आमुख कथा

असली भारत के लिये असली शिक्षा

हमारी कर्मकाण्डी शिक्षा पद्धति वास्तविक भारत की ज़रूरत मुताबिक ढली ही नहीं है

हमारी शिक्षा पद्धति में बच्चे भारी बैग लिये फिरते हैं, जोर रहता हैं रटन विद्या और परीक्षाओं पर। यहाँ पाठ्यक्रम में बाहर से अर्जित ज्ञान, हुनर और काबलियतों को स्थान नहीं मिलता। शिक्षाविद व राष्ट्रीय शोध प्रोफेसर यश पाल मानते हैं कि आधुनिक औपचारिक शिक्षा तंत्र में प्रकृति और जीवन से सीखे हुनर को शामिल करना भी ज़रूरी है।

May 29th 2007, 5

विकास तय करने का भी अधिकार मिले: मेधा पाटकर

August 1, 2005 | 2 Comments

image नर्मदा घाटी के लोगों की अगुवाई करने वाली मेधा पाटकर ने एक वृहद, अहिंसक सामाजिक आंदोलन का रूप देकर समाज के समक्ष सरदार सरोवर बाँध के डूब क्षेत्र के विस्थापितों की पीड़ा को उजागर किया। मेधा तेज़तर्रार, साहसी और सहनशील आंदोलनकारी रही हैं। प्रस्तुत है मेधा से देबाशीष चक्रवर्ती की टेलिफोन पर हुई बातचीत के अंश। लेख पढ़ें »
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बमों को हमारे शून्य से गुणा कर दो

August 5, 2006 | 5 Comments

image पाकिस्तान न हों तो सैकडों वीररस के कवियों की दुकान बंद हो जाये। टेड़े सवालों के मेड़े जवाबों के साथ फिर हाज़िर हैं आपके फुरसतिया, अनूप शुक्ला। पढ़िये और आप भी पूछिये फुरसतिया से। लेख पढ़ें »
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जादुई तकनीक का वामनावतारः आईफ़ोन

February 9, 2007 | 1 Comment

image जनवरी में एप्पल ने कैमरा फ़ोन, पीडीए, मल्टीमीडिया प्लेयर व बेतार संचार प्रणाली से लैस आईफ़ोन के आगमन का शंखनाद किया। नये स्तंभ टेक दीर्घा में ईस्वामी जानकारी दे रहे हैं इस इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की जिसकी "एक क्रांतिकारी और जादुई उत्पाद" के रूप में हर तरफ चर्चा है। लेख पढ़ें »
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कोई भला चिट्ठा क्यों लिखना चाहेगा?

April 9, 2005 | 1 Comment

image चिट्ठाकारी आसान है और नियमित चिट्ठा लेखकों को पुस्तक प्रकाशन के अनुबंध या स्वतंत्र लेखन कार्य द्वारा अर्थलाभ मिलना भी कोई असंभव काम नहीं है। सारांश में पढ़ें बिज़ स्टोन की पुस्तक "हू लेट द ब्लॉग्स आउट" से एक चुने हुये लेख "वाई वुड एनीवन वाँट टू ब्लॉग?" का रमण कौल द्वारा किया हिन्दी रूपांतर। लेख पढ़ें »
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सामुदायिक प्रयत्नों के पसीने का प्रताप

June 1, 2005 | Comments Off on सामुदायिक प्रयत्नों के पसीने का प्रताप

image निरंतर का यह अंक वर्डप्रेस विशेषांक है। इस विशेषांक के जरिए हमारा प्रयास है कि हम वर्डप्रेस से संबंधित जानकारी रोचक तरीके से प्रस्तुत करे साथ ही आपको इस उत्पाद की सफलता के नेपथ्य में निहित सामुदायिक प्रयत्नों के पसीने की महक आप तक पहूँचा सके। लेख पढ़ें »
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जनता द्वारा, जन हित हेतु : विश्व भर में जल की रक्षा

August 1, 2005 | Comments Off on जनता द्वारा, जन हित हेतु : विश्व भर में जल की रक्षा

image दुनिया भर में ऐसे लोगों के बीच की खाई दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जिनके पास पानी पर्याप्त है और जो पानी को तरस रहे हैं। जल की उपलब्धता बड़ी समस्या है यह तो सभी मानते है पर इस से जुड़ी समस्याओं के हल पर आपसी सहमती और समन्वय न के बराबर है। प्रकृति की नेमत जल जो दरअसल एक मानवाधिकार होना चाहिये बहुराष्ट्रीय कंपनियों की कमाई का ज़रिया बन गया है। प्रस्तुत आलेख में अमरीका स्थित “पब्लिक सिटिज़न्स वॉटर फॉर ऑल” नामक अभियान की निर्देशिका वेनोना हॉटर कह रही हैं कि पानी जैसी मूल सेवाओं में निजी निवेशक को नहीं वरन् नागरिकों की सीधी भागीदारी को बढ़ावा मिलना चाहिए। लेख पढ़ें »
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आईये फॉयरफाक्स अपनाएं 2 – कड़ियाँ गरमा-गरम

April 9, 2005 | Comments Off on आईये फॉयरफाक्स अपनाएं 2 – कड़ियाँ गरमा-गरम

image "आईये फायरफॉक्स अपनायें" लेख श्रृंखला के पिछले भाग में आपने फायरफॉक्स के जन्म व मल्टी टैब्स की क्षमताओं के बारे में पढ़ा। इस भाग में आप जान सकेंगे फायरफॉक्स की एक अत्यंत प्रभावी व समय उपयोगी क्षमता - "लाइव बुकमार्क्स", जिसे इस श्रृंखला के लेखक पंकज नरूला "कड़ियाँ गरमा गरम" पुकारते हैं। लेख पढ़ें »
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ग़ज़लें रंगारंग

April 9, 2005 | Comments Off on ग़ज़लें रंगारंग

शेरजंग गर्ग द्वारा संकलित व संपादित गज़लें रंगारंग ग़ज़लों के इंद्रधनुषी रंगों में पाठक को सराबोर करने का एक सार्थक प्रयास है, कहना है पुस्तक की समीक्षा कर रहे रवि रतलामी का। लेख पढ़ें »
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वर्डप्रेस की सर्च-इंजनों में हेरफेर?

May 23, 2005 | 1 Comment

image क्या वर्डप्रेस ने सर्च इंजनों में हेरा फेरी की? क्या अमरीकी चिट्ठों को शक की नज़र से देखते हैं? सिक्स अपार्ट और अडोब मिल कर कौन सी खिचड़ी पका रहे हैं? और गूगल ने जीमेल में कौन सी नई तकनीक जोड़ी है? इन सवालों का जवाब पाने के लिये पढ़ें हमारा स्तंभ हलचल जिसमें पेश कर रहे हैं माह की चुनिंदा खबरें। लेख पढ़ें »
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मिर्जा ने झेला रैबिट फूड

July 1, 2005 | Comments Off on मिर्जा ने झेला रैबिट फूड

डाक्टर की सलाह पर मिर्जा की बेगम ने छुट्टन को हुक्म सुनाया कि अब साहब को सिर्फ सलाद खिलाया जायेगा। पर मिर्जा जी तो हैरीसन फोर्ड की नाई इस रैबिट फूड को न खाने की जिद कर चुके थे। पढ़िये अतुल अरोरा का लिखा प्रहसन। लेख पढ़ें »
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