सुपरमैन और अंडरवियर

Poochiye Fursatiya seघर, दफ्तर, सड़क हर जगह मुसीबतें आतीं हैं, सेंकड़ों सवाल उठ खड़े हो जाते हैं। अब सर खुजलाते खुजलाते हमारे रडार पर एक महारथी की काया दिखी तो उम्मीद कि किरणें जाग उठीं। अब कोई पप्पू फेल न होगा। (प्रभु, अब तक कहाँ थे आप?)

भक्तगण! प्रश्न चाहे किसी भी विषय पर हों, साहित्यिक हों या हों जीवन के फलसफे पर, सरल हो या क्लिष्ट, नॉटी हो या शिष्ट, विषय बादी हों या मवादी, कौमार्य हो या शादी, पूछ डालिये बेझिझक। सारे जवाब यहाँ दिये जायेंगे, फुरसत से। ससूरा गूगलवा भला अब किस काम का, पूछिये फुरसतिया से!

अगर आपकी पूर्व प्रेमिका अपने बच्चों को आपसे उनके मामा तौर पर मिलवाये तो आप क्या करेंगे?

भैये! प्रेमिका के बच्चों के मामा की स्थिति को प्राप्त होने के बाद फुरसतिया के लिये करने को बचेगा भी क्या – सिवाय चुपचाप मिल लेने के? सो चुपचाप मिल लेंगे। बाकी हमें लगता है कि प्रश्नकर्ता किसी उहापोह में है और कुछ टिप्स चाहता है। तो यह रहे कुछ मंत्रः

अपने जिगरे पर हाथ रखकर सोचो मानव – असफलता बताती है कि सफलता का प्रयत्न पूरे मन से नहीं किया गया है। तो जहां चूक हो गयी उसके बारे में जमाने को कोसो। अगर मौका बचा है तो फिर से नयी कोशिश में जुट जाओ। साथ ही तुम यह भी सोचकर खुश हो सकते हो कि चलो पूर्व प्रेमिका का ख्याल रखने वाले लोग और भी हैं।

अगर सच में उसे कभी चाहते रहे हो तो उसके जन्मदिन या शादी की सालगिरह पर प्रेम की सारी निशानियां (प्रेमपत्र, अंतरंग फोटो, इत्र सने रूमाल आदि-इत्यादि) अच्छे भूतपूर्व प्रेमियों की तरह वापस कर दो। इसे डायरी में नोट करोः असफल प्रेम के रूप में इंसान को ताजिंदगी एक ऐसे खुशनुमा एहसास का सहारा मिल जाता है जिसकी बदौलत वह अपने को सदा कुछ खास मानने का भ्रम पाल सकता है। इसके लिये तुम पाक़ परवरदिगार को दुआ दो कि कम से कम उसने जिंदगी भर प्रेमिका को याद रखने का मौका तो दिया।

अब अगरचे तुम्हारा प्यार बस छलावा रहा। और यह प्रेमिका कई प्रेमिकाओं में से एक रही हो तो खुश हो जाओ यह सोचकर कि अब दूसरी प्रेमिकाओं को ज्यादा समय दे सकोगे। शहीद होने से बाल-बाल बच निकलने के लिये "ईश्वर को धन्यवाद कैसे दें" नामक फुरसतिया की पुस्तक डाक से मंगवाने कि लिए 1001 रु का ड्राफ्ट भिजवा दो।

और हाँ! अपने "भान्जों" को ब्लॉग बनाना ज़रूर सिखा दो ताकि इंडीब्लागीज़ के वक्त वोट के काम आयें और लगे हाथों प्रेमिका के हालचाल भी मिलता रहे।

क्या भारत से कभी भ्रष्टाचार मिट पायेगा?

भ्रष्टाचार समाप्त करने की बात सोचना मानवाधिकार का सरासर उल्लंघन है

बड़ा देशद्रोही टाईप का सवाल है। यह पूछना वैसा ही है कि क्या तुम दूध से पानी और खून से कलेसट्रॉल हटा सकते हो। महानुभाव, हमारे देश का बहुत बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार यज्ञ में अपना योगदान देता है। भ्रष्टाचार समाप्त करने की बात सोचना उनके पेट पर लात मारना है, मानवाधिकार का सरासर उल्लंघन है। ऐसे प्रस्ताव कभी परवान नहीं चढ़ सकते।

कल्पना करो कि भ्रष्टाचार तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाये तो कुछ दृश्य जो फुरसतिया के ध्यान में आते हैं वे कैसे होंगे

  • साल में पाँच लाख रुपये पाने वाले अधिकारी की लड़की की शादी रूक जायेगी जिसने दहेज में एक करोड़ रुपये देने का वायदा कर रखा है।
  • नेताओं की देशसेवा की भावना की नदी तुरंत सूख जायेगी।
  • बुजुर्ग नेताओं तथा युवा नेताओं में लखनवी अंदाज में एक दूसरे नेतृत्व का मौका देने की अंतहीन प्रतियोगिता चलती रहेगी।
  • सड़कों से बंगले तथा सूखे से हरियाली निकलना बंद हो जायेगा। अधिकारी अपने कार्यकाल में बाढ़ तथा सूखे की कामना के लिये भगवान के यहां अर्जी लगवाना बंद कर देंगे।

वैसे किसी भी समाज में भ्रष्टाचार कम किया जा सकता है पर पूरी तौर पर कभी समाप्त नहीं हो सकता। कमी के लिये भ्रष्टाचार के अवसर कम करने होंगे। यह सब समाज के हर वर्ग के सहयोग के बिना असंभव है। जितना समाज जागरूक होगा, भ्रष्टाचार उतना ही कम होगा। किसी नैतिक चमत्कार से यह नहीं हो सकता। व्यवस्था में बुनयादी परिवर्तन के बिना यह बदलाव दिवास्वप्न है।

कहते हैं कि पैदल चलने और जॉगिंग करने से वजन कम होता है। तो क्या उल्टे पैर चलने से वजन बढ़ सकता है?

आर्यपुत्र, दुनिया के किसी भी स्कूल का हाईस्कूल पास या फेल बच्चा जानता है कि वजन का घटना शरीर में जमा ऊर्जा की खपत पर निर्भर करता है। जितनी ज्यादा ऊर्जा खपेगी वजन उतना ही ज्यादा कम होगा।

ऊर्जा एक अदिश राशि (Scalar Quantity) है। दिशा पर इसकी मात्रा निर्भर नहीं करती। आप चाहें आगे चलें, चाहें पीछे, वजन घटेगा ही। उल्टे पैर चलने में चूंकि गति कम होगी लिहाजा वजन भी कम घटेगा। पर बढ़ेगा कतई नहीं। इसके बाद भी अगर कोई उल्टे चलने का मन बनाता हैं तो तय है कि –

  • वह पैरों से नहीं दिमाग से पैदल है।
  • उसका दिमाग मोटा है जो कि उसको भूत की तरह पीछे दौड़ा रहा है।

फुरसतिया की मानो, उल्टे चलने का ख्याल मन से निकाल दो वरना निश्चित तौर पर गिरोगे और तुम्हारे वजन में प्लास्टर, मरहम पट्टी तथा स्ट्रेचर का वजन और जुड़ जाएगा। बूझे कि नहीं?

कहते हैं सुपरमैन सबसे ज्यादा बुद्धिमान होता है.तो फिर वो अंडरवियर अपनी पैंट के ऊपर क्यों पहनता है?

Supermanदेखो बरखुरदार, बुद्धिमत्ता में अगर थोड़ी बेवकूफी का ‘फ्लेवर’ हो तो बुद्धिमत्ता में चार चांद लग जाते हैं। दुनिया के तमाम बुद्धिमानों के बुद्धिमानी के किस्सों से ज्यादा उनके बेवकूफी के किस्से प्रचलित हैं। न्यूटन के नियमों से अनजान लोग भी जानते हैं कि न्यूटन ने अपनी छोटी-बड़ी बिल्लियों के निकलने के लिये दरवाज़े में अलग-अलग छेद बनवाये – जबकी बड़े छेद से दोनों बिल्लियां निकल सकती थीं। बल्ब के अविष्कारक के नाम से अनजान लोग भी यह जानते हैं कि बचपन में उसने मुर्गी की तरह अंडे पर बैठ कर सेने का प्रयास किया। हुसैन की पेंटिंग्स से ज्यादा उनका नंगे पांव चलना चर्चा में रहता है।

बुद्धिमानों की बेवकूफी के किस्से चलन में होने का कारण यह भी है कि लोग वे बेवकूफियां दोहरा कर महान बन जाते हैं। गांधीजी के ब्रम्हचर्य के प्रयोगों को दोहराकर बहुत सारे बुजुर्ग नेता बरास्ते शार्टकट उनके बराबर महान बन जाने की खुशफहमी पालते हैं। बॉलीवुड में शोहरत और पैसे की आकांक्षी कन्याएं इसका उलट रास्ता अपना कर प्रीती जिन्टा बनने के ख्वाब निर्देशक के साथ देखती हैं।

बात को समझाने दो। सुपरमैन एक काल्पनिक चरित्र है। पैंट के ऊपर अंडरवियर भी लेखक की कल्पना है। जिसके कारण निम्न हो सकते हैं-

  • सुपरमैन बहादुरी के कारनामे करता है। ऐसी स्थितियों में अक्सर कपड़े गीले हो सकते हैं। अब चूंकि ऐसी स्थितियों के दिन तय नहीं होते इसलिये उसे हमेशा तैयार रहना पढ़ता है। अंदर के संभावित गीलेपन को बाहर का अंडरवियर छिपाता है।
  • सुपरमैन बहादुर भी माना जाता है। बहादुरी तथा बेवकूफी में चोली-दामन का साथ है अगर वह कपड़े आम आदमियों की तरह पहनेगा तो लोग उसकी बहादुरी पर शक करेंगे। अंडरवियर ऊपर धारण करने की बेवकूफी करके वह ऐसे किसी भी शक को खत्म कर देता है।
  • कभी कस्टम चौकी पर तलाशी का नाटक होने पर वह अपना ऊपर का अंडरवियर उतारकर तलाशी करवा सकता है तथा यह रिकार्ड किया जा सकता है: अंडरवियर तक उतरवाकर तलाशी ली गयी, कुछ भी नहीं मिला। इससे तलाशी भी हो जाती है, सबकी इज्जत भी बची रहती है।

बातचीत शुरु करने के लिये मौसम ही सबसे ज्यादा उपयुक्त क्यों रहता है?

क्योंकि मिर्ज़ा, मौसम और बीवी दोनों के तेवर का अनुमान लगाना कठिन होता है। तिस पर बातचीत की किसी असफलता का ठीकरा हम मौसम के सर पर फोड़ सकते हैं। मौसम तो मूक होता है। आरोप चुपचाप सह लेता है बेचारा। पर स्व.रमानाथ अवस्थी कहते हैं –
 

कुछ कर गुजरने के लिये
मौसम नहीं मन चाहिये।

तो जनाब, मौसम का कंधा छोड़कर बातचीत शुरु करें। बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी।

अंततः…

सब जानते हैं कि शादी जी का जंजाल है, फिर भी सभी करते हैं क्यों?

शादी के बाद प्रेम अधूरा नहीं रहता, खलास हो जाता है।

देखो भइये! इस दुनिया में कोई संतुष्ट नहीं है – गरीब अमीर होना चाहते है, अमीर सुंदर होना चाहते हैं, कुंवारे शादी करना चाहते हैं और शादी-शुदा मरना चाहते हैं। शादी को लोग जी का जंजाल मानते हैं फिर भी करते हैं क्योंकि हर आदमी कोई हादसा देखकर सोचता है यह भयंकर ज़रूर है लेकिन मेरे साथ ऐसा नहीं होगा। प्रेम विवाह करने वाले भी इसलिये शादी करते हैं क्योंकि वे मानते हैं कि शादी बिना प्रेम अधूरा होता है। अरे मूढ़! शादी के बाद प्रेम खलास हो जाता है – अधूरा नहीं रहता।

कहानी पुरानी है फिर भी सुनाने में हर्ज नहीं है।

दो आदमी मरने के बाद यमराज के पास पहुंचे। एक ने अपने कर्मों का हिसाब दिया कि कैसे वह पत्नी के कष्ट सहता रहा। नहाने के बाद जीतू की ही तरह वह बाथरूम पोछता था। यमराज ने उसकी तपस्या को ध्यान में रखकर बिना कमीशन लिये उसे स्वर्ग में एक बर्थ एलॉट कर दी। दूसरे ने बताया कि उसने दो शादियां की। दोगुनी तपस्या की। उसके कष्ट की कल्पना मात्र से बेहोश होते-होते यमराज ने उसे यह कह कर भगा दिया कि बेवकूफों की यहां कोई जगह नहीं है।

शादी एक ऐसा जंजाल है जिसमें फंसकर दुनिया की हर समस्या छोटी लगने लगती है। लोग कहते हैं – कुंवारा वह जो चारों तरफ घूमे और तरह-तरह की समस्यायें पैदा कर ले। शादीशुदा को कहीं जाना नहीं पड़ता। वैसे तुम भी खुश ही दिखते हो इस जंजाल में फंसकर – क्या कहते हो!

फुरसतिया का अवतार ले कर हर महीने ऐसे ही रोचक सवालों के मज़ेदार जवाब देंगे अनूप शुक्ला। उनका अद्वितीय हिन्दी चिट्ठा "फुरसतिया" अगर आपने नहीं पढ़ा तो आज ही उसका रसस्वादन करें। आप अपने सवाल उन्हें anupkidak एट gmail डॉट कॉम पर सीधे भेज सकते हैं, विपत्र भेजते समय ध्यान दें कि subject में "पूछिये फुरसतिया से" लिखा हो। इस स्तंभ पर अपनी प्रतिक्रिया संपादक को भेजने का पता है patrikaa एट gmail डॉट कॉम

एक प्रतिक्रिया

  1. आज निरंतर पर आने का मौका मिला । काफ़ी अच्छा लगा । आपकी प्रोफ़ाइल देखी । काफ़ी कुछ एक साथ कर लेते आप ..। दो – तीन ब्लाग की निरंतरता के साथ अक्सर चिट्ठा चर्चा भी खूब करते हैं । बस एक छोटी सी जिज्ञासा का समाधान कीजिए । जैसा कि प्रोफ़ाइल में दर्ज़ है । आप राजपत्रित अधिकारी हैं और आयुध निर्माणी जैसे संस्थान में सेवा दे रहे हैं । नौकरी के लिए वक्त कब निकालते हैं ? क्या ब्लाग आपका पेशा और नौकरी आपका शौक है ? 1971 के बाद से कहीं आयुध निर्माणियों में काम तो बंद नहीं हो गया ?