निधि

क्या आप टैगिंग करते हैं?

अंतर्जाल के विहंगम आकार के लिये वर्गीकरण की नई पद्धति है टैगिंग

टैगिंग जानकारी की जमावट और लोगों को जोड़ने का एक नया क्राँतिकारी माध्यम है जो अराजकता से व्यवस्था की सृष्टि कर मानवीय भावनाओं का प्रतीक भी बन चला है। देबाशीष चक्रवर्ती के आलेख द्वारा प्रवेश कीजिये कीवर्ड के साम्राज्य में और अंदाज़ा लगाईये टैगिंग के भविष्य का।

May 23rd 2005

ब्लॉग से देश नहीं बदलेगाः अतानु डे

March 29, 2005 | 1 Comment

image संवाद, जिसके तहत हर माह आप रूबरू हो सकेंगे चिट्ठा जगत के ही किसी पहचाने नाम से, में इस बार प्रस्तुत है साक्षात्कार इंडीब्लॉगीज़ 2004 में सर्वश्रेष्ट ब्लॉग के पुरस्कार से नवाज़े गए चिट्ठे "दीशा" के रचयिता अतानु डे से। लेख पढ़ें »
संवाद से अन्य आलेख »

नारियल का मिर्ची के साथ गठबंधन

July 1, 2005 | 1 Comment

बंगलौर में नारियल की चटनी में इतनी मिर्ची क्यों डालते हैं? तोगडिया जी हमेशा गुस्से मे क्यों रहते है? आग लगने पर ही पानी भरने की याद क्यों आती है? जब ये सवाल पूछे गये हैं फुरसतिया से तो भई जवाब भी मजेदार ही होंगे, फुरसतिया स्टाईल. लेख पढ़ें »
पूछिये फुरसतिया से से अन्य आलेख »

टेरापैड: ब्लॉगिंग से आगे की सोच?

May 29, 2007 | 1 Comment

image टेरापैड कुछ ऐसी सेवाओं व विशेषताओं को आपके लिए लेकर आया है जो आपकी पारंपरिक चिट्ठाकारी की दशा व दिशा को बदल सकता है। जानिये रविशंकर श्रीवास्तव क्या कहते हैं इस नये ब्लॉग प्लैटफॉर्म के बारे में। लेख पढ़ें »
टैक दीर्घा से अन्य आलेख »

वेबलॉग नीतिशास्त्र

March 29, 2005 | Comments Off on वेबलॉग नीतिशास्त्र

image सारांश में पेश करते हैं पुस्तकाँश या पुस्तक समीक्षा। निरंतर के पहले अंक में हमें प्रसन्नता है रेबेका ब्लड की पुस्तक "द वेबलॉग हैन्डबुक" के अंश का हिन्दी रूपांतर प्रस्तुत करते हुए। रेबेका 1996 से अंर्तजाल पर हैं, उनका ब्लॉग रेबेकाज़ पॉकेट खासा प्रसिद्ध है। लेख पढ़ें »
सारांश से अन्य आलेख »

बलॉगिंग विथ परपस

March 29, 2005 | Leave comment

image जिह्वा ने जब अपना प्रसिद्ध चिट्ठा बंद किया तो उनकी उकताहट छुपती न थी। क्या चिट्ठाकार मूलतः अपने मेट्रिक्स में कैद आत्ममुग्ध अंर्तमुखी लेखक ही हैं बस? क्या वे समाज के सत्य से रूबरू ही नहीं होना चाहते? नज़रिया स्तंभ में पढ़िये संपादक की कलम से निरंतर का परिचय और चिट्ठा जगत पर नुक्ता चीनी के साथ पाईए परिचय आमुख कथा का। लेख पढ़ें »
नज़रिया से अन्य आलेख »

असली भारत के लिये असली शिक्षा

May 29, 2007 | 5 Comments

image हमारी शिक्षा पद्धति में बच्चे भारी बैग लिये फिरते हैं, जोर रहता हैं रटन विद्या और परीक्षाओं पर। यहाँ पाठ्यक्रम में बाहर से अर्जित ज्ञान, हुनर और काबलियतों को स्थान नहीं मिलता। शिक्षाविद व राष्ट्रीय शोध प्रोफेसर यश पाल मानते हैं कि आधुनिक औपचारिक शिक्षा तंत्र में प्रकृति और जीवन से सीखे हुनर को शामिल करना भी ज़रूरी है। लेख पढ़ें »
आमुख कथा से अन्य आलेख »

दिल्ली अभी दूर, पर चलते रहना है ज़रूर

July 1, 2005 | 2 Comments

image संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी हिन्दी सॉफ़्टवेयर उपकरणों और फ़ॉण्ट संग्रह की मुफ़्त सीडी से हिन्दी के प्रयोक्‍ताओं की आशाओं को पूरी होगी या नहीं यह जानने के लिए विनय जैन ने इन उपकरणों का परीक्षण किया। लेख पढ़ें »
निधि से अन्य आलेख »

गालिब छुटी शराब : भाग 1

May 29, 2007 | 2 Comments

'नया ज्ञानोदय' के संपादक रविन्द्र कालिया का नाम परिचय का मोहताज नहीं है। हमें हर्ष है कि अपने संस्मरण "गालिब छुटी शराब" को निरंतर में धारावाहिक रूप से प्रकाशित करने की अनुमति दी है। पढ़िये इसका प्रथम भाग। आभारः प्रत्यक्षा व प्रबुद्ध। लेख पढ़ें »
वातायन से अन्य आलेख »

बोलबाला मीडिया रिच चिट्ठों का

April 9, 2005 | Leave comment

image याहू 360° का आगमन, याहू द्वारा फ्लिकर के अधिग्रहण की अफ़वाहें, पत्रकार प्रद्युम्न माहेश्वरी के प्रसिद्ध ब्लॉग मीडियाह पर टाईम्स आफ इंडिया ने लगवाया ताला और आस्कर अवार्ड्स ने भी बनाया अपना ब्लॉग। ये, और ढेर सारी और खबरें। हमारे स्तंभ हलचल में पढ़िए माह के दौरान घटित ब्लॉगजगत से संबंधित खबरें तड़के के साथ। लेख पढ़ें »
हलचल से अन्य आलेख »

मिर्जा ने झेला रैबिट फूड

July 1, 2005 | Leave comment

डाक्टर की सलाह पर मिर्जा की बेगम ने छुट्टन को हुक्म सुनाया कि अब साहब को सिर्फ सलाद खिलाया जायेगा। पर मिर्जा जी तो हैरीसन फोर्ड की नाई इस रैबिट फूड को न खाने की जिद कर चुके थे। पढ़िये अतुल अरोरा का लिखा प्रहसन। लेख पढ़ें »
हास परिहास से अन्य आलेख »


निरंतर के लेखक

All authors