निधि

IDN करेंगे हिन्दी का नाम रोशन

संपूर्ण डोमेन नाम अपनी भाषा में लिख सकने के मार्ग हो रहे हैं प्रशस्त

जब जालपृष्ठ हिन्दी में है तो भला डोमेन नाम हिन्दी में क्यों नहीं? अन्तरराष्ट्रीय डोमेन नाम (IDN) द्वारा ग़ैर-अंग्रेज़ी भाषी इंटरनेट प्रयोक्ताओं को इसका हल तो मिला ही है, भविष्य में संपूर्ण डोमेन नाम अपनी भाषा में लिख सकने के मार्ग भी प्रशस्त हो रहे हैं। पढ़िये आइडीएन के बारे में विस्तृत जानकारी देता वरुण अग्रवाल का लिखा, रमण कौल द्वारा अनूदित लेख।

Jul 15th 2008, 2

वोट की राजनीति ने बनाये नपुंसक नेता

August 5, 2006 | 13 Comments

image बड़े बांध विकास के मापदंड माने जाते हैं। बांधों से बिजली जैसे फायदे प्रगति के सापेक्ष एक और कटुसत्य है डूब क्षेत्र से जन सामान्य का विस्थापन। पत्रकार विजय मनोहर तिवारी ने इन्दिरा सागर बांध परियोजना के डूब क्षेत्र में आये कस्बे 'हरसूद' में विस्थापन का अनुभव टीवी द्वारा लोगों तक पहुँचाया, तत्पश्चात अपने अनुभवों को लेखनीबद्ध किया पुस्तक 'हरसूद 30 जून' में। पढ़िये विजय से अनूप शुक्ला की बातचीत। लेख पढ़ें »
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कम्पयूटर स्त्रीलिंग है या पुर्लिंग?

March 29, 2005 | 1 Comment

image घर, दफ्तर, सड़क हर जगह मुसीबतें आतीं हैं, सेंकड़ों सवाल उठ खड़े हो जाते हैं। अब सर खुजलाते खुजलाते हमारे रडार पर एक महारथी की काया दिखी तो उम्मीद कि किरणें जाग उठीं। प्रश्न चाहे किसी भी विषय पर हों, साहित्यिक हों या हों जीवन के फलसफे पर, सरल हो या क्लिष्ट, नॉटी हो या शिष्ट, विषय बादी हों या मवादी, कौमार्य हो या शादी, पूछे जायेंगे बेझिझक फुरसतिया से! लेख पढ़ें »
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मोबाइल फ़ोन तेरे कितने रूप?

May 29, 2007 | 2 Comments

image मोबाइल फ़ोन डिजिटल कैमरा, एमपी3 प्लेयर, एफ़एम रेडियो के पर्याय तो थे ही। अब आप इसका इस्तेमाल क्रेडिट कार्ड के विकल्प के रूप में भी कर सकते हैं। रवि रतलामी बता रहे हैं  दो इसी तरह की सेवाओं के बारे में,  पहला एसएमएस आधारित पे-मेट तथा दूसरा मोबाइल एप्लीकेशन आधारित एम-चेक। लेख पढ़ें »
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ट्रैफ़िक जाम और सपने

August 1, 2005 | Leave comment

image सारांश में इस बार एक महिला लेखिका के प्रथम उपन्यास के अंश प्रकाशित करते हुए हमें हर्ष है। सामयिक प्रकाशन द्वारा प्रकाशित सुषमा जगमोहन के इस प्रयास "ज़िंदगी ई-मेल" का 28 जुलाई, 2005 को दिल्ली में विमोचन हुआ। सुषमा पेशे से पत्रकार हैं और उनकी रचनायें हंस, मधुमती व सखी जैसी पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। लेख पढ़ें »
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भारतीय समाज और भ्रष्टाचार

July 1, 2005 | Leave comment

image क्या भ्रष्टाचार हम भारतीयों के जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है? क्या हम कभी इससे स्वतंत्र हो पाएँगे? अन्तर्जाल पर किसका वर्चस्व रहेगा गुंडों मवालियों का या उनका जो रचनात्मक कार्य करते हैं, नए रास्ते खोलते हैं? इन दोनों मुद्दों पर पढ़ें निरंतर के जुलाई २००५ अंक की संपादकीय राय. लेख पढ़ें »
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जल है धरती की धमनी का रक्त

August 1, 2005 | Leave comment

image यदि लोग और समुदाय, सही सूचना स्रोतों से सशक्‍त हो कर, अपने आस पास के जल की स्थिति सुधारने का दायित्व अपने ऊपर लें, तो बड़ी कंपनियों, विकास संस्थाओं और केन्द्रीकृत सरकारों की मदद के बिना ही बहुत कुछ हासिल हो सकता है, कह रहे है वाटर स्टीवर्ड्स के रायन केस। लेख पढ़ें »
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लोग साथ आते गए, कारवां बनता गया

May 23, 2005 | Leave comment

हिन्दी में शायद यह पहली पत्रिका होगी जहां संपादक एक देश में, निदेशक दूसरे देश में और टाइपिस्ट तीसरे देश में हों; जब एक की दुनिया में दिन हो और दूसरे की दुनिया में रात। अंर्तजाल पर हिन्दी भाषा की अत्यंत लोकप्रिय साहित्यिक पत्रिका "अभिव्यक्ति" तथा  "अनुभूति" की रोचक व मर्मस्पर्शी यात्रा कथा बयां कर रही हैं पूर्णिमा वर्मन। लेख पढ़ें »
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लाल परी – भाग 4

May 29, 2007 | Leave comment

वातायन में आप पढ़ रहे हैं विश्व की पहली इंटरैक्टिव धारावाहिक कथा "लाल परी"। पिछले तीन भागों में, जैसा आपने चाहा था, नाटकियता थी और अरू और केडी की मस्त चैट। यदि आप पिछले भाग में लेखिका प्रत्यक्षा द्वारा लाई अप्रत्याशितता से हैरान थे तो कहानी का ये चौथा और अंतिम भाग शायद आपको बाल नोंचने पर मजबूर कर दे। इस अंक में पढ़िये इस रोचक कथा का पटाक्षेप। लेख पढ़ें »
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चिठ्ठाकारी को ज़्यादा गँभीरता से न लें

June 1, 2005 | Leave comment

image ब्लॉग नैशविल गोष्ठी पर एक रपट, अंतर्जाल पर हिन्दी के बढ़ते चरण, न्यूज़गेटर द्वारा फ़ीड-डेमन का अधिग्रहण, आई.बी.एम ने कर्मचारियों को दी चिट्ठाकारी करने की छूट, तीसमारखाँ ब्लॉगर और ऐसी ही और खबरें हलचल में। लेख पढ़ें »
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