आमुख कथा

पानी का अभाव – धारणाएँ, समस्याएँ और समाधान

2025 तक विश्व की आधी आबादी भीषण जलसंकट झेलने पर विवश होगी। क्या है इस संकट की जड़?

जल मनुष्य की बुनियादी ज़रूरत है, इसे मानवाधिकार का दर्जा भी दिया जाता है। इसके बावजूद दुनिया भर में लगभग 100 करोड़ लोगों के पास शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं होता। कहा जाता है कि सन् 2025 तक विश्व की 50 फीसदी आबादी भयंकर जल संकट झेलने को मजबूर होगी। इस संकट की जड़ क्या है? इस से मुकाबला कैसे किया जाये ताकि “सबके लिये पानी” का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके? प्रस्तुत है इन सारे विषयों और जल से जुड़े अन्य मुद्दों पर विहंगम दृष्टि डालता चंद्रिका रामानुजम व राजेश राव का आलेख।

Aug 1st 2005

खुद को पत्नी माना ही नहीं कभी

November 4, 2006 | 4 Comments

image कथाकार व उपन्यासकार मैत्रेयी पुष्पा समकालीन महिला हिंदी लेखन की सुपरस्टार हैं। पिछले दिनों हंस के एक अंक में संपादक राजेंद्र यादव ने मैत्रेयी की तुलना मरी हुयी गाय से की, इस पर साहित्य जगत में काफी हलचल हुयी। यह और अन्य अनेक बिंदुओं को लेकर वरिष्ठ कथाकार अमरीक सिंह दीप ने मैत्रेयी पुष्पा से विस्तार से बातचीत की। लेख पढ़ें »
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आस्था की तुष्टि से संतोष मिलता है

May 23, 2005 | Leave comment

image रात के बाद सबेरा होता है या सबेरे के पहले रात? आजकल हसीनों में शर्मोहया क्यों नहीं है? पूजा के समय भगवान को प्रसाद व भोग चढ़ाया जाता है, यह जानते हुये भी कि अंतत: खाना इन्सान को ही है। आखिर क्यों? ऐसे ही टेड़े सवालों के मेड़े जवाब दे रहे हैं हाजिर जवाब फुरसतिया! लेख पढ़ें »
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मोबाइल फ़ोन तेरे कितने रूप?

May 29, 2007 | 2 Comments

image मोबाइल फ़ोन डिजिटल कैमरा, एमपी3 प्लेयर, एफ़एम रेडियो के पर्याय तो थे ही। अब आप इसका इस्तेमाल क्रेडिट कार्ड के विकल्प के रूप में भी कर सकते हैं। रवि रतलामी बता रहे हैं  दो इसी तरह की सेवाओं के बारे में,  पहला एसएमएस आधारित पे-मेट तथा दूसरा मोबाइल एप्लीकेशन आधारित एम-चेक। लेख पढ़ें »
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वेबलॉग नीतिशास्त्र

March 29, 2005 | Comments Off on वेबलॉग नीतिशास्त्र

image सारांश में पेश करते हैं पुस्तकाँश या पुस्तक समीक्षा। निरंतर के पहले अंक में हमें प्रसन्नता है रेबेका ब्लड की पुस्तक "द वेबलॉग हैन्डबुक" के अंश का हिन्दी रूपांतर प्रस्तुत करते हुए। रेबेका 1996 से अंर्तजाल पर हैं, उनका ब्लॉग रेबेकाज़ पॉकेट खासा प्रसिद्ध है। लेख पढ़ें »
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धौंस नहीं सहेंगे चिट्ठों के सिपाही

April 9, 2005 | 1 Comment

image आंदोलन का प्रतीक माने जाने वाले अखबार कार्पोरेट्स के हाथों अपना ज़मीर बेच चुके हैं। ऐसे में ब्लॉग्स का ईमानदार स्वर आशाएं जगाता है। पढ़िये ब्लॉग्स पर मीडिया मुगलों की दादागिरी पर निरंतर का दो टूक संपादकीय।साथ ही पढ़ें याहू द्वारा फ्लिकर के अधिग्रहण और याहू 360° के पर्दापण पर निरंतर द्वारा बदलते परिदृश्य का आंकलन, "बड़े खिलाड़ी के आने से बड़ा हुआ खेल"। लेख पढ़ें »
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एड्स से कैसे बचा जाए

August 5, 2006 | 5 Comments

image एड्स के संक्रमण के तीन मुख्य स्रोत हैं - यौन संबंध, रक्त द्वारा तथा माँ से शिशु को संक्रमण। यानी एड्स से कोई भी सुरक्षित नहीं। पर क्या एड्स से बचा जा सकता है? जी बिल्कुल! बचाव के तरीके जानने के लिये पढ़ें रमण कौल का आलेख। लेख पढ़ें »
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ओपन आईडीः ताले अनेक, चाबी सिर्फ एक

February 9, 2007 | 4 Comments

image जितने जालस्थल उतने लॉगिन, अपने यूज़रनेम और पासवर्ड की जोड़ी याद रखना सरदर्दी है। शुक्र है कि सिंगल साईन आन की तर्ज़ पर अंतर्जाल पर भी एक प्रणाली आकार ले रही है, जिसका नाम है ओपन आईडी। निधि में पढ़ें आईडेन्टिटी 2.0 और ओपन आईडी की जानकारी देता देबाशीष चक्रवर्ती का आलेख। लेख पढ़ें »
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लाल परी – भाग 2

September 22, 2006 | 2 Comments

वातायन में आप पढ़ रहे हैं विश्व की पहली इंटरैक्टिव धारावाहिक कथा "लाल परी"। पहला भाग पढ़ कर पाठकों की आम राय थी कि केडी और अरु की चैट कुछ और चले और नाटकियता कुछ और जुड़े। हम तो हुकुम के गुलाम हैं, लेखिका प्रत्यक्षा कहती हैं, और चटपट अगला भाग जनता की डिमांड पर लिख दिया। पढ़ें कथा का दूसरा भाग पढ़ें और तय करें कहानी का अगला भाग कैसा हो। लेख पढ़ें »
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आस्कजीव्स ने निगला ब्लॉगलाईंस को

March 29, 2005 | Leave comment

image क्या याहू सिक्स आपार्ट को हथिया लेगा? क्या गूगल अब डोमेन भी बेचेगा? ये और ढेर सारी और खबरें। पढ़िए माह के दौरान घटित ब्लॉगजगत से संबंधित खबरें तड़के के साथ। लेख पढ़ें »
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विशेषज्ञ बिन सब सून

April 9, 2005 | Leave comment

जीवन के हर क्षेत्र में विशेषज्ञों की घुसपैठ जारी है। व्यक्ति के जन्म लेने से पहले ही विशेषज्ञों का रोल चालू हो जाता है। कटाक्ष कर रहे हैं रविशंकर श्रीवास्तव। लेख पढ़ें »
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