समक्ष सरदार सरोवर बाँध के डूब क्षेत्र के विस्थापितों की पीड़ा को उजागर किया। मेधा तेज़तर्रार, साहसी और सहनशील आंदोलनकारी रही हैं। प्रस्तुत है मेधा से देबाशीष चक्रवर्ती की टेलिफोन पर हुई बातचीत के अंश। लेख पढ़ें »
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सुपरमैन और अंडरवियर

April 9, 2005 | 1 Comment

image अगर आपकी पूर्व प्रेमिका अपने बच्चों को आपसे उनके मामा तौर पर मिलवाये तो आप क्या करेंगे? अगर सुपरमैन इतना बुद्धिमान है तो फिर अंडरवियर अपनी पैंट के ऊपर क्यों पहनता है? कहते हैं कि पैदल चलने और जॉगिंग करने से वजन कम होता है। तो क्या उल्टे पैर चलने से वजन बढ़ सकता है? ऐसे ही टेड़े सवालों के मेड़े जवाब दे रहे हैं हाजिर जवाब फुरसतिया! लेख पढ़ें »
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मोबाइल फ़ोन तेरे कितने रूप?

May 29, 2007 | 2 Comments

image मोबाइल फ़ोन डिजिटल कैमरा, एमपी3 प्लेयर, एफ़एम रेडियो के पर्याय तो थे ही। अब आप इसका इस्तेमाल क्रेडिट कार्ड के विकल्प के रूप में भी कर सकते हैं। रवि रतलामी बता रहे हैं  दो इसी तरह की सेवाओं के बारे में,  पहला एसएमएस आधारित पे-मेट तथा दूसरा मोबाइल एप्लीकेशन आधारित एम-चेक। लेख पढ़ें »
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कोई भला चिट्ठा क्यों लिखना चाहेगा?

April 9, 2005 | 1 Comment

image चिट्ठाकारी आसान है और नियमित चिट्ठा लेखकों को पुस्तक प्रकाशन के अनुबंध या स्वतंत्र लेखन कार्य द्वारा अर्थलाभ मिलना भी कोई असंभव काम नहीं है। सारांश में पढ़ें बिज़ स्टोन की पुस्तक "हू लेट द ब्लॉग्स आउट" से एक चुने हुये लेख "वाई वुड एनीवन वाँट टू ब्लॉग?" का रमण कौल द्वारा किया हिन्दी रूपांतर। लेख पढ़ें »
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भारतीय समाज और भ्रष्टाचार

July 1, 2005 | Comments Off on भारतीय समाज और भ्रष्टाचार

image क्या भ्रष्टाचार हम भारतीयों के जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है? क्या हम कभी इससे स्वतंत्र हो पाएँगे? अन्तर्जाल पर किसका वर्चस्व रहेगा गुंडों मवालियों का या उनका जो रचनात्मक कार्य करते हैं, नए रास्ते खोलते हैं? इन दोनों मुद्दों पर पढ़ें निरंतर के जुलाई २००५ अंक की संपादकीय राय. लेख पढ़ें »
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जल में घुली राजनीति

August 1, 2005 | Comments Off on जल में घुली राजनीति

image पानी का असमान वितरण, बांधों के लिये विस्थापितों को अपर्याप्त मुआवज़ा, आर्थिक रूप से संपन्न और विपन्न उपभोक्ताओं में भेदभाव। यह भारत में जल से जुड़ी आम बातें हैं। पत्रकार दिलीप डिसूजा इस पर गौर कर रहें हैं और सुझाव दे रहें हैं कि राजनीति के द्वारा ही स्थिति में बदलाव लाया जा सकता है। लेख पढ़ें »
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वेबारू : इंटरनेट खोज का नया आयाम

August 5, 2006 | 6 Comments

image इंटरनेट पर 20 अरब जालपृष्ठ हैं, यानि लगभग 10 लाख जी.बी. की जानकारी। इसे खंगालने के लिये अगर कोई ऐसा माध्यम मिल जाये जिससे आप आफलाईन रहकर ही अपने मोबाईल या पीसी से खोज कर सकें तो कैसा रहे? पढ़िये रविशंकर श्रीवास्तव का रोचक व जानकारीपूर्ण आलेख। लेख पढ़ें »
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मेरा दोस्त कादर

February 9, 2007 | 2 Comments

विगत दिनों सिटिज़न्स फॉर पीस तथा इंडियन एक्सप्रेस अखबार द्वारा आयोजित द्वितीय वार्षिक निबंध प्रतियोगिता २००६ में नई दिल्ली स्थित लेखक व स्तंभकार एन कुंजू के अंग्रेज़ी निबंध "माई फ्रेंड कादर" को अंग्रेज़ी श्रेणी में प्रथम पुरस्कार मिला। निबंध का विषय था "हम जैसे नहीं : नागरिकों की दुविधा" वातायन में पढ़िये इसी मार्मिक आलेख का आलोक कुमार द्वारा किया गया हिन्दी रूपांतर। लेख पढ़ें »
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चिठ्ठाकारी को ज़्यादा गँभीरता से न लें

June 1, 2005 | Comments Off on चिठ्ठाकारी को ज़्यादा गँभीरता से न लें

image ब्लॉग नैशविल गोष्ठी पर एक रपट, अंतर्जाल पर हिन्दी के बढ़ते चरण, न्यूज़गेटर द्वारा फ़ीड-डेमन का अधिग्रहण, आई.बी.एम ने कर्मचारियों को दी चिट्ठाकारी करने की छूट, तीसमारखाँ ब्लॉगर और ऐसी ही और खबरें हलचल में। लेख पढ़ें »
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विशेषज्ञ बिन सब सून

April 9, 2005 | Comments Off on विशेषज्ञ बिन सब सून

जीवन के हर क्षेत्र में विशेषज्ञों की घुसपैठ जारी है। व्यक्ति के जन्म लेने से पहले ही विशेषज्ञों का रोल चालू हो जाता है। कटाक्ष कर रहे हैं रविशंकर श्रीवास्तव। लेख पढ़ें »
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