वर्डप्रेस: ज़ीरो बन गया हीरो

नज़र वर्डप्रेस के जन्म से लेकर जवानी तक की यात्रा पर

ब्लॉग प्रकाशन के साधनों, जिन्हें ब्लॉगिंग टूल या सॉफ्टवेयर कहा जाता है, में मुक्त कोड पर आधारित तंत्रांश वर्डप्रेस ने कुछ ही सालों में अपनी एक खास जगह बना ली है। इतने सारे ब्लॉगिंग माध्यमों और मूवेबल टाईप जैसे बड़े खिलाड़ियों के रहते वर्डप्रेस ने अतिशय सफलता कैसे हासिल की यह जानना ज़रूरी है। “ज़ीरो बन गया हीरो” में पंकज नरुला नज़र डाल रहे हैं वर्डप्रेस के जन्म से लेकर जवानी तक की यात्रा पर। साथ ही जिक्र है इसकी क्षमताओं और इसे बनाने वालों की सोच के बारे में। पंकज वर्डप्रेस के कुशल प्रयोक्ता तो हैं ही, वर्डप्रेस के हिंदीकरण में भी इनका खासा योगदान रहा है।

ब्लॉ

गिंग 2004 का अंतर्जाल का सबसे प्रसिद्ध शब्द था। हर रोज करोड़ों की संख्या में विभिन्न देशों से विभिन्न संस्कृतियों के लोग कम्पयूटर पर अंतर्जाल पर कभी अपने बारे में, अपने आस पड़ोस के बारे में तो कभी किसी पढ़ी हुई खबर के बारे में लिखते रहते हैं। वह दिन बीत गए जब कि अपने विचार, अपना लिखा छपा पढ़ने के लिए बड़े अखबारों या मैगज़ीनो के “संपादक के नाम पत्र” कॉलम की राह तकते रहना पड़ता था। अब तो चिट्ठों यानि ब्लॉग्स के इस ज़माने में हर व्यक्ति एक प्रकाशक बन सकता है। कीबोर्ड पर कुछ खटर पटर की और लीजिए आप के विचार सारी दुनिया के लिये प्रेषित हो जाते हैं और मज़े की बात है कि दुनिया न केवल आपके विचार पढ़ सकती है बल्कि उस पर अपनी प्रतिक्रिया भी साथ ही लिख कर छोड़ सकती है। लेखक एवं पाठक का इतना त्वरित रिश्ता शायद ही पहले कभी बना हो। इन चिट्ठों को लेखक अपने जालस्थल पर ब्लॉगिंग सॉफ्टवेयर के जरिए प्रकाशित करते हैं। ब्लॉगर, बीटू, टाईपपैड, वर्डप्रैस, जेरोलर, पेब्बलमूवेबल टाईप ऐसे ही सॉफ्टवेयर यानि तन्त्रांश के उदाहरण हैं।

पाँच प्यारे प्लगइन

यूँ तो वर्डप्रेस के ढेर सारे प्लगईन हैं और कई बहुत मकबूल भी। पर ये पाँच संभवतः सबसे लोकप्रिय हैं। मौका मिले तो ज़रूर आज़मायें।

ब्लॉगर व टाईपपैड जैसे तन्त्रांश “सॉफ्टवेयर सेवा” के आदर्श पर आधारित है यानि किसी और ने सॉफ्टवेयर (जैसे ब्लॉगर गूगल ने तथा टाईपपैड सिक्सअपार्ट ने) स्थापना कर रखी है व आप उसका उपयोग कर अपने चिट्ठे लिखते हो। ये सेवायें मुफ्त या भुगतान आधारित हो सकती हैं। वर्डप्रैस व मूवेबल टाईप जैसे सॉफ्टवेयर आप स्वयं अपने लिए स्थापित करते हैं, ज़ाहिर है कि इसके लिये आपको वेबस्पेस यानी जालस्थल बनाने के लिये किसी सर्वर पर स्थान के लिये होस्टिंग सेवा का ग्राहक बनना होगा। आसानी के लिए ज्यादातर लोग ब्लॉगर, जो कि मुफ्त है, या फिर टाईपपैड का उपयोग करते हैं। लेकिन अपने चिट्ठे के बेहतर संचालन के लिए आप वर्डप्रैस अथवा मूवेबल टाईप का प्रयोग कर सकते हैं।

वर्डप्रैस अल्प समय में ही चिट्ठा सॉफ्टवेयर की दुनिया में काफी नाम कमा चुका है। इस बात का उदाहरण है सभी प्रमुख व प्रसिद्ध चिट्ठाकार वर्डप्रैस पर आ रहे हैं अब इसमें चाहे भारतीय आर्थिक व विदेश नीति के बारे में लिखने वाले इंडीब्लॉगीज़ पुरस्कार विजेता नितिन पई हों या फिर गीगाओम वाले बिज़नेस 2.0 के वरिष्ठ लेखक ओम मलिक। मकबूल ब्लॉगिंग सॉफ्टवेयर मुवेबल टाईप की लाईसेस नीति और कीमतों में परिवर्तन के बाद कई ख़फा प्रयोक्ताओं ने वर्डप्रेस की और रुख किया, इसके बाद तो ज्यों इसके सितारे ही बुलंद हो गये। आईऐ जानें कि वर्डप्रैस का यूँ जीरो से हीरो बनने का सफर कैसा रहा।

वर्डप्रैस की कहानी भी बड़ी मजेदार है। वर्डप्रैस के दो अवतार हुये हैं । अपने पहले अवतार में वर्डप्रैस का नाम था बीटू कैफेलॉग। बीटू के जनक थे माईकल व इसका पहला पदार्पण हुआ वर्ष 2001 में। बीटू पी.एच.पी पर आधारित था व इसकी खासयित यह थी की इसकी प्रविष्टियाँ लिखने के बाद प्रकाशन में समय न के बराबर लगता था। यदि आप ब्लॉगर का उपयोग करते हैं तो संभवतः समझ सकते हैं कि मैं क्या कह रहा हूँ। इस खासयित के अलावा बीटू की एक और खासयित थी जो कालक्रम में वर्डप्रैस के जन्म का कारक भी बनी। बीटू के रचनाकारों द्वारा यह मुक्त कोड लाइसेंस जी.पी.एल के अंतर्गत जारी किया गया था। इस लाइसेंस का मतलब यह था कि यदि कोई भी इसमें बदलाव कर नई क्षमताएँ जोड़ता है अथवा इस पर आधारित कुछ नई रचना करता है वह कृति भी जी.पी.एल के अंतर्गत ही जारी होगी। शुरु में तो बीटू का विकास बढ़िया चला व इसके कई नए संस्करण जारी हुए लेकिन फिर माईकल व्यस्त हो गए व बीटू का विकास स्थगित सा हो गया। इस बीच मैट मुलनवेग जो कि बीटू के अगले अवतार यानि वर्डप्रैस के रचयिता हैं बीटू पर कदम रख चुके थे (इसी अंक में मैट मुलनवेग का साक्षात्कार अवश्य पढ़ें)। उन के चिट्ठे की यह प्रविष्टि जिसमें वे बीटू के विकास के स्थगित होने पर मनन कर रहे हैं, कहानी कुछ यों बयां करती है –

अब क्या करें? टैक्सटपैटर्न वह सब कुछ है जो कि मैं माँग सकता हूँ, पर लगता नहीं कि यह कभी इस तरह से जारी हो पायेगा कि मैं उसके लाइसेंस से सहमत हो सकुँ। भाग्यवश, बीटू/कैफेलोग जी.पी.एल आधारित है, इसका मतलब है कि मैं अभी तक के कोडबेस का प्रयोग करके नई दिशा ले सकता हूँ व वे सभी क्षमताएं जोड़ सकता हूँ जो कि माईकल जोड़ता यदि वह उपस्थित होता। इस तरह से इतना किया गया काम नष्ट नहीं होगा और यदि मैं एक साल बाद इस धरती से गायब हो भी गया तो मेरे द्वारा लिखित कोड दुनिया के लिए रहेगा और यदि किसी को फिर से शुरु करना हुआ तो जहाँ मैंने छोड़ा वहीं से आरम्भ कर सकता है। मैंने निश्चय किया है कि मैं इसी तरह से कार्य करुँगा। अब तो बस एक नाम ही चाहिए। क्या होना चाहिए? अब देखिए, इसमें मूवेबल टाईप का लचीलापन, टैक्सटपैटर्न का पदविच्छेदन (पार्सिंग), बीटू की हैकिंग क्षमताएं और ब्लॉगर लगाने की आसानी होनी चाहिए। होगा किसी दिन, है ना?

इस प्रकार जनवरी 23, 2003 को की गई इस प्रविष्टि से वर्डप्रैस की नींव पड़ी और ठीक एक साल बाद इसका 1.0 प्रारुप जारी भी हो गया। तब से ले कर आज तक इसके 1.2, 1.3, व 1.5 प्रारुप आ चुके हैं। देखा जाये तो संप्रति, वर्डप्रैस एक अत्याधुनिक, सुगम एवं क्षमतावान सॉफ्टवेयर है। इसे प्रयोग करने वाले इसे बेइंतहा चाहते हैं व नित्य इसे और अच्छा बनाने में लगे रहते हैं। नज़र डालते हैं इसकी कुछ प्रमुख क्षमताओं पर-

  • सरल प्रयोग: इसका प्रयोग अत्यंत सरल है व कोई भी थोड़ी सी जानकारी लेकर आसानी से इसका प्रयोग कर अंतर्जाल पर प्रकाशन प्रारंभ कर सकता है। लंदन स्थित कवि महावीर शर्मा जी अपनी कविताएं इसी के ज़रिए प्रकाशित करते हैं और शायद अनिता बोरा के ब्लॉग स्थानांतरण की भी यही वजह हैं।
  • टिप्पणियाँ अथवा प्रतिक्रियाएं: इस क्षमता द्वारा लोग आपका लिखा पढ़कर तुरंत अपनी प्रतिक्रिया लिख सकते हैं। वर्डप्रैस में यह क्षमता 1.0 प्रारुप से ही है। कौन जानता था कि लोग अपने सपनों के बारे में लिखेंगे और पाठक उस का तार्किक विश्लेषण भी कर देंगे। यह अंतर्जाल पर चिट्ठों का ही कमाल है कि लेखक को कुवैत में सपना आता है और कानपुर से एक पाठक उसका विश्लेषण कर देते हैं।
  • अभिकल्प: वैसे तो कहा जाता कि लेख की विषय वस्तु ही सब कुछ है पर यदि यही लेख सुव्यवस्थित तरीके से सजाल पर हो तो लेख की पठनीयता कहीं अधिक बढ़ जाती है व पाठक भी नया लेख पढ़ने के लिए पुनः आते हैं। इन्हीं जरुरतों को पूरा करते हैं अभिकल्प। वर्डप्रैस में २५० से भी ज्यादा विभिन्न रुपों में अभिकल्प मौजूद हैं। इनकी सूची वर्डप्रैस के ज्ञानकोष में देखी जा सकती है। इस साल की अभिकल्प प्रतियोगिता के अभिकल्पों के नमूने देखें बॉक्स “अभिकल्प हों तो ऐसे” में
  • एकाधिक लेखक: वर्डप्रैस पर एक ही चिट्ठे के एक से अधिक लेखक भी हो सकते हैं। इससे समूहों द्वारा सामुदायिक ब्लॉग लिखना संभव हो पाया है। हिन्दी चिट्ठों के सामूहिक चिट्ठे अक्षरग्राम पर लगभग 50 लेखक योगदान देते हैं।
  • प्लगइन: वर्डप्रैस की मूलभूत क्षमताएं इन छोटे-छोटे अतिरिक्त सॉफ्टवेयर घटकों द्वारा और भी बढ़ाई जा सकती है। यह कुछ ऐसे ही जैसे कि आप नई कार खरीदने के बाद उसमें तरह तरह की नये उपसाधन लगाते हैं जैसे कि सी.डी.प्लेयर, जी.पी.एस सिस्टम इत्यादि। यह कार के चलने के लिए आवश्यक तो नहीं है पर इनके होने से कार की उपयोगिता बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए वर्डप्रैस के मौलिक प्रारुप में ताजा की गई टिप्पणियों की सूची दिखाने का आसान जरिया नहीं है पर आप इस प्लगइन का प्रयोग कर ताजी टिप्पणियां दिखा सकते हैं। ऐसे ही कुछ प्रसिद्ध व उपयोगी प्लगइन की सूची देखें बॉक्स आलेख “पाँच प्यारे प्लगइन!”।

वर्डप्रैस की अन्य विशेषताओं के बारे में आप वर्डप्रैस के सजाल पर सविस्तार पढ़ सकते हैं।लोगों के मन की छपास पीड़ा मिटाने वाले इस सॉफ्टवेयर के 1.5 संस्करण के, इस लेख के लिखे जाने तक 2,46,123 डाउनलोड हो चुके हैं। इस बढ़ती संख्या के पिछे कुछ कारण तो हम बता ही चुके हैं। पर यह खूबियाँ अन्य विकल्पों में भी हैं जो कि कुछ हद तक वर्डप्रेस की तरह ही मुफ्त हैं। जो विशेषता वर्डप्रेस को अतिविशिष्ट बनाती है संभवतः वह है इसका मुक्त कोड व जी.पी.एल आधारित होना। यही कारण है कि जब चिट्ठों की दुनिया के सबसे पहले सॉफ्टवेयर मूवेबल टाईप ने अपना लाइसेंस कुछ अधिक सीमित किया तो अखिल ब्लॉगमंडल में जैसे बवाल सा आ गया। मार्क पिलग्रिम जो कि इस समय मूवेबल टाईप पर थे ने अपनी प्रतिक्रिया फ्रीडम ओ प्रविष्टि में कुछ यों लिखी-

फ्रीडम ओ किसी भी प्रोग्राम को कैसे भी चलाने की स्वतंत्रता है। वर्डप्रैस मुझे यह आजादी देता है; मूवेबल टाईप नहीं। इसमें यह आजादी कभी थी ही नहीं, पर इसके द्वारा दी गई आजादी इतनी थी कि…हमने कहीं और देखा ही नहीं….वर्डप्रैस मुक्त सॉफ्टवेयर है। इसके नियम कभी नहीं बदलेंगे। गर ऐसी स्थिति आती भी है कि वर्डप्रैस समुदाय विभाजित हो जाता है और इसकी प्रगति रुक जाती है तो एक और समुदाय इसके द्वारा छोड़े गए कोड के आसपास खड़ा हो सकता है। ऐसा एक बार तो हो ही चुका है।

अभिकल्प हों तो ऐसे

इस बवाल से वर्डप्रैस को प्रयोग करने वालों में आतिशी बढ़ौतरी हुई। यह वृद्धि आज भी जारी है। इस बारे में वर्डप्रैस के रचयिता मैट मुलैनवग कहते हैं कि वर्डप्रेस मूलतः इसके प्रयोगकर्ताओं के ही बूते पर चल रहा है और इसकी सफलता का श्रेय इसकी अविश्वसनीय प्रयोक्ता समुदाय को ही जाना चाहिये। सही मायनों में किसी भी मुक्त कोड सॉफ्टवेयर के लिए एक समृद्ध समुदाय होना बहुत जरुरी है। इसी समुदाय के जरिए नए लोग जुड़ते हैं और लोग एक दूसरे के अनुभव से उस उत्पाद का प्रयोग व उसे अपने तरीके से ढालना सीखते हैं। चाहे अभिकल्पों की रचना हों या प्लगईन, समुदाय ने ही वर्डप्रेस की काबलियत को चार चाँद लगाये हैं (इसी अंक में पढ़ें वर्डप्रेस के लोकप्रिय अभिकल्प मांजी का सफरनामा ख़ालेद की ज़ुबानी)। यही तरीका होता है सॉफ्टवेयर बनाने वालों के लिए अपने प्रयोक्ताओं से जुड़ना व उनकी जरुरतें समझना। अच्छी बात है कि इस मामले में वर्डप्रैस प्रयोग करने वाले लोग काफी भाग्यशाली हैं।

किसी भी उत्पाद में ढेरों विशेषताओं के साथ साथ कुछ कमियां तो होती ही हैं। कुछ ऐसा ही वर्डप्रैस की साथ भी है। यदि आप तकनीकी तौर पर युनिक्स, माई एस.क्यू.एल में पारंगत हैं तो यह कमी आप के लिए मायने नहीं रखती। पर यदि आप कम्पयूटर को सामान्य कामों के लिए ही प्रयोग करते हैं और युनिक्स इत्यादि आप के लिए बाहर की दुनिया के शब्द हैं तो आप को या तो अपने वेब होस्ट से कह कर वर्डप्रैस लगवाना पड़ेगा या फिर आप का कोई दोस्त होना चाहिए जो ऐसा करना जानता हो। (वैसे यह राज़ की बात नहीं कि यदि आप मदद के लिए हिन्दी चिट्ठाकारों के गूगल समूह चिट्ठाकार को ईमेल भेजें तो कोई न कोई स्वयंसेवी आप की मदद के लिए बेशक आ जाएगा। साथ ही पढ़ें यह लेख।) वर्डप्रैस एवं हिन्दी चिट्ठाकारों का सहकारी ज्ञानकोष भी सहायता लेखों से अटे पड़े हैं। एक और कमी (जो कि भविष्य में ठीक हो सकती है) है कि आप वर्डप्रैस पर एक से ज्यादा चिट्ठे नहीं बना सकते। वैसे एक चिट्ठे के कई लेखक हो सकते हैं पर केवल एक ही स्थापन (इन्सटाल) पर एकाधिक चिट्ठे फिलहाल नहीं बनाये जा सकते।

आज के समय में चिट्ठा सॉफ्टवेयरों की दुनिया में वर्डप्रैस एक सम्पूर्ण व सर्वगुणसंपन्न विकल्प है। यदि वर्डप्रैस का प्रयोग करने वाली ब्लॉगर डॉट कॉम जैसी कोई मुफ्त सॉफ्टवेयर सेवा अंतर्जाल पर प्रारंभ होती है तो मुमकिन है कि जो लोग इसके तकनीकी पक्ष से आँख चुराते हैं वे भी इसके साथ सहर्ष आ जुड़ेंगे। अपने समृद्ध समुदाय के चलते वर्डप्रेस निरंतर आगे ही बढ़ेगा। मैट का कहना है कि वर्डप्रेस के अगले संस्करण में मीडिया संबंधित काफी प्रभावशाली चीज़ें जोड़ने की योजना है जिससे यह और ज्यादा रुचिकर आधार तंत्र बन कर उभरेगा। ज़ीरो से हीरो बने वर्डप्रेस की लोकप्रियता की नींव इसका प्रयोक्ता समुदाय है। आशा है कि इसे बनाने वाले समुदाय की रुचि इसे आगे बढ़ाने में बनी रहेगी जिससे सभी लाभान्वित होंगे।

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एक प्रतिक्रिया

  1. क्या खूब लिखा है सुंदर और सरल भाषा में। ऐसा स्कूलों में पढ़ाया जाये तो कितना अच्छा हो।
    Submitted by आशीष on Thu, 2005-06-02 09:50.