निधि

ओपन आईडीः ताले अनेक, चाबी सिर्फ एक

सिंगल साईन आन की तर्ज़ पर आकार ले रही है ओपन आईडी प्रणाली

जितने जालस्थल उतने लॉगिन, अपने यूज़रनेम और पासवर्ड की जोड़ी याद रखना सरदर्दी है। शुक्र है कि सिंगल साईन आन की तर्ज़ पर अंतर्जाल पर भी एक प्रणाली आकार ले रही है, जिसका नाम है ओपन आईडी। निधि में पढ़ें आईडेन्टिटी 2.0 और ओपन आईडी की जानकारी देता देबाशीष चक्रवर्ती का आलेख।

Feb 9th 2007, 4

मनोचिकित्सा से फ़िल्म निर्देशन तक

July 12, 2008 | Leave comment

image डॉ परवेज़ इमाम ने चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई पूरी कर मनोचिकित्सक का पेशा अपनाया पर अस्पताल की बजाय उनकी कर्मभूमि बनी वृतचित्र यानि डाक्यूमेंट्री फ़िल्मों की दुनिया। टीवी कार्यक्रम टर्निंग प्वाईंट से शुरुवात कर उन्होंने अब तक अनेकों पुरस्कृत वृत्तचित्रों का निर्माण किया है। संवाद में पढ़ें परवेज़ के जीवन और अनुभव पर डॉ सुनील दीपक से हुई उनकी बातचीत। लेख पढ़ें »
संवाद से अन्य आलेख »

आस्था की तुष्टि से संतोष मिलता है

May 23, 2005 | Leave comment

image रात के बाद सबेरा होता है या सबेरे के पहले रात? आजकल हसीनों में शर्मोहया क्यों नहीं है? पूजा के समय भगवान को प्रसाद व भोग चढ़ाया जाता है, यह जानते हुये भी कि अंतत: खाना इन्सान को ही है। आखिर क्यों? ऐसे ही टेड़े सवालों के मेड़े जवाब दे रहे हैं हाजिर जवाब फुरसतिया! लेख पढ़ें »
पूछिये फुरसतिया से से अन्य आलेख »

मोबाइल फ़ोन तेरे कितने रूप?

May 29, 2007 | 2 Comments

image मोबाइल फ़ोन डिजिटल कैमरा, एमपी3 प्लेयर, एफ़एम रेडियो के पर्याय तो थे ही। अब आप इसका इस्तेमाल क्रेडिट कार्ड के विकल्प के रूप में भी कर सकते हैं। रवि रतलामी बता रहे हैं  दो इसी तरह की सेवाओं के बारे में,  पहला एसएमएस आधारित पे-मेट तथा दूसरा मोबाइल एप्लीकेशन आधारित एम-चेक। लेख पढ़ें »
टैक दीर्घा से अन्य आलेख »

कोई भला चिट्ठा क्यों लिखना चाहेगा?

April 9, 2005 | 1 Comment

image चिट्ठाकारी आसान है और नियमित चिट्ठा लेखकों को पुस्तक प्रकाशन के अनुबंध या स्वतंत्र लेखन कार्य द्वारा अर्थलाभ मिलना भी कोई असंभव काम नहीं है। सारांश में पढ़ें बिज़ स्टोन की पुस्तक "हू लेट द ब्लॉग्स आउट" से एक चुने हुये लेख "वाई वुड एनीवन वाँट टू ब्लॉग?" का रमण कौल द्वारा किया हिन्दी रूपांतर। लेख पढ़ें »
सारांश से अन्य आलेख »

धौंस नहीं सहेंगे चिट्ठों के सिपाही

April 9, 2005 | 1 Comment

image आंदोलन का प्रतीक माने जाने वाले अखबार कार्पोरेट्स के हाथों अपना ज़मीर बेच चुके हैं। ऐसे में ब्लॉग्स का ईमानदार स्वर आशाएं जगाता है। पढ़िये ब्लॉग्स पर मीडिया मुगलों की दादागिरी पर निरंतर का दो टूक संपादकीय।साथ ही पढ़ें याहू द्वारा फ्लिकर के अधिग्रहण और याहू 360° के पर्दापण पर निरंतर द्वारा बदलते परिदृश्य का आंकलन, "बड़े खिलाड़ी के आने से बड़ा हुआ खेल"। लेख पढ़ें »
नज़रिया से अन्य आलेख »

जनता द्वारा, जन हित हेतु : विश्व भर में जल की रक्षा

August 1, 2005 | Leave comment

image दुनिया भर में ऐसे लोगों के बीच की खाई दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जिनके पास पानी पर्याप्त है और जो पानी को तरस रहे हैं। जल की उपलब्धता बड़ी समस्या है यह तो सभी मानते है पर इस से जुड़ी समस्याओं के हल पर आपसी सहमती और समन्वय न के बराबर है। प्रकृति की नेमत जल जो दरअसल एक मानवाधिकार होना चाहिये बहुराष्ट्रीय कंपनियों की कमाई का ज़रिया बन गया है। प्रस्तुत आलेख में अमरीका स्थित “पब्लिक सिटिज़न्स वॉटर फॉर ऑल” नामक अभियान की निर्देशिका वेनोना हॉटर कह रही हैं कि पानी जैसी मूल सेवाओं में निजी निवेशक को नहीं वरन् नागरिकों की सीधी भागीदारी को बढ़ावा मिलना चाहिए। लेख पढ़ें »
आमुख कथा से अन्य आलेख »

आईए फायरफॉक्स अपनाएं – 1

March 29, 2005 | Leave comment

image निधि में प्रस्तुत होगी जाल और चिट्ठाकारी के तकनीकी मुद्दों पर चर्चा और आलेख। इस अंक में पंकज नरूला की कलम से फायरफॉक्स के प्रयोग पर रोचक लेख का पहला भाग जिसमें सीखें टैब्ड ब्राउज़िंग के गुर। लेख पढ़ें »
निधि से अन्य आलेख »

अमृता इमरोज़: रूहानी रिश्तों की बयानी

July 12, 2008 | 3 Comments

image उमा त्रिलोक ने अपनी किताब में इमरोज़ और अमृता की रूहानी मोहब्बत के जज़्बे को तो खूबसूरती से अभिव्यक्त किया ही है, साथ ही अमृता प्रीतम के जीवन के आखिरी लम्हों को भी अपनी कलम से बख़ूबी बटोरा है। पढ़िये पुस्तक अमृता इमरोज़ की रविशंकर श्रीवास्तव व रंजना भाटिया द्वारा समीक्षायें। लेख पढ़ें »
वातायन से अन्य आलेख »

चिठ्ठाकारी को ज़्यादा गँभीरता से न लें

June 1, 2005 | Leave comment

image ब्लॉग नैशविल गोष्ठी पर एक रपट, अंतर्जाल पर हिन्दी के बढ़ते चरण, न्यूज़गेटर द्वारा फ़ीड-डेमन का अधिग्रहण, आई.बी.एम ने कर्मचारियों को दी चिट्ठाकारी करने की छूट, तीसमारखाँ ब्लॉगर और ऐसी ही और खबरें हलचल में। लेख पढ़ें »
हलचल से अन्य आलेख »


निरंतर के लेखक

All authors