आमुख कथा

असली भारत के लिये असली शिक्षा

हमारी कर्मकाण्डी शिक्षा पद्धति वास्तविक भारत की ज़रूरत मुताबिक ढली ही नहीं है

हमारी शिक्षा पद्धति में बच्चे भारी बैग लिये फिरते हैं, जोर रहता हैं रटन विद्या और परीक्षाओं पर। यहाँ पाठ्यक्रम में बाहर से अर्जित ज्ञान, हुनर और काबलियतों को स्थान नहीं मिलता। शिक्षाविद व राष्ट्रीय शोध प्रोफेसर यश पाल मानते हैं कि आधुनिक औपचारिक शिक्षा तंत्र में प्रकृति और जीवन से सीखे हुनर को शामिल करना भी ज़रूरी है।

May 29th 2007, 5

ब्लॉग नहीं, यूज़नेट से बढ़ेगी हिन्दी

April 9, 2005 | 6 Comments

image यूनिकोड हिन्दी का प्रयोग करने वाले कम ही होंगे जिन्होंने मुफ्त यूनिकोड एडिटर तख्ती के बारे में न सुना हो। पर इसकी रचना करने वाले हेमंत शर्मा को शायद ही ज्यादा लोग जानते हों। हनुमान जी के भक्त हेमंत उन्हीं का नाम आगे रखते रहे हैं। संवाद के अंतर्गत पढ़िये हेमंत से निरंतर की विस्तृत बातचीत। लेख पढ़ें »
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नारियल का मिर्ची के साथ गठबंधन

July 1, 2005 | 1 Comment

बंगलौर में नारियल की चटनी में इतनी मिर्ची क्यों डालते हैं? तोगडिया जी हमेशा गुस्से मे क्यों रहते है? आग लगने पर ही पानी भरने की याद क्यों आती है? जब ये सवाल पूछे गये हैं फुरसतिया से तो भई जवाब भी मजेदार ही होंगे, फुरसतिया स्टाईल. लेख पढ़ें »
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टेरापैड: ब्लॉगिंग से आगे की सोच?

May 29, 2007 | 1 Comment

image टेरापैड कुछ ऐसी सेवाओं व विशेषताओं को आपके लिए लेकर आया है जो आपकी पारंपरिक चिट्ठाकारी की दशा व दिशा को बदल सकता है। जानिये रविशंकर श्रीवास्तव क्या कहते हैं इस नये ब्लॉग प्लैटफॉर्म के बारे में। लेख पढ़ें »
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कोई भला चिट्ठा क्यों लिखना चाहेगा?

April 9, 2005 | 1 Comment

image चिट्ठाकारी आसान है और नियमित चिट्ठा लेखकों को पुस्तक प्रकाशन के अनुबंध या स्वतंत्र लेखन कार्य द्वारा अर्थलाभ मिलना भी कोई असंभव काम नहीं है। सारांश में पढ़ें बिज़ स्टोन की पुस्तक "हू लेट द ब्लॉग्स आउट" से एक चुने हुये लेख "वाई वुड एनीवन वाँट टू ब्लॉग?" का रमण कौल द्वारा किया हिन्दी रूपांतर। लेख पढ़ें »
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सामुदायिक प्रयत्नों के पसीने का प्रताप

June 1, 2005 | Leave comment

image निरंतर का यह अंक वर्डप्रेस विशेषांक है। इस विशेषांक के जरिए हमारा प्रयास है कि हम वर्डप्रेस से संबंधित जानकारी रोचक तरीके से प्रस्तुत करे साथ ही आपको इस उत्पाद की सफलता के नेपथ्य में निहित सामुदायिक प्रयत्नों के पसीने की महक आप तक पहूँचा सके। लेख पढ़ें »
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वर्डप्रेस: ज़ीरो बन गया हीरो

June 23, 2005 | 1 Comment

image ब्लॉगिंग सॉफ्टवेयर में मुक्त कोड पर आधारित तंत्रांश वर्डप्रेस ने कुछ ही सालों में अपनी एक खास जगह बना ली है। इतने सारे ब्लॉगिंग माध्यमों और मूवेबल टाईप जैसे बड़े खिलाड़ियों के रहते वर्डप्रेस ने अतिशय सफलता कैसे हासिल की यह जानना ज़रूरी है। पंकज नरुला नज़र डाल रहे हैं वर्डप्रेस के जन्म से लेकर जवानी तक की यात्रा पर। साथ ही जिक्र है इसकी क्षमताओं और इसे बनाने वालों की सोच के बारे में। लेख पढ़ें »
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सूचना संचयन की इन्द्रधनुषी तकनीक

November 4, 2006 | 1 Comment

image केरल के एक एमसीए के छात्र सैनुल ने रेनबो नामक ऐसी तकनीक का ईजाद किया है जिसमें डेटा न केवल कागज़ जैसे सामान्य माध्यम पर स्टोर यानि संग्रहित किया जा सकता बल्कि यह संग्रहण रंगबिरंगी आकृतियों के रूप में किया जाता है। इस अधिक क्षमता, कम कीमत वाले पर्यावरणानुकूल और आसान माध्यम की रोचक जानकारी दे रहे हैं ईस्वामी। लेख पढ़ें »
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पिप्पी के मोज़ों में कबाड़ से जुगाड़

May 29, 2007 | 2 Comments

image पुस्तक समीक्षा में रवि रतलामी व देबाशीष लाये हैं बच्चों के लिये नायाब पुस्तकें जिनमें शामिल हैं खेल खेल में विज्ञान सिखाने वाली "कबाड़ से जुगाड़" तथा "जॉय आफ मेकिंग इंडीयन टॉय्ज़", ज्ञानवर्धक पुस्तकें  "खिलौनों का खज़ाना" और "नज़र का फेर" तथा कथा कहानी के शौकीनों के लिये "समंदर और मैं" तथा "पिप्पी लंबेमोज़े"। लेख पढ़ें »
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टेक्नोराती नये रूप में

July 1, 2005 | Leave comment

image एक और नया ब्लॉग एग्रीगेटर, टेकनोराती का नया सलोना रूप, ब्लॉगरों के लिये कानूनी गाईड और माईक्रोसॉफ्ट ने ब्लॉग पर लगाई सेंसर की बाँध. ये तथा अन्य ताजा खबरें सारे ब्लाग संसार से हमारे नियमित स्तंभ हलचल में. लेख पढ़ें »
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पहले मुर्गी आयी या अन्डा

May 23, 2005 | Leave comment

जितेन्द्र के बचपन के दोस्त सुक्खी बहुत ही सही आइटम हैं। उनकी जिन्दगी में लगातार ऐसी घटनायें होती रहती हैं जो दूसरों के लिये हास‍-परिहास का विषय बन जाती है। हास परिहास में पढ़िए सुने अनसुने लतीफ़े और रजनीश कपूर की नई कार्टून श्रृंखला "ये जो हैं जिंदगी"। साथ ही "शेर सवाशेर" में नोश फ़रमायें गुदगुदाते व्यंजल। लेख पढ़ें »
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