किस में कितना है दम

लिखो कविता, जीतो इनाम!

नीचे दिखाये चित्र और दिए गए शीर्षक को ध्यान से देखिए और रच डालिए एक छोटी सी कविता। कविता ज्यादा बड़ी न हो तो अच्छा, चार लाईना हो तो उत्तम, हाइकू हो तो क्या कहनें! शीर्षक मुख्यतः भाव के लिए है, पर आप इसे कविता में प्रयोग कर सकते हैं। कविता इस पोस्ट पर अपने टिप्पणी (कमेंट) के रूप में ही प्रेषित करें।

यदि आपकी रचना निरंतर संपादक मंडल को पसंद आ गई तो आप जीत सकेंगे बिज़ स्टोन की पुस्तक हू लेट द ब्लॉग्स आउट की एक प्रति।


किस में कितना है दम

प्रतियोगिता के नियम :

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  • रचना मौलिक व पूर्व अप्रकाशित होनी चाहिए।
  • एक प्रेषक से एक ही प्रविष्टि स्वीकार्य होगी।
  • संपादक मंडल का निर्णय साधारण अथवा विवाद की स्थिति में अंतिम व सर्वमान्य होगा।
  • किसी भी प्रविष्टि की प्राप्ति न होने या न जीतने पर पुस्तक आगामी अंकों में वितरित होगी।
  • संपादक मंडल व उनके परिवार के सदस्य इस प्रतियोगिता में भाग नहीं ले सकते।
  • एक बार पुरस्कृत विजेता को अगले ६ माह तक पुनः पुरस्कृत नहीं किया जा सकेगा। हालांकि पूर्व विजेताओं के भाग लेने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
  • क्षमा करें, डाक में पुस्तक खो जाने या पुस्तक अप्राप्ति कि जिम्मेवारी निरंतर नहीं ले सकता।
  • रचना भेजने की अंतिम तिथि हैः २० जुलाई, २००५

पिछली प्रतियोगिता के परिणाम

निरंतर के जून 2005 अंक की समस्या पूर्ति प्रतियोगिता में कोई भी प्रविष्टि पुरस्कार योग्य नहीं पाई गयी। सभी प्रतियोगियों का धन्यवाद! आप से भविष्य में भी भागीदारी की अपेक्षा रहेगी।

एक प्रतिक्रिया

  1. Archived comments:

    (1)
    तू मुझ से हो लाख बड़ा,
    तेरा जनक हूँ मैं ही।
    हाथ लड़ा या दिमाग़ लड़ा,
    पर जीतूँगा मैं ही।
    Submitted by rkaul on Thu, 2005-07-21 16:02.

    (2)
    महाशक्ति के अणु-शक्ति को भी सह न पाते हो ।
    थोड़ी ताकत पर ही इतना दंभ क्यों भरते हो ।

    आत्मा की निर्माण को ही समझ न पाते हो ।
    सिर्फ शरीर निर्माण समझना क्यों चाहते हो ।

    कमजोर काया का क्षणिक तुष्टिकरण क्यों करते हो ।
    किसमें कितना है दम, ऐसा प्रदर्शन क्यों करते हो ।
    Submitted by Prem on Wed, 2005-07-20 18:31.

    (3)
    मेरी विनती है कि नम्न पंक्तियां ‘समस्या पूर्ति’ की प्रतियोगिता में सम्मलित ना की
    जाये। मुझे यह चित्र आकर्षक लगा तो लिखने की उत्कण्ठा हुई। आप सब भी पढ़ें।

    “पाषाण को तराश कर, एक देवता बना दिया ।
    रोबॉट भी बना कर, सब कुछ तुझे सिखा दिया ।।
    याद रख ‘रिमोट’ में, तेरा वजूद बन्द है,
    किस में कितना दम है, गर स्विच ज़रा दबा दिया ।।”

    महावीर
    Submitted by Mahavir Sharma on Fri, 2005-07-15 21:53.

    (4)
    भगवान ने दिया ज्यादा
    इंसान ने लिया कम
    इंसान कभी इंसान से
    कभी मशीन से लडता है
    जांचता है परखता है
    किस में कितना है दम
    Submitted by NEERAJ TRIPATHI (not verified) on Mon, 2005-07-04 10:43.