वर्डप्रेस किसी महानगरीय संस्कृति जैसी है

वर्डप्रेस समुदाय के दो कार्यकर्ताओं की पहली व्यक्तिगत मुलाकात का ब्यौरा

वर्डप्रेस अपने समुदाय के दम पर ही सफलता की चोटी पर चढ़ा है। अनगिनत लोगों का इसके विकास में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष योगदान रहा है। वर्डप्रेस के सक्रीय कार्यकर्ताओं में मार्क घोष और कार्थिक शर्मा अग्रणी रहे हैं। मार्क घोष पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। वे वर्डप्रैस के पुराने कार्यकर्ताओं में से एक हैं साथ ही हाल ही में आयोजित एक प्लगइन प्रतियोगिता के मेज़बान भी हैं। मार्क वर्डप्रैस पर आधारित फोटोब्लॉग पिक्टोरियलिस के रचयिता तो हैं ही देसी दलाल नामक जालस्थल के ज़रिए ये जनता को ताजा व सस्ते सौदों के बारे में भी बताते रहते हैं। त्रिचुर केरल के मूल बाशिंदे कार्थिक शर्मा आजकल फ्लोरिडा में कम्पयूटर इंजीनियरिंग पर पी.एच.डी कर रहे हैं। वे वर्डप्रैस के विकासकों में से एक रहे हैं।

समुदाय के मुतल्लिक अंतर्जाल पर सैंकड़ों बार मिले मार्क और कार्थिक जब हाल ही में लॉसवेगास, अमरीका में एक दूसरे से पहली बार रूबरू हुये तो निरंतर ने चुपके से उनकी बातचीत सुन ली। इस मुलाकात में वर्डप्रेस के दोनों सिपाहीयों ने इस ब्लॉगिंग तंत्रांश के समुदाय से जुड़ने और इस के साथ बिताये दिनों की यादें ताज़ा की। प्रस्तुत है इसी बेतरतीब चर्चा के कुछ अंशः

कार्थिकः मैंने तुम्हारी फोटो इन्टरनेट पर देखी हैं। तुम मार्क घोष ही हो न जो ‘माइंडफुल म्यूसिंग्स’ लिखते हैं? बड़ी खुशी हुयी मिलकर!

मार्क: जी हां, मैं वही मार्क हूं। अगर मैं गलत नहीं हूं तो तुम कार्थिक हो। बड़ा अच्छा लगा मिलकर।

कार्थिकः तुम यहाँ कैसे? मुझे लगा कि तुम प्लगइन प्रतियोगिता में व्यस्त हो। कैसी चल रही है प्रतियोगिता?

मार्क: प्रतियोगिता बड़ी मजेदार रही। मैं सोच रहा था कि बस कुछ ही लोग शामिल होंगे। लेकिन वर्डप्रेस ने मुझे फिर से आश्चर्यचकित कर दिया। सैंकड़ों लोगों ने भाग लिया, दसियों लोग और बहुत सारे विचार प्रतियोगिता के कारण ही सामने आये। एक और बात जिससे मैं बहुत रोमांचित हूँ वह यह है कि यह आयोजन नियमित रूप से होता रहेगा।

कार्थिक के मित्र: यह प्लगइन क्या बला है? पता नहीं तुम लोग क्या बातें कर रहे हो?

मार्क: वर्डप्रेस में यह सुविधा है कि आप मूल प्रोग्राम में छोटे-छोटे कोड डाल सकते हैं, जिन्हें प्लगइन कहते हैं। यह चलाने में प्लग लगाने जितना आसान है इसीलिये इसे यह नाम (प्लगइन) दिया गया। ‘वर्डप्रेस प्लगइन’ को ‘वर्डप्रेस ब्लॉग’ के स्थापन डायरेक्टरी में प्लगइन नामक फोल्डर में डालकर और ‘वेब कन्ट्रोल पैनल’ को चला कर स्थापित किया जा सकता है।

मार्क: और तुम्हारी पी.एच.डी. कैसी चल रही है। पी.एच.डी. और वर्डप्रेस में क्या ज्यादा मजेदार लगता है?

कार्थिकः मुझे लगता है यह दो साल में पूरी हो जायेगी, तो मामला इतना बुरा भी नहीं है। छात्र जीवन के लचीलेपन और जीवनचर्या के कारण मुझे तो यह बहुत पसंद है। वर्डप्रेस मेरा शौक, संजीदा शौक है। यह मुझे अच्छा लगता है तथा जिंदगी के बारे में खुशनुमा एहसास पैदा करता है। जहां तक पी.एच.डी. की बात है वह तो मेरी पहली प्राथमिकता है। इसलिये जब काम का बोझ बढ़ जाता है तो वर्डप्रेस के लिये समय निकालना मुश्किल हो जाता है।

मार्क: मैं बहुत समय से यह पूछना चाह रहा था। अब जबकि वर्डप्रेस चिट्ठाकारी का प्रमुख औजार बनता जा रहा है, वर्डप्रेस से जुड़े लोग इस बारे में क्या सोचते हैं। वर्डप्रेस के विकासकर्ता होने की बात सोच कर कैसा लगता है?

कार्थिकः सच तो यह है मार्क कि ‘वर्डप्रेस’ के लिये मुझसे ज्यादा काम तुमने किया है। मैंने वर्डप्रेस के विकास या डिबगिंग में हाल के दिनों में कुछ खास नहीं किया है। कारण यह रहा कि जबसे ‘मैट’ ने मेरा नाम वर्डप्रेस की साइट में इसके दस्तावेज़ बनाने वाले के रूप में दिया, तब से मुझे यह लगने लगा कि मेरा पहला काम वर्डप्रेस का बेहतर दस्तावेज़ बनाना है। इसलिये मुझे जो समय मिलता है वह मैं ‘कोडेक्स’ में लगाता हूं। इसमें खपना ज्यादा पड़ता है, मिलता कम है लेकिन मुझे खुशी है कि जितना बन सकता है, मैं करता हूं। वर्डप्रेस के लिये काफी कुछ किया जाना बाकी है। आप वर्डप्रेस की खामियाँ दूर कर सकते हैं। वर्तमान कोड को सुधार कर सकते हैं। बने हुये संस्करण को टेस्ट कर सकते हैं। दस्तावेज़ तैयार कर सकते हैं। फोरम पर लोगों की सहायता कर सकते हैं। प्लगइन या थीम लिख सकते हैं। वर्डप्रेस का अनुवाद प्रचार कर सकते हैं। मेरे लिये अकेले यह करना असंभव है। इसलिये मुझे जितना समय मिलता है उसमें मैं डाकूमेंटेशन करता हूँ। जब मैं फुरसत में होता हूं ,जैसे कि अभी हूं, तब मैं दूसरे पहलू देखता हूं और जितना संभव है उतना करने का प्रयास करता हू।

मार्क: यह बताओ कि तुम वर्डप्रेस से कैसे जुड़े?

कार्थिकः अगर किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार बताना हो तो वह तुम हो मार्क। मैं एक दिन टहलते-टहलते तुम्हारे ब्लॉग पर पहुँच गया और उस पोस्ट पर टिप्पणी की जिसमें वर्डप्रेस के बारे में लिखा था। इस पर तुमने पोस्ट लिखी जिसमें बताया कि लोग मूवेबल टाइप से वर्डप्रेस क्यों जाना चाहेंगे? इसके बाद मैं वर्डप्रेस में लिखने लगा। मैंने पाया कि लोग बहुत उत्साह बढ़ाने वाले हैं, खासतौर से मैट का रवैया बहुत दोस्ताना और सहायक रहा। मैंने सहायता फोरम से शुरुआत की तथा कुछ घंटे प्रतिदिन देने लगा उसे। वर्डप्रेस छोटा, बहुत अच्छे तालमेल वाला ग्रुप था जहां कि कुछ योगदान देना बहुत अच्छा लगता था। वर्डप्रेस को प्रयोग करना तथा इसमें सुधार करना बहुत आसान है। इसी से मुझे यह बहुत अच्छा लगता है और मैं इसे प्रयोग करता रहा। मैंने कुछ कोड दुबारा लिखे जिससे लोग मूवेबल टाइप से वर्डप्रेस में आसानी से आ सकें। इस तरह मैंने साथ बने रहने के लिये कुछ काम किया जिसकी मुझे खुशी है।

मार्क: आगे क्या विचार है? फिलहाल तो वर्डप्रेस में काम करने वालों की भरमार है। क्या तुम्हें लगता है कि अब यहां से चल देना चाहिये?

कार्थिकः अरे नहीं, फिर मैं अपने ब्लॉग को कैसे चलाऊँगा! मेरे विचार में वर्डप्रेस का भविष्य सुनहरा व स्थिर है और मैं किसी भी दूसरे कारण के मुकाबले उस आनंद के लिये हूं जो मुझे यहां मिलता है। साथ लगे लोगों को मैं बहुत चाहता हूं। मैं इससे जुड़ा रहूंगा। हो सकता है कि मैं जीवन से जुड़ी चीजों के बारे में लिखने में ज्यादा व्यस्त हो जाऊँ पर यह तय है कि तय है कि मैं अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देता रहूंगा। नया प्लगइन लिखना,नई थीम लिखना …इसी तरह की चीजें। थीम और प्लगइन से वर्डप्रेस बहुत समृद्ध हुआ है।

तुम्हारे प्लगइन और माड कम्पटीशन के बारे में अभी तक प्रतिक्रिया कैसी है?

जो लोग वर्डप्रेस के विकास में शामिल थे वे नये लोगों की सहायता करने के लिये आगे आये हैं और उनका आपस में अच्छा तालमेल है।

मार्क: इस पर तो मैं घंटों बात कर सकता हूं। मेरे अनुसार तो प्रतियोगिता सफल रही। अभी तक जिस तरह की प्रतिक्रिया मिली है मैंने उसकी कल्पना नहीं की थी। सैकड़ों डालर के इनाम, अपने प्लगइन सामने लाने तथा उनकी देखभाल करने वाले बीसियों लोग तथा प्लगइन ब्लॉग व विकी को पढ़ने वाले हजारों लोग जो कि हर हफ्ते अपने प्लगइन शामिल करना चाहते हैं। इस प्रतियोगिता में मैंने यह कोशिश की कि प्लगइन नये कोड से आयें और इसके पहले प्रयोग में न हों व पहले प्रकाशित न हुये हों। इसने लोगों को नया काम करने को उकसाया और बहुत से लोगों कि इस प्रतियोगिता से फायदा हुआ। अगर अभी तक तुम प्रतियोगिता वाले पन्ने नहीं देख पाये हो तो समय मिलने पर अवश्य देखो।

प्रतियोगिता काफी सफल रही। इसके लिये बहुत से लोगों ने अपना समय तथा पैसा दिया। लोग विकास तथा नये विचारों को प्रोत्साहित करना चाहते हैं। जो लोग वर्डप्रेस के विकास में शामिल थे वे नये लोगों की सहायता करने के लिये आगे आये है और आपस में अच्छा तालमेल है। वास्तव में यह समुदाय की जीत है।

कार्थिकः वर्डप्रेस के बारे में तुम्हारा अनुभव कैसा रहा। निश्चित तौर पर तुमने दूसरे तंत्र भी आजमायें होंगे।

मार्क: मैंने करीब तीन साल पहले ब्लॉगिंग के लिये वर्डप्रेस का प्रयोग शुरु किया। तब से मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा है। हां, यह अंतर जरूर आया है कि पहले मैं वर्डप्रेस से बेहतर ब्लॉगिंग का औजार खोजता है जबकि अब मैं देखता हूं कि वर्डप्रेस में वे नयी सुविधायें तथा सुधार कैसे शामिल किये जा सकते हैं जो दूसरी सेवायें प्रदान करती हैं। वर्डप्रेस ने मेरे पेशेवर जीवन में भी बहुत बदलाव लाये हैं। लेकिन उसके बारे में फिर कभी। तुम सुनाओ,क्या इसने तुम्हें भी बदला?

कार्थिकः बिल्कुल, वर्डप्रेस ने मुझे बहुत बदला है। वर्डप्रेस के पहले मैंने ‘ओपेन सोर्स’ और कुछ इसी तरह की चीजों के बारे में सुना था। लेकिन ज्यादा नहीं। जब मैंने वर्डप्रेस पर कुछ महीने काम करने के बाद, चीजें ‘ओपेन सोर्स’ में कैसे काम करती हैं, के बारे में मेरी समझ बढ़ी, खासकर दूसरे ‘ओपेन सोर्स’ की वकालत करने वाले उन लोगों के कारण जो वर्डप्रेस का उपयोग करते थे। वर्डप्रेस का प्रयोग शुरु करने के एक साल बाद अपनी सभी जरूरतों के लिये सभी कम्प्यूटरों पर मैंने ‘लायनेक्स’ का प्रयोग करना शुरु किया। यह परिवर्तन जितना मैंने सोचा था उसके मुकाबले बहुत आसानी से हो गया। अब मुझे उस तमाम अनाम अनजान लोगों के योगदान करने पर खुशी मिलती है जो मुझे मेरा कम्यूटर प्रयोग करने में मेरे सहायक हैं। तो वर्डप्रेस मेरे लिये व्यापक, खुले विश्व से जुड़ने की कड़ी रहा। मैं आशा करता हूं कि ‘ओपेन सोर्स’ का बुखार भारत को जल्द ही जकड़ लेगा और अधिक से अधिक भारतीय चिट्ठाकारी की दुनिया में उतरेंगे। इसके जबरदस्त आर्थिक और सामाजिक फायदे होंगे।

मार्क: मुझे बहुत समय तक ब्लॉगिंग का जुनून सवार रहा, अभी भी है। मेरे ख्याल में गंभीर चिट्ठाकार हर जगह हैं। भारतीय चिट्ठाकारों में चिट्ठाकारी के प्रति एक आकर्षण है जो कि मुझे बहुत अच्छा लगता है। मैं ढेर सारे ब्लॉग रोज पढ़ता हूँ तथा हमेशा नये ब्लॉग देखता हूँ। ज्यादातर मैं देखता हूँ कि ब्लॉग में क्या कोई नई, जरूरी चीज है। हालाँकि भारतीय ब्लॉग हर पोस्ट में मेरा ध्यान आकर्षित करते हैं। यहाँ तक की भारतीय तकनीकी ब्लॉग उसी धुन में गाते लगते हैं जो मेरे दिल के बेहद करीब है। हाल-फिलहाल तक भारतीय सिनेमा के कलाकारों पर लिखे ब्लॉग पढ़ने का लती हो गया था (एक समय मेरे पास काजोल से संबंधित बहुत मसाला जमा हो गया था) भारतीय उपमहाद्वीप में प्रतिभा का अथाह समुद्र है और ब्लॉगिंग के कच्चे माल को सामने लाना है। हमें अधिक से अधिक भारतीयों को ब्लॉग लिखने तथा ब्लॉगिंग के क्षेत्र में लाना है। यही एक कारण है कि मैं मानता हूं कि वर्डप्रेस में हमारे बीच खून का रिश्ता है।

कार्थिकः मैं सहमत हूँ मार्क! तुम्हारी वजह से ही मैं इस वर्डप्रेस समुदाय का सदस्य बना। मुझे याद है जब मैंने शुरु किया तब तुम थे, सुशुभ था। सशुभ को सपोर्ट फोरम में महारत हासिल थी। वह ही हमेशा हम लोगों के लिये मुस्कराते रहने का कारण बना रहता था। लगता है वह अपने ब्लॉग जगत में व्यस्त है। पंकज ने अन्य लोगों के साथ पहली बार वर्डप्रेस का अनुवाद का काम किया। इस तरह हिंदी में अनुवाद वर्डप्रेस का पहला अनुवाद था। इससे मुझे गर्व की अनुभूति होती है। हालाँकि वर्डप्रेस एक तरह से महानगरीय संस्कृति के अनुरूप है तथा दूसरे ओपन सोर्स प्रोजेक्ट की तरह आप तमाम नये, रुचिकर खुले दिमाग के लोगों से मिलते हैं जिनसे मिलना अच्छा लगता है।

मेरे ख्याल में भारत में नये ब्लॉगरों के सामने मुख्य समस्या पैसे की है। मेरा मतलब है कि जब आप ‘होस्टिंग ‘ करते हैं तो आपको भुगतान डालर में करना पड़ता है या डालर के बराबर रुपये में। मेरे विचार अगर इस तरह की सुविधा हो जहाँ लोग मुफ्त में ब्लॉग बना सकें तो बेहतर होगा। इसमें वेबलॉग बढ़िया काम कर रहा है और वहाँ के अधिकतर ब्लॉगर भारतीय हैं। इसका कारण शायद यह है कि वहाँ नये ब्लॉग शुरु करने में सहायता देने वाला कोई भारतीय था( मैं केवल अनुमान लगा रहा हूँ)। ब्लॉगसम भी होस्ट लिये जाने वाले चिट्ठों के लिये बढ़िया विकल्प है। मुझे लगता है कि भारत में अगर सस्ती और ज्यादा विश्वसनीय होस्टिंग उपलब्ध होती तो और मज़ा आता। भारतीय ब्लॉगरों में आमतौर पर ब्लॉगर प्रचलित है जो कि बढ़िया है।

मेरी मातृभाषा तमिल है और मैं मलयालम बढ़िया जानता हूँ और मैं वर्डप्रेस को इन भाषाओं में अनुवादित करने की कोशिश करूँगा। लेकिन मुझे लगता है कि यह काम बहुत बड़ा है और फायदा इससे बहुत कम मिलना है। मुझे नहीं लगता इन भाषाओं में बहुत से ऐसे ब्लॉगर हैं जो वर्डप्रेस को तमिल मलयालाम में चाहते हों। अगर मैं गलत हूँ तो बताओ। अलग-अलग भाषाओं के फॉन्ट से संबंधित बहुत सारे मसले तय होने हैं। मुझे बहुत निराशा होती है जब किसी साइट में जाने पर पता चलता है कि मैं उसे पढ़ नहीं सकता क्योंकि मेरे पास उसके फॉन्ट नहीं हैं। इसके अलावा मलयालम में जो कि संयुक्त अक्षरों को मिलाकर लिखी जाती है, ब्राउजर अलग कुछ दिखाता है जिससे इसे पढ़ना मुश्किल भरा हो जाता है। स्थानीय बेवसाइट से कुछ आशायें हैं लेकिन यह तब ही हो पायेगा जब अंग्रेजी के अलावा दूसरी भाषाओं में कम्प्यूटर प्रयोग करने वालों की संख्या में पर्याप्त बढ़ोत्तरी हो।

हिन्दी रूपांतरणः अनूप शुक्ला

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एक प्रतिक्रिया

  1. holy cow. does this blog post mention me!