जल है धरती की धमनी का रक्त
By निरंतर पत्रिका दल | August 1st, 2005 | Category: आमुख कथा | Comments Off
यदि लोग और समुदाय, सही सूचना स्रोतों से सशक्त हो कर, अपने आस पास के जल की स्थिति सुधारने का दायित्व अपने ऊपर लें, तो बड़ी कंपनियों, विकास संस्थाओं और केन्द्रीकृत सरकारों की मदद के बिना ही बहुत कुछ हासिल हो सकता है, कह रहे है वाटर स्टीवर्ड्स के रायन केस। »










