दो बूँदें
By डॉ जगदीश व्योम | February 9th, 2007 | Category: वातायन | 1 Comment »
पढ़ें डॉ॰ जगदीश व्योम द्वारा लिखित यह लघुकथा »
"चिरकुट मिसिर का चिता की आग को उलट-पुलट कर हाथ व शरीर गरम करना, चिता जलने के बाद विष्ट के साथ ठेके पर दारू पीना और अब पत्नी द्वारा सारे कर्मकांड की बात भूलकर बिना नहाये रजाई में घुसने की अनुमति दे देना। लगता है कि आज मोक्ष की दुकान बंद है।" पढ़िये सशक्त कथाकार गोविंद उपाध्याय की लिखी कहानी। »