निधि

क्या आप टैगिंग करते हैं?

अंतर्जाल के विहंगम आकार के लिये वर्गीकरण की नई पद्धति है टैगिंग

टैगिंग जानकारी की जमावट और लोगों को जोड़ने का एक नया क्राँतिकारी माध्यम है जो अराजकता से व्यवस्था की सृष्टि कर मानवीय भावनाओं का प्रतीक भी बन चला है। देबाशीष चक्रवर्ती के आलेख द्वारा प्रवेश कीजिये कीवर्ड के साम्राज्य में और अंदाज़ा लगाईये टैगिंग के भविष्य का।

May 23rd 2005Comments Off on क्या आप टैगिंग करते हैं?

मुझे है आस कल की…

October 5, 2006 | 5 Comments

image डॉक्टर कुलदीप सुंबली "अग्निशेखर" के व्यक्तित्व के कई पहलू हैं -- कवि, लेखक, विचारक और विस्थापित कश्मीरियों के नेता। पनुन कश्मीर, जिसके वे अगुआ रहे हैं, को वे सेक्युलरिज़्म की नर्सरी मानते हैं। निरंतर संपादक रमण कौल ने जम्मू में अग्निशेखर से साहित्य, पनुन कश्मीर जैसे अनेक विषयों पर चर्चा की। संवाद स्तंभ में पढ़िये अग्निशेखर का साक्षात्कार। लेख पढ़ें »
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कम्पयूटर स्त्रीलिंग है या पुर्लिंग?

March 29, 2005 | 1 Comment

image घर, दफ्तर, सड़क हर जगह मुसीबतें आतीं हैं, सेंकड़ों सवाल उठ खड़े हो जाते हैं। अब सर खुजलाते खुजलाते हमारे रडार पर एक महारथी की काया दिखी तो उम्मीद कि किरणें जाग उठीं। प्रश्न चाहे किसी भी विषय पर हों, साहित्यिक हों या हों जीवन के फलसफे पर, सरल हो या क्लिष्ट, नॉटी हो या शिष्ट, विषय बादी हों या मवादी, कौमार्य हो या शादी, पूछे जायेंगे बेझिझक फुरसतिया से! लेख पढ़ें »
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जादुई तकनीक का वामनावतारः आईफ़ोन

February 9, 2007 | 1 Comment

image जनवरी में एप्पल ने कैमरा फ़ोन, पीडीए, मल्टीमीडिया प्लेयर व बेतार संचार प्रणाली से लैस आईफ़ोन के आगमन का शंखनाद किया। नये स्तंभ टेक दीर्घा में ईस्वामी जानकारी दे रहे हैं इस इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की जिसकी "एक क्रांतिकारी और जादुई उत्पाद" के रूप में हर तरफ चर्चा है। लेख पढ़ें »
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ट्रैफ़िक जाम और सपने

August 1, 2005 | Comments Off on ट्रैफ़िक जाम और सपने

image सारांश में इस बार एक महिला लेखिका के प्रथम उपन्यास के अंश प्रकाशित करते हुए हमें हर्ष है। सामयिक प्रकाशन द्वारा प्रकाशित सुषमा जगमोहन के इस प्रयास "ज़िंदगी ई-मेल" का 28 जुलाई, 2005 को दिल्ली में विमोचन हुआ। सुषमा पेशे से पत्रकार हैं और उनकी रचनायें हंस, मधुमती व सखी जैसी पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। लेख पढ़ें »
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बलॉगिंग विथ परपस

March 29, 2005 | Comments Off on बलॉगिंग विथ परपस

image जिह्वा ने जब अपना प्रसिद्ध चिट्ठा बंद किया तो उनकी उकताहट छुपती न थी। क्या चिट्ठाकार मूलतः अपने मेट्रिक्स में कैद आत्ममुग्ध अंर्तमुखी लेखक ही हैं बस? क्या वे समाज के सत्य से रूबरू ही नहीं होना चाहते? नज़रिया स्तंभ में पढ़िये संपादक की कलम से निरंतर का परिचय और चिट्ठा जगत पर नुक्ता चीनी के साथ पाईए परिचय आमुख कथा का। लेख पढ़ें »
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मोहे गोरा रंग दई दे

July 1, 2005 | 2 Comments

image गोरेपन की क्रीम बेतहाशा बिकती है. स्वास्थ्य पर इसके विपरीत प्रभावों तथा विज्ञापनों को शानदार पति व करियर का जरिया बताने पर आपत्ति उठती रही है. चारूकेसी तफ्तीश कर रही हैं गोरेपन के उत्पादों के काले पक्ष की. लेख पढ़ें »
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आईये फॉयरफाक्स अपनाएं 3 – शक्तिसर्च

July 1, 2005 | 2 Comments

image फॉयरफॉक्स की विशेषताओं को अपने सरल अंदाज में बताता पंकज नरुला की फॉयरफॉक्स श्रृंख्ला का यह तीसरा व अंतिम लेख है। इस अंक में आप पढ़ेगें कि कैसे गूगल सरीखे ज्यादा जाने जाए वाले सजालो के लिए शक्तिसर्च कैसे बनाएं। लेख पढ़ें »
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अल्केमिस्ट – आधुनिक परीकथा

May 23, 2005 | 2 Comments

जिस किताब की 2 करोड़ से अधिक प्रतियाँ बिक चुकी हों व 55 भाषाओं में अनुवाद हो चुका हो वह किसी भी साहित्य प्रेमी को ललचाएगी ही। बचपन में सुनी परीकथा के नये, सुफ़ियाना संस्करण सी है ब्राजीली लेखक पाओलो कोएलो की पुस्तक अलकेमिस्ट, कह रहे हैं समीक्षक रवि रतलामी।  इस पुस्तक का हिन्दी अनुवाद स्व. कमलेश्वर ने किया था। लेख पढ़ें »
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बोलबाला मीडिया रिच चिट्ठों का

April 9, 2005 | Comments Off on बोलबाला मीडिया रिच चिट्ठों का

image याहू 360° का आगमन, याहू द्वारा फ्लिकर के अधिग्रहण की अफ़वाहें, पत्रकार प्रद्युम्न माहेश्वरी के प्रसिद्ध ब्लॉग मीडियाह पर टाईम्स आफ इंडिया ने लगवाया ताला और आस्कर अवार्ड्स ने भी बनाया अपना ब्लॉग। ये, और ढेर सारी और खबरें। हमारे स्तंभ हलचल में पढ़िए माह के दौरान घटित ब्लॉगजगत से संबंधित खबरें तड़के के साथ। लेख पढ़ें »
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पहले मुर्गी आयी या अन्डा

May 23, 2005 | Comments Off on पहले मुर्गी आयी या अन्डा

जितेन्द्र के बचपन के दोस्त सुक्खी बहुत ही सही आइटम हैं। उनकी जिन्दगी में लगातार ऐसी घटनायें होती रहती हैं जो दूसरों के लिये हास‍-परिहास का विषय बन जाती है। हास परिहास में पढ़िए सुने अनसुने लतीफ़े और रजनीश कपूर की नई कार्टून श्रृंखला "ये जो हैं जिंदगी"। साथ ही "शेर सवाशेर" में नोश फ़रमायें गुदगुदाते व्यंजल। लेख पढ़ें »
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